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Bhiwani News: राजस्थान सीमा से सटे भिवानी में 45.5 डिग्री में तप उठी जमीन, जनजीवन प्रभावित
Tue, 28 May 2024 12:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Tue, 28 May 2024 12:01 AM IST
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लू से बचने के लिए वैश्य काॅलेज के पास चहरे पर चुन्नी बांधकर गंतव्य की और जाती महिलाएं।
भिवानी। नौतपा के तीसरे दिन सोमवार को लू के थपेड़ों से लोगों को बेहाल कर दिया। दिन में 45.5 डिग्री तापमान में लोग घरों से बाहर नहीं निकल पाए। न्यूनतम तापमान 30 डिग्री दर्ज किया गया। ऐसे में गर्मी से बचाव के लिए एसी भी फेल होने लगे हैं। पर रात को कूलर चलने से कुछ राहत मिल पाती है। इसमें भी लोगों को कूलर से बनने वाली उमस परेशान कर रही है। मौसम विशेषज्ञों ने इस सप्ताह लगातार गर्मी पड़ने की संभावना जताई है।
सोमवार को सुबह से ही तेज धूप के साथ दिन की शुरुआत हुई। सिविल सर्जन डॉ. रघुवीर शांडिल्य ने बताया कि इन दिनों हीट वेव से अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ी है। ओपीडी में सोमवार को मरीजों की संख्या करीब 1500 रही। इनमें सबसे ज्यादा गर्मी से होने वाले उल्टी, दस्त, पीलिया, सिर दर्द, शरीर में कमजोरी के मरीज रहे। सिविल सर्जन ने बताया कि सुबह दस बजे से तीन बजे तक बिना वजह घर से बहार ने निकलें। अगर जरूरी काम है तो ही घर से बहार निकलें और घर से बहार निकलते समय यह ध्यान जरूर रखें कि शरीर की त्वचा पूरी ढकी हो। अगर त्वचा नहीं ढकी है तो उससे हाइपोथर्मिया होने का खतरा अधिक रहता है। हाइपोथर्मिया में मुंह सुख जाता है, चक्कर आने लगते है, उल्टी व बेहोश तक हो सकते हैं।
उन्होंने बताया कि हीट वेव से एक से पांच साल तक, बुजुर्गों को सबसे ज्यादा खतरा है। अस्पताल में हीट वेव को देखते हुए आपातकालीन विभाग में हाइपरपाइरेक्सिया रूम की स्थापना की गई है, ताकि लू लगने से पीड़ित व्यक्तियों को डी-हाईड्रेशन से बचाने के तुरंत उनका उपचार किया जा सकें। शांडिल्य ने कहा कि लोग गर्म हवाओं से बचने के लिए बार-बार पानी पीएं। शरीर को ढककर चले ताकि लू से बचे रहे। गर्मी से बचने के लिए लोगों को चाहिए कि वे अधिक से अधिक पानी का प्रयोग करें। चीनी व नींबू पानी का घोल, ओआरएस का घोल रखें व अन्य पेय पदार्थ का प्रयोग करें। अपने आप को निर्जलीकरण से बचाएं। नमक, चीनी के पानी का घोल का प्रयोग बच्चों व बुजुर्गों को अधिक से अधिक करवाएं, ताकि वे लू के प्रकोप से बचे रहें। उन्होंने कहा कि दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच जरूरी कार्य होने पर ही निकले घरों से बाहर।
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गर्भवती महिला तेज धूप में बाहर निकलने से बचें
जिला नागरिक अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनीता कुमारी ने बताया कि गर्भवती महिला को ज्यादा जरूरी हो तो ही घर से बहार निकलना चाहिए। वहीं गर्मी से गर्भवती महिलाओं में उल्टी दस्त की शिकायत आ रही है। अस्पताल में पांच या छह गर्भवती महिलाओं को दाखिल किया जा रहा है। गर्मी के मौसम में गर्भवती महिलाओं को समय समय पर पानी चाहिए ताकि उनमें डिहाइड्रेशन न हो। इसके साथ बताया कि गर्भवती महिलाओं में ये मत बना हुआ कि उनके टेस्ट खाली पेट होते हैं पर ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। कोई भी ऐसा टेस्ट नहीं हैं जो गर्भवती महिलाओं का खाली पेट होता है गर्मी के मौसम गर्भवती महिलाएं अगर टेस्ट कराने को अस्पताल में आ रही है तो घर से पेटभर के खाना खाकर आएं। खाली पेट रहने से गर्भवती महिला को चक्कर आने का खतरा रहता है। पीने के पानी की बोतल भी साथ रखें।
गर्मी से बच्चों की सेहत भी पस्त
नागरिक अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रीटा सिसोदिया ने बताया कि गर्मी बढ़ने से बच्चों पर खासा असर पड़ रहा है। इन दिनों आपोडी में उल्टी, दस्त, बुखार के से ग्रस्त ज्यादा बच्चे आ रहे हैं। जिनको ज्यादा दिक्कत है, उन्हें दाखिल किया जा रहा है। विशेषज्ञ ने माता पिता को सलाह दी कि बच्चों को गर्मी में ज्यादा देर तक बहार न जाने दें, समय समय पर बच्चों का पानी पिलाते रहें। नींबू पानी पिलाएं और अगर बहार जाएं तो बच्चों के पूरे शरीर को ढककर ले जाएं। साफ पानी पिलाएं व अस्पताल में बच्चों को उचित उपचार दिया जा रहा है।
सात दिन का अधिकतम व न्यूनतम तापमान
21 मई 45.5 / 31.5
22 मई 46.9/31.3
23 मई 44.3/31.3
24 मई 40.2/30.4
25 मई 40.2/30.4
26 मई 44/31.2
27 मई 47/29.9
गर्मी को देखते हुए अस्पताल में प्रबंध किए गए हैं। गर्मी से ज्यादा प्रभावित लोगों को दाखिल भी किया जा रहा है। वहीं अस्पताल के वार्डों में कूलर की व्यवस्था भी करा दी गई है। वहीं मरीजों को हीट वेव से बचने के उपाय भी बताएं जा रहे हैं। वही आपातकालीन विभाग में अलग से हाइपरपीरेक्सिया कक्ष की स्थापना गई है जिसमें गर्मी से प्रभावित मरीजाें का तुरंत उपचार कर उनमें पानी की कमी को पूरा किया जा रहा है।
-डॉ. रघुवीर शांडिल्य, सिविल सर्जन, जिला भिवानी
गर्मी सोमवार को सामान्य ओपीडी में मरीजों की संख्या 300 के करीब रही। इनमें ज्यादातर मरीज गर्मी से प्रभावित मिलें। जिनमें घबराहट, चक्कर आना, बुखार, सिर दर्द, ज्यादा देर तक धूप में रहने से शरीर में पानी की कमी के मरीज, उल्टी, दस्त के मरीजों की संख्या ज्यादा रही। गर्मी में धूल व प्रदूषण से सांस के मरीजों की भी संख्या बढ़ रही है। वहीं जिन मरीजों को ज्यादा दिक्कत है उन्हें दाखिल कर फ्लूड चढ़ाया जा रहा है। दाखिल मरीजों में उम्रदराज व्यक्ति ज्यादा है। धूप में ज्यादा देर तक रहने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इससे शरीर में कमजोरी आ जाती है।
-डॉ. यतिन गुप्ता, फिजिशियन, जिला नागरिक अस्पताल भिवानी।
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सोमवार को सुबह से ही तेज धूप के साथ दिन की शुरुआत हुई। सिविल सर्जन डॉ. रघुवीर शांडिल्य ने बताया कि इन दिनों हीट वेव से अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ी है। ओपीडी में सोमवार को मरीजों की संख्या करीब 1500 रही। इनमें सबसे ज्यादा गर्मी से होने वाले उल्टी, दस्त, पीलिया, सिर दर्द, शरीर में कमजोरी के मरीज रहे। सिविल सर्जन ने बताया कि सुबह दस बजे से तीन बजे तक बिना वजह घर से बहार ने निकलें। अगर जरूरी काम है तो ही घर से बहार निकलें और घर से बहार निकलते समय यह ध्यान जरूर रखें कि शरीर की त्वचा पूरी ढकी हो। अगर त्वचा नहीं ढकी है तो उससे हाइपोथर्मिया होने का खतरा अधिक रहता है। हाइपोथर्मिया में मुंह सुख जाता है, चक्कर आने लगते है, उल्टी व बेहोश तक हो सकते हैं।
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उन्होंने बताया कि हीट वेव से एक से पांच साल तक, बुजुर्गों को सबसे ज्यादा खतरा है। अस्पताल में हीट वेव को देखते हुए आपातकालीन विभाग में हाइपरपाइरेक्सिया रूम की स्थापना की गई है, ताकि लू लगने से पीड़ित व्यक्तियों को डी-हाईड्रेशन से बचाने के तुरंत उनका उपचार किया जा सकें। शांडिल्य ने कहा कि लोग गर्म हवाओं से बचने के लिए बार-बार पानी पीएं। शरीर को ढककर चले ताकि लू से बचे रहे। गर्मी से बचने के लिए लोगों को चाहिए कि वे अधिक से अधिक पानी का प्रयोग करें। चीनी व नींबू पानी का घोल, ओआरएस का घोल रखें व अन्य पेय पदार्थ का प्रयोग करें। अपने आप को निर्जलीकरण से बचाएं। नमक, चीनी के पानी का घोल का प्रयोग बच्चों व बुजुर्गों को अधिक से अधिक करवाएं, ताकि वे लू के प्रकोप से बचे रहें। उन्होंने कहा कि दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच जरूरी कार्य होने पर ही निकले घरों से बाहर।
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गर्भवती महिला तेज धूप में बाहर निकलने से बचें
जिला नागरिक अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनीता कुमारी ने बताया कि गर्भवती महिला को ज्यादा जरूरी हो तो ही घर से बहार निकलना चाहिए। वहीं गर्मी से गर्भवती महिलाओं में उल्टी दस्त की शिकायत आ रही है। अस्पताल में पांच या छह गर्भवती महिलाओं को दाखिल किया जा रहा है। गर्मी के मौसम में गर्भवती महिलाओं को समय समय पर पानी चाहिए ताकि उनमें डिहाइड्रेशन न हो। इसके साथ बताया कि गर्भवती महिलाओं में ये मत बना हुआ कि उनके टेस्ट खाली पेट होते हैं पर ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। कोई भी ऐसा टेस्ट नहीं हैं जो गर्भवती महिलाओं का खाली पेट होता है गर्मी के मौसम गर्भवती महिलाएं अगर टेस्ट कराने को अस्पताल में आ रही है तो घर से पेटभर के खाना खाकर आएं। खाली पेट रहने से गर्भवती महिला को चक्कर आने का खतरा रहता है। पीने के पानी की बोतल भी साथ रखें।
गर्मी से बच्चों की सेहत भी पस्त
नागरिक अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रीटा सिसोदिया ने बताया कि गर्मी बढ़ने से बच्चों पर खासा असर पड़ रहा है। इन दिनों आपोडी में उल्टी, दस्त, बुखार के से ग्रस्त ज्यादा बच्चे आ रहे हैं। जिनको ज्यादा दिक्कत है, उन्हें दाखिल किया जा रहा है। विशेषज्ञ ने माता पिता को सलाह दी कि बच्चों को गर्मी में ज्यादा देर तक बहार न जाने दें, समय समय पर बच्चों का पानी पिलाते रहें। नींबू पानी पिलाएं और अगर बहार जाएं तो बच्चों के पूरे शरीर को ढककर ले जाएं। साफ पानी पिलाएं व अस्पताल में बच्चों को उचित उपचार दिया जा रहा है।
सात दिन का अधिकतम व न्यूनतम तापमान
21 मई 45.5 / 31.5
22 मई 46.9/31.3
23 मई 44.3/31.3
24 मई 40.2/30.4
25 मई 40.2/30.4
26 मई 44/31.2
27 मई 47/29.9
गर्मी को देखते हुए अस्पताल में प्रबंध किए गए हैं। गर्मी से ज्यादा प्रभावित लोगों को दाखिल भी किया जा रहा है। वहीं अस्पताल के वार्डों में कूलर की व्यवस्था भी करा दी गई है। वहीं मरीजों को हीट वेव से बचने के उपाय भी बताएं जा रहे हैं। वही आपातकालीन विभाग में अलग से हाइपरपीरेक्सिया कक्ष की स्थापना गई है जिसमें गर्मी से प्रभावित मरीजाें का तुरंत उपचार कर उनमें पानी की कमी को पूरा किया जा रहा है।
-डॉ. रघुवीर शांडिल्य, सिविल सर्जन, जिला भिवानी
गर्मी सोमवार को सामान्य ओपीडी में मरीजों की संख्या 300 के करीब रही। इनमें ज्यादातर मरीज गर्मी से प्रभावित मिलें। जिनमें घबराहट, चक्कर आना, बुखार, सिर दर्द, ज्यादा देर तक धूप में रहने से शरीर में पानी की कमी के मरीज, उल्टी, दस्त के मरीजों की संख्या ज्यादा रही। गर्मी में धूल व प्रदूषण से सांस के मरीजों की भी संख्या बढ़ रही है। वहीं जिन मरीजों को ज्यादा दिक्कत है उन्हें दाखिल कर फ्लूड चढ़ाया जा रहा है। दाखिल मरीजों में उम्रदराज व्यक्ति ज्यादा है। धूप में ज्यादा देर तक रहने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इससे शरीर में कमजोरी आ जाती है।
-डॉ. यतिन गुप्ता, फिजिशियन, जिला नागरिक अस्पताल भिवानी।