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Bhiwani News: युवाओं में साइलेंट किलर बन रहा हाइपरटेंशन, बढ़ा रहा हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा

Sun, 17 May 2026 01:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Sun, 17 May 2026 01:58 AM IST
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Hypertension is becoming a silent killer among young people, increasing the risk of heart attack and stroke
मेडिकल कॉलेज के ओपीडी विभाग में मौजूद मरीज।  - फोटो : 1
भिवानी। बदलती जीवनशैली और भागदौड़ भरी जिंदगी युवाओं में साइलेंट किलर के रूप में हाइपरटेंशन का खतरा बढ़ा रही है। समय पर इलाज नहीं होने पर यह बीमारी आगे चलकर शुगर, कोलेस्ट्रॉल, हार्ट अटैक, हार्ट फेल और ब्रेन स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। ऐसे में समय रहते बीमारी की पहचान और उपचार शुरू करना बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में पहला कदम है।
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विश्व हाइपरटेंशन दिवस पर लोगों को इसके कारणों और बचाव के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विशेषज्ञों ने यह जानकारी साझा की। पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज के फिजिशियन डॉ. यतिन गुप्ता और डॉ. प्रिंसिका चौहान ने बताया कि बदलती जीवनशैली हाइपरटेंशन का मुख्य कारण बन रही है। आधुनिक समय में युवाओं की शारीरिक गतिविधियां कम हो गई हैं और भागदौड़ भरी जिंदगी उनके स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। समय पर भोजन नहीं करना, देर रात तक डिजिटल स्क्रीन का इस्तेमाल, नींद की कमी, दिनभर ऑफिस में बैठे रहना, जंक फूड का अधिक सेवन और अनावश्यक तनाव इसके प्रमुख कारण हैं। इन सभी कारणों से दैनिक दिनचर्या प्रभावित होती है, जो स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालती है।
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लोगों को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है विश्व हाइपरटेंशन दिवस
विश्व हाइपरटेंशन दिवस हर वर्ष 17 मई को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) के प्रति जागरूक करना और इसके कारण, लक्षण, बचाव व समय पर उपचार की जानकारी देना है। यह दिवस लोगों को नियमित बीपी जांच कराने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है ताकि हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य गंभीर बीमारियों के खतरे को कम किया जा सके।
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ये है कारण
विशेषज्ञों के अनुसार पहले के समय बुजुर्ग शारीरिक मेहनत करने के साथ देसी भोजन का सेवन करते थे लेकिन समय के साथ खानपान और जीवनशैली में बड़ा बदलाव आया है। आज युवाओं का अधिकतर समय ऑफिस की चहारदीवारी के भीतर बीत रहा है। व्यस्त दिनचर्या के कारण वे अपने स्वास्थ्य के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं। लगातार बढ़ता तनाव भी युवाओं पर हावी हो रहा है। यही कारण है कि कम उम्र में ही युवा हाइपरटेंशन का शिकार हो रहे हैं।

ऐसे करें बचाव
विशेषज्ञों ने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए सबसे पहले शरीर का निरोग रहना जरूरी है। यदि स्वास्थ्य अच्छा हो तो किसी भी कार्य को बेहतर ढंग से किया जा सकता है। इसके लिए जीवनशैली में सुधार बेहद आवश्यक है। अपनी दैनिक दिनचर्या निर्धारित करें और उसमें पौष्टिक भोजन, योग, व्यायाम और मेडिटेशन को शामिल करें। नियमित रूप से बीपी की जांच करवाते रहें। तनाव को खुद पर हावी न होने दें और बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी भी प्रकार के नुस्खों का इस्तेमाल न करें। उन्होंने कहा कि शरीर में होने वाले हल्के बदलावों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। किसी प्रकार की समस्या महसूस होने पर तुरंत नजदीकी चिकित्सक से परामर्श लेकर ही उपचार शुरू करें। शराब और सिगरेट का सेवन बंद करें तथा खाने में नमक की मात्रा कम रखें।


ये है ओपीडी में आने वाले मरीजों की स्थिति
शहर के पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज के ओपीडी विभाग में प्रतिदिन औसतन 1500 से 2000 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें लगभग 15 से 20 प्रतिशत युवा मरीज होते हैं। ओपीडी में युवा आंखों में दर्द, सिरदर्द, कमजोरी और तनाव जैसी समस्याएं लेकर पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के निर्देशानुसार ओपीडी में आने वाले सभी मरीजों की पहले निशुल्क बीपी और शुगर जांच की जाती है। जांच के दौरान प्रतिदिन करीब 35 से 40 युवा मरीज हाइपरटेंशन से पीड़ित पाए जा रहे हैं। इनमें 25 से 35 आयुवर्ग के मरीजों की संख्या अधिक है।

ये है बीपी का स्तर
एक सामान्य व्यक्ति में बीपी का स्तर 120/80 होना चाहिए। यदि यह लगातार 140/90 या उससे अधिक रहता है तो इसे हाइपरटेंशन माना जाता है।
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