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बुरे दौर में अच्छे लोगों ने शहर को संभाला
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लॉकडाउन के दौरान सुनसान पड़ा हांसी गेट चौक। फाइल फोटो। संवाद
- फोटो : Bhiwani
आदेश चौधरी
भिवानी। साल 2021 का आज आखिरी दिन है। इस साल ने सभी को बहुत ही खट्टे-मीठे अनुभव दिए हैं। सही मायने में कहें तो ज्यादा अनुभव खट्टे ही रहे। कोरोना काल में पूरी दुनिया थम सी गई थी। हर रोज बुरी खबरें सुनने को मिल रही थी, मगर उसे बुरे दौर में कुछ अच्छे लोगों ने शहर को संभाल लिया। प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं ने आपसी प्रेम और तालमेल से हालातों पर काबू पाया और अब शहर फिर से विकास के पथ पर है।
लॉकडाउन में बाजार, उद्योग, शिक्षण संस्थान, यातायात सब बंद हो गए थे। सड़कें सुनसान हो गई थीं और पार्क लोगों की चहलकदमी के लिए तरस रहे थे। अस्पतालों में मरीजों की भीड़ और दहशत का माहौल था। ऑक्सीजन के लिए भी अस्पतालों में मारामारी रही। प्रशासन हालातों का काबू के लिए पूरी ताकत झोंके हुए था, मगर हालात बद से बदतर होते चले गए। कोरोना से मौत का सिलसिला शुरू हुआ तो लोगों में दहशत बढ़ गई। एक-दूसरे के पास जाने से कतराने लगे। हालात इतने खराब थे कि बेघर लोगों को खाना नसीब नहीं हो रहा था। पलायन करने वाले प्रवासी जब जिले से गुजरते थे तो उनके पास भी खाने का सामान नहीं होता था। लोग भूखे प्यासे ही घर पहुंचने की जद्दोजहद में जुटे थे। उस समय में कुछ संस्थाएं आगे आईं और प्रशासन के साथ मिलकर लोगों का सहारा बनीं। जिला प्रशासन ने जहां लोगों के टीकाकरण और उपचार का काम संभाला। वहीं सामाजिक संस्थाओं ने बेसहारा लोगों तक भोजन और पानी की व्यवस्था कराई। कॉलोनियों को संक्रमणमुक्त किया गया। मास्क और सैनिटाइजर वितरित किए। साझा प्रयासों से जल्द ही हालात काबू में आ गए और शहर फिर से खड़ा होने लगा। दीपावली पर शहर में रौनक देखने लायक थी। बाजारों में पैर रखने की जगह नहीं थी और जिले में कई सौ करोड़ रुपये का कारोबार दिवाली और धनतेरस पर हुआ।
कोरोना से 654 लोगों की हुई मौत
कोरोना संक्रमण के जिले में कुल 22413 मामले सामने आए। इनमें से 21757 लोग ठीक हो चुके हैं। जिले के 654 लोग कोरोना से जंग हार गए। फिलहाल जिले में दो एक्टिव मरीज बचे हैं। उनको भी घर पर ही आइसोलेट किया गया है। स्वास्थ्य विभाग अब तक जिले में 540147 सैंपल ले चुका है। 81401 लोगों को सर्विलांस पर रखा जा चुका है। कोरोना से हालात बिगड़ने पर संक्रमण रोकने के लिए जिले में 36 कंटेनमेंट जोन बनाए गए थे।
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किसान आंदोलन का रहा व्यापक असर, कृषि मंत्री को गृह जिले में करना पड़ा विरोध का सामान
कोरोना पर काबू पाने के बाद जैसे ही हालात सामान्य हुए तो किसान आंदोलन ने जोर पकड़ लिया। पूरे प्रदेश में जब भी कभी किसानों पर कहीं भी बल प्रयोग किया जाता तो जगह-जगह जाम लगा दिए जाते थे। प्रदेश के कृषि मंत्री का हलका लोहारू होने के चलते अकसर वे भिवानी आते थे। भिवानी आने पर उन्हें भी किसानों के विरोध का सामना करना पड़ता था। कितलाना टोल को फ्री करा दिया गया था, वहीं जिले में 10 से ज्यादा जगह पर स्थायी धरने चल रहे थे। टीकरी बॉर्डर बंद होने के कारण यहां से सब्जियां और अन्य सामान को दिल्ली नहीं भेजा जा सका। किसानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
खाद की कमी भी झेली
इस साल किसानों को खाद की भारी कमी का सामना करना पड़ा। पहले डीएपी के लिए और अब यूरिया के लिए मारामारी चल रही है। कई बार तो पुलिस थानों में किसानों को टोकन प्रदान किए गए। खाद के लिए भी किसानों को कई बार सड़कों पर उतरना पड़ा। हर बार पुलिस को अपने पहले खात का वितरण किसानों को कराना पड़ा। हालांकि कृषि विभाग के अधिकारियों का हमेशा यही दावा रहा कि जिले में खाद की कोई कमी नहीं है।
पुलिस और स्वास्थ्यकर्मियों की बदौलत सुधरे हालात
कोरोना काल से निपटने में जिले की पुलिस फोर्स और स्वास्थ्यकर्मियों का अहम योगदान रहा। दोनों ने ही अपनी जान को जोखिम में रखकर लोगों का इलाज भी किया। कोरोना मरीजों का इलाज करते समय कई स्वास्थ्य कर्मी और ड्यूटी के दौरान कई पुलिसकर्मी संक्रमित भी हो गए थे। चांग में तैनात डॉ. नीतू सांघी की कोरोना से मौत भी हो गई थी। इसके बावजूद सभी ने डटकर हालातों का मुकाबला किया और जीत हासिल की।
खिलाड़ियों ने भरा जोश : तीन ओलंपिक तो एक ने पैरालंपिक में किया देश का प्रतिनिधित्व
जिले के तीन बॉक्सरों ने टोक्या ओलंपिक में तो एक महिला खिलाड़ी ने पैरालंपिक में पहुंचकर जिले का नाम रोशन किया। बुरे दौर से गुजर रहे जिले के लोगों में खिलाड़ियों ने जोश भरने का काम किया। भिवानी से बॉक्सर पूजा रानी बोहरा, बॉक्सर मनीष कौशिक, बॉक्सर विकास कृष्णन यादव ने ओलंपिक में तो अरुणा तंवर ने पैरालंपिक ताइक्वांडों में भाग लिया। हालांकि इस बार ओलंपिक में पदक जीतने के मामले में जिले की झोली खाली रही, मगर वहां जिले की भागीदारी बड़े स्तर पर रही।
कोविड से निपटे तो विकास ने पकड़ी रफ्तार
कोरोना पर काबू पाने के बाद जिले ने विकास की रफ्तार पकड़ी। अधिकारियों ने उन सभी योजनाओं को युद्ध स्तर पर शुरू किया जो कोरोना के कारण अटक गई थी। यह प्रशासनिक अधिकारियों की गंभीरता का ही नतीजा है कि बड़ी परियोजनाएं शुरू करने के साथ-साथ कॉलोनियों और शहर में सड़क निर्माण व पाइप लाइन डाले जाने जैसे छोटे मगर बहुत जरूरी कामों में भी निरंतरता बनाए रखी। (संवाद)
ये बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं जिले में
- तोशाम बाईपास पर आरओबी का निर्माण किया जा रहा है।
- निनाण बाईपास को शुरू कर दिया गया है।
- चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय का एक बड़ा हिस्सा बनकर तैयार हो चुका है, बाकी पर काम चल रहा है।
- मेडिकल कॉलेज का काम भी युद्ध स्तर पर चल रहा है।
- हांसी मार्ग को फोरलेन बनाने का काम भी जल्द शुरू होने वाला है।
कोविड नियमों का करें पालन
प्रशासन ने बेहतर से बेहतर करने का प्रयास किया। संस्थाएं भी आगे आईं। अब भी लोगों से अपील है कि हालात को सामान्य बनाए रखने के लिए कोविड नियमों का पालन करें।
- रिपुदमन सिंह, उपायुक्त, भिवानी।
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भिवानी। साल 2021 का आज आखिरी दिन है। इस साल ने सभी को बहुत ही खट्टे-मीठे अनुभव दिए हैं। सही मायने में कहें तो ज्यादा अनुभव खट्टे ही रहे। कोरोना काल में पूरी दुनिया थम सी गई थी। हर रोज बुरी खबरें सुनने को मिल रही थी, मगर उसे बुरे दौर में कुछ अच्छे लोगों ने शहर को संभाल लिया। प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं ने आपसी प्रेम और तालमेल से हालातों पर काबू पाया और अब शहर फिर से विकास के पथ पर है।
लॉकडाउन में बाजार, उद्योग, शिक्षण संस्थान, यातायात सब बंद हो गए थे। सड़कें सुनसान हो गई थीं और पार्क लोगों की चहलकदमी के लिए तरस रहे थे। अस्पतालों में मरीजों की भीड़ और दहशत का माहौल था। ऑक्सीजन के लिए भी अस्पतालों में मारामारी रही। प्रशासन हालातों का काबू के लिए पूरी ताकत झोंके हुए था, मगर हालात बद से बदतर होते चले गए। कोरोना से मौत का सिलसिला शुरू हुआ तो लोगों में दहशत बढ़ गई। एक-दूसरे के पास जाने से कतराने लगे। हालात इतने खराब थे कि बेघर लोगों को खाना नसीब नहीं हो रहा था। पलायन करने वाले प्रवासी जब जिले से गुजरते थे तो उनके पास भी खाने का सामान नहीं होता था। लोग भूखे प्यासे ही घर पहुंचने की जद्दोजहद में जुटे थे। उस समय में कुछ संस्थाएं आगे आईं और प्रशासन के साथ मिलकर लोगों का सहारा बनीं। जिला प्रशासन ने जहां लोगों के टीकाकरण और उपचार का काम संभाला। वहीं सामाजिक संस्थाओं ने बेसहारा लोगों तक भोजन और पानी की व्यवस्था कराई। कॉलोनियों को संक्रमणमुक्त किया गया। मास्क और सैनिटाइजर वितरित किए। साझा प्रयासों से जल्द ही हालात काबू में आ गए और शहर फिर से खड़ा होने लगा। दीपावली पर शहर में रौनक देखने लायक थी। बाजारों में पैर रखने की जगह नहीं थी और जिले में कई सौ करोड़ रुपये का कारोबार दिवाली और धनतेरस पर हुआ।
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कोरोना से 654 लोगों की हुई मौत
कोरोना संक्रमण के जिले में कुल 22413 मामले सामने आए। इनमें से 21757 लोग ठीक हो चुके हैं। जिले के 654 लोग कोरोना से जंग हार गए। फिलहाल जिले में दो एक्टिव मरीज बचे हैं। उनको भी घर पर ही आइसोलेट किया गया है। स्वास्थ्य विभाग अब तक जिले में 540147 सैंपल ले चुका है। 81401 लोगों को सर्विलांस पर रखा जा चुका है। कोरोना से हालात बिगड़ने पर संक्रमण रोकने के लिए जिले में 36 कंटेनमेंट जोन बनाए गए थे।
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किसान आंदोलन का रहा व्यापक असर, कृषि मंत्री को गृह जिले में करना पड़ा विरोध का सामान
कोरोना पर काबू पाने के बाद जैसे ही हालात सामान्य हुए तो किसान आंदोलन ने जोर पकड़ लिया। पूरे प्रदेश में जब भी कभी किसानों पर कहीं भी बल प्रयोग किया जाता तो जगह-जगह जाम लगा दिए जाते थे। प्रदेश के कृषि मंत्री का हलका लोहारू होने के चलते अकसर वे भिवानी आते थे। भिवानी आने पर उन्हें भी किसानों के विरोध का सामना करना पड़ता था। कितलाना टोल को फ्री करा दिया गया था, वहीं जिले में 10 से ज्यादा जगह पर स्थायी धरने चल रहे थे। टीकरी बॉर्डर बंद होने के कारण यहां से सब्जियां और अन्य सामान को दिल्ली नहीं भेजा जा सका। किसानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
खाद की कमी भी झेली
इस साल किसानों को खाद की भारी कमी का सामना करना पड़ा। पहले डीएपी के लिए और अब यूरिया के लिए मारामारी चल रही है। कई बार तो पुलिस थानों में किसानों को टोकन प्रदान किए गए। खाद के लिए भी किसानों को कई बार सड़कों पर उतरना पड़ा। हर बार पुलिस को अपने पहले खात का वितरण किसानों को कराना पड़ा। हालांकि कृषि विभाग के अधिकारियों का हमेशा यही दावा रहा कि जिले में खाद की कोई कमी नहीं है।
पुलिस और स्वास्थ्यकर्मियों की बदौलत सुधरे हालात
कोरोना काल से निपटने में जिले की पुलिस फोर्स और स्वास्थ्यकर्मियों का अहम योगदान रहा। दोनों ने ही अपनी जान को जोखिम में रखकर लोगों का इलाज भी किया। कोरोना मरीजों का इलाज करते समय कई स्वास्थ्य कर्मी और ड्यूटी के दौरान कई पुलिसकर्मी संक्रमित भी हो गए थे। चांग में तैनात डॉ. नीतू सांघी की कोरोना से मौत भी हो गई थी। इसके बावजूद सभी ने डटकर हालातों का मुकाबला किया और जीत हासिल की।
खिलाड़ियों ने भरा जोश : तीन ओलंपिक तो एक ने पैरालंपिक में किया देश का प्रतिनिधित्व
जिले के तीन बॉक्सरों ने टोक्या ओलंपिक में तो एक महिला खिलाड़ी ने पैरालंपिक में पहुंचकर जिले का नाम रोशन किया। बुरे दौर से गुजर रहे जिले के लोगों में खिलाड़ियों ने जोश भरने का काम किया। भिवानी से बॉक्सर पूजा रानी बोहरा, बॉक्सर मनीष कौशिक, बॉक्सर विकास कृष्णन यादव ने ओलंपिक में तो अरुणा तंवर ने पैरालंपिक ताइक्वांडों में भाग लिया। हालांकि इस बार ओलंपिक में पदक जीतने के मामले में जिले की झोली खाली रही, मगर वहां जिले की भागीदारी बड़े स्तर पर रही।
कोविड से निपटे तो विकास ने पकड़ी रफ्तार
कोरोना पर काबू पाने के बाद जिले ने विकास की रफ्तार पकड़ी। अधिकारियों ने उन सभी योजनाओं को युद्ध स्तर पर शुरू किया जो कोरोना के कारण अटक गई थी। यह प्रशासनिक अधिकारियों की गंभीरता का ही नतीजा है कि बड़ी परियोजनाएं शुरू करने के साथ-साथ कॉलोनियों और शहर में सड़क निर्माण व पाइप लाइन डाले जाने जैसे छोटे मगर बहुत जरूरी कामों में भी निरंतरता बनाए रखी। (संवाद)
ये बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं जिले में
- तोशाम बाईपास पर आरओबी का निर्माण किया जा रहा है।
- निनाण बाईपास को शुरू कर दिया गया है।
- चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय का एक बड़ा हिस्सा बनकर तैयार हो चुका है, बाकी पर काम चल रहा है।
- मेडिकल कॉलेज का काम भी युद्ध स्तर पर चल रहा है।
- हांसी मार्ग को फोरलेन बनाने का काम भी जल्द शुरू होने वाला है।
कोविड नियमों का करें पालन
प्रशासन ने बेहतर से बेहतर करने का प्रयास किया। संस्थाएं भी आगे आईं। अब भी लोगों से अपील है कि हालात को सामान्य बनाए रखने के लिए कोविड नियमों का पालन करें।
- रिपुदमन सिंह, उपायुक्त, भिवानी।

लॉकडाउन के दौरान अपने घर लौटते प्रवासी मजदूर। फाइल फोटो। संवाद - फोटो : Bhiwani