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Bhiwani News: शोषण की बात पत्र में लिख बालिकाएं लगा रहीं राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग से गुहार

Mon, 22 Jan 2024 02:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Mon, 22 Jan 2024 02:39 AM IST
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Girls are writing letters about exploitation and appealing to the State Commission for Protection of Child Rights
भिवानी। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा हर जुबां पर है। लिंगानुपात और बेटियों की शिक्षा दर में सुधार भी हो रहा है लेकिन इस सब सकारात्मक नतीजे के बीच बेटियों की व्यथा कथा परेशान करने वाली है। प्रदेश के कई जिलों से बेटियां राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को पत्र भेजकर शोषण और प्रताड़ना से बचाने की गुहार लगा रही हैं। हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के समक्ष पिछले दो माह में 700 से अधिक गुमनाम चिट्ठियां आई हैं, जिनमें बालिकाओं ने अपने साथ घटित हो रहे अपराध की जानकारी देते हुए न्याय की गुहार लगाई है। इन गुमनाम चिट्ठियों में सबसे अधिक सिरसा, कैथल, जींद जिले से भेजी गई हैं, जिन पर आयोग की ओर से संज्ञान भी लिया गया है।
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हर साल पॉक्सो एक्ट के करीब डेढ़ हजार से अधिक केस पुलिस की फाइलों में दर्ज हो रहे हैं जबकि वैसे बाल अपराध से जुड़े ऐसे केसों की संख्या भी काफी हैं जो कभी पुलिस थानों तक आते ही नहीं हैं। ये बच्चे अपने आसपास हो रहे अपराध की व्यथा यदा-कदा किसी कागज या फिर किसी पत्र में लिखकर लेटर बॉक्स तक में डालने की ही हिम्मत जुटा पाते हैं। इसी तरह की हिम्मत करने वाली बालिकाओं ने हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के समक्ष गुमनाम पत्र भेजे हैं, जिनमें अधिकतर बालिकाओं ने स्कूल में जाते समय छेड़छाड़, कक्षा में टीचर द्वारा की गई मारपीट, धमकाने और जबरन काम कराने की शिकायतें दर्ज कराई हैं।
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यौन शोषण की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई करता है आयोग
आयोग के सदस्य मांगेराम का कहना है कि कुछ मामले यौन शोषण के भी आयोग के समक्ष आते हैं, जिन पर आयोग तत्काल प्रभाव से संबंधित जिलों में प्रशासन, पुलिस और सीडब्ल्यूसी के अलावा बाल संरक्षण अधिकारी को अवगत करा इन पर कार्रवाई कराता है और इसकी रिपोर्ट भी तलब करता है। आयोग के समक्ष काफी पत्र बाल अपराध से जुड़े भी आ रहे हैं। इन पत्रों को लगातार मॉनिटरिंग भी की जा रही हैं, क्योंकि बच्चे अपने साथ हो रहे अपराध के प्रति पुलिस थानों में जाकर शिकायत दर्ज नहीं करा पाते, ऐसे में आयोग तक पत्र लिखने की हिम्मती बच्चियों के मामले में आयोग पूरी तरह से सख्त है। संवाद
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मानव तस्करी के चंगुल से आजाद हुई भिवानी में दो बेटियां
भिवानी में करीब दो माह पहले ही दो नाबालिग असम से लाई गई बेटियों को भी मानव तस्करी के चंगुल से भिवानी बाल कल्याण समिति ने आजाद कराया है। ये बच्चियां प्रेमजाल में फांसकर यहां लाकर शादी के लिए बेची गई थी। जिन पर अब असम पुलिस कार्रवाई कर रही है। बाल कल्याण समिति सदस्य सतेंद्र तंवर ने बताया कि हर माह करीब आठ से 10 पॉक्सो एक्ट के मामले भी सामने आ रहे हैं, जिन पर समिति कड़ा संज्ञान लेकर इन मामलों में तत्परता से कार्रवाई करा रही है। वहीं चाइल्ड लेबर से जुड़े करीब 50 बच्चे भी मुक्त कराए हैं।


राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सामने गुमनाम पत्र आ रहे हैं, जिनमें बालिकाओं की सुरक्षा की गुहार लगाई जा रही है। ऐसे मामलों में आयोग की तरफ से सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। इन पत्रों के संबंध में न केवल जांच-पड़ताल कराई जा रही हैं, बल्कि संबंधित पुलिस व प्रशासन से आयोग जवाब तलब भी कर रहा है कि अब तक क्या कार्रवाई हुई है। बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों के प्रति आयोग काम कर रहा है।
-मांगेराम, सदस्य हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग पंचकूला।
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