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Bhiwani News: प्रभावी कक्षा निरीक्षण के लिए शुरू हुआ पांच दिवसीय प्रशिक्षण
Mon, 04 Aug 2025 11:11 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Mon, 04 Aug 2025 11:11 PM IST
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बवानीखेड़ा। एससीईआरटी गुरुग्राम के निर्देश पर जिले में सोमवार से ‘इफेक्टिव क्लासरूम ऑब्जर्वेशन’ विषयक पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य एबीआरसी (अकादमिक ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर) और बीआरपी (ब्लॉक रिसोर्स पर्सन) को कक्षा मूल्यांकन और निरीक्षण की व्यवहारिक विधियों से अवगत कराना है। जिला स्तर पर यह प्रशिक्षण डाइट बिरही कला से वरिष्ठ प्रवक्ता नवरत्न और भिवानी डाइट से प्रवक्ता मोनिका की देखरेख में संचालित किया जा रहा है।
प्रशिक्षण के पहले दो दिन (सोमवार व मंगलवार) ऑनलाइन मोड में आयोजित किए जा रहे हैं जिनमें मास्टर ट्रेनर्स (एमटी) द्वारा प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शेष तीन दिन (बुधवार से शुक्रवार) ऑफलाइन प्रशिक्षण राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भिवानी और लोहारू भिवानी विद्यालय में सुबह 9:30 बजे से सायं 5:00 बजे तक होगा।
कक्षा में बच्चों के व्यवहार, सोच और भागीदारी पर रहेगा विशेष ध्यान
प्रशिक्षण में एमटी ने बताया कि निरीक्षण के दौरान यह आकलन किया जाएगा कि शिक्षक कक्षा में बच्चों के साथ किस प्रकार का व्यवहार कर रहा है, बच्चों की सीखने की प्रवृत्ति क्या है, वे गतिविधियों में किस हद तक भाग ले रहे हैं और प्रश्नों पर उनकी क्या प्रतिक्रिया है। इसके अलावा कक्षा के वातावरण, सीखने के टूल्स के प्रयोग और शिक्षक की मानसिकता को भी परखा जाएगा।
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लिंग भेद व दिव्यांगता के संदर्भ में भी होगी गहन पड़ताल
प्रशिक्षण के एक सत्र में प्रतिभागियों को यह बताया गया कि कक्षा में लड़के-लड़कियों को अलग बैठाना, उनके साथ भेदभाव करना या दिव्यांग छात्रों को अलग-थलग रखना गंभीर मुद्दे हैं, जिन्हें निरीक्षण के दौरान विशेष रूप से देखा जाएगा। एमटी ने प्रतिभागियों को प्रेरित किया कि वे निरीक्षण करते समय इन बातों पर सजग दृष्टि रखें।
भौतिक और रासायनिक परिवर्तन की अवधारणाएं भी समझाईं
प्रशिक्षण के तहत वीडियो की मदद से एबीआरसी और बीआरपी को भौतिक व रासायनिक परिवर्तनों के बीच अंतर समझाया गया। बताया गया कि भौतिक परिवर्तन में केवल अवस्था या आकार बदलता है, जबकि रासायनिक परिवर्तन में पदार्थ की संरचना बदल जाती है और नया पदार्थ बनता है। वरिष्ठ प्रवक्ता नवरत्न और प्रवक्ता मोनिका ने कहा कि यह प्रशिक्षण एबीआरसी और बीआरपी के लिए अत्यंत उपयोगी है। इससे वे विद्यालयों में जाकर निरीक्षण को अधिक प्रभावी ढंग से कर सकेंगे और शिक्षा के स्तर को सुधारने में अहम भूमिका निभा पाएंगे।
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प्रशिक्षण के पहले दो दिन (सोमवार व मंगलवार) ऑनलाइन मोड में आयोजित किए जा रहे हैं जिनमें मास्टर ट्रेनर्स (एमटी) द्वारा प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शेष तीन दिन (बुधवार से शुक्रवार) ऑफलाइन प्रशिक्षण राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भिवानी और लोहारू भिवानी विद्यालय में सुबह 9:30 बजे से सायं 5:00 बजे तक होगा।
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कक्षा में बच्चों के व्यवहार, सोच और भागीदारी पर रहेगा विशेष ध्यान
प्रशिक्षण में एमटी ने बताया कि निरीक्षण के दौरान यह आकलन किया जाएगा कि शिक्षक कक्षा में बच्चों के साथ किस प्रकार का व्यवहार कर रहा है, बच्चों की सीखने की प्रवृत्ति क्या है, वे गतिविधियों में किस हद तक भाग ले रहे हैं और प्रश्नों पर उनकी क्या प्रतिक्रिया है। इसके अलावा कक्षा के वातावरण, सीखने के टूल्स के प्रयोग और शिक्षक की मानसिकता को भी परखा जाएगा।
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लिंग भेद व दिव्यांगता के संदर्भ में भी होगी गहन पड़ताल
प्रशिक्षण के एक सत्र में प्रतिभागियों को यह बताया गया कि कक्षा में लड़के-लड़कियों को अलग बैठाना, उनके साथ भेदभाव करना या दिव्यांग छात्रों को अलग-थलग रखना गंभीर मुद्दे हैं, जिन्हें निरीक्षण के दौरान विशेष रूप से देखा जाएगा। एमटी ने प्रतिभागियों को प्रेरित किया कि वे निरीक्षण करते समय इन बातों पर सजग दृष्टि रखें।
भौतिक और रासायनिक परिवर्तन की अवधारणाएं भी समझाईं
प्रशिक्षण के तहत वीडियो की मदद से एबीआरसी और बीआरपी को भौतिक व रासायनिक परिवर्तनों के बीच अंतर समझाया गया। बताया गया कि भौतिक परिवर्तन में केवल अवस्था या आकार बदलता है, जबकि रासायनिक परिवर्तन में पदार्थ की संरचना बदल जाती है और नया पदार्थ बनता है। वरिष्ठ प्रवक्ता नवरत्न और प्रवक्ता मोनिका ने कहा कि यह प्रशिक्षण एबीआरसी और बीआरपी के लिए अत्यंत उपयोगी है। इससे वे विद्यालयों में जाकर निरीक्षण को अधिक प्रभावी ढंग से कर सकेंगे और शिक्षा के स्तर को सुधारने में अहम भूमिका निभा पाएंगे।