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नप भूमि रिकॉर्ड में घोटाले की आशंका, गायब भूमि रिकॉर्ड रजिस्टर अचानक प्रकट हुआ

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 14 Jan 2022 11:48 PM IST
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Fear of scam in NP land records, missing land record register suddenly appeared
भिवानी। नगर परिषद भूमि रिकॉर्ड से जुड़ा गायब रजिस्टर अब अचानक प्रकट हो गया है। इसके बाद नप भूमि रिकार्ड में घोटाले की आशंका जताई जा रही है। हालांकि बंद लिफाफे में नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी ने रिकार्ड सहित अपनी रिपोर्ट शुक्रवार को डीसी को भेज दी है।
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जिस नप भूमि का रिकॉर्ड रजिस्टर पहले गायब बताया जा रहा था उस क्षेत्र में नगर परिषद ने 1985 और 1998 में कॉलोनी काटी थी और कई जगह मार्केट भी बनाई थी। गड़बड़ी की आशंका को लेकर खुद नगर परिषद चेयरमैन ने डीसी को पत्र लिखकर नप भूमि का रिकॉर्ड रजिस्टर गायब होने और जांच कराए जाने की बात कही थी। इसके बाद उपायुक्त ने इस प्रकरण को गंभीरता से लिया और तुरंत नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी को पत्र लिखकर भूमि रिकार्ड रजिस्टर गायब होने की जांच करने और दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई की भी बात कही गई थी। डीसी ने शुक्रवार सुबह 11 बजे तक इस प्रकरण की रिपोर्ट भी तलब की थी। डीसी के समक्ष मामला पहुंचने के बाद नगर परिषद में भी हड़बड़ी मच गई। इसके बाद गायब रजिस्टर भी अचानक ही प्रकट हो गया और अधिकारियों ने कोई रिकॉर्ड गायब नहीं होने की पुष्टि भी कर दी।
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भिवानी नगर परिषद की शहर में कई जगहों पर करोड़ों रुपयों की कीमती प्रॉपर्टी और भूमि है। इसके रिकॉर्ड के रखरखाव की जिम्मेदारी नगर परिषद भवन शाखा के पास है। भवन शाखा में अचानक भूमि रिकॉर्ड से जुड़ा एक रजिस्टर गायब हो गया। जिसकी जानकारी खुद नप चेयरमैन ने पत्र के जरिए डीसी को दी। चेयरमैन ने कार्यकारी अधिकारी से भी इस रजिस्टर के संबंध में रिपोर्ट पत्र के जरिए मांगी थी, मगर अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया। जिसके बाद मामला डीसी के समक्ष पहुंच गया। डीसी ने सरकारी कार्यालय से अचानक भूमि रिकॉर्ड के दस्तावेज गायब होने पर कड़ा संज्ञान लिया। इसके बाद नप अधिकारियों के भी हाथ पांव फूल गए। डीसी ने नप अधिकारियों को जांच कर रिकॉर्ड से जुड़ी रिपोर्ट शुक्रवार सुबह 11 बजे तक अपने कार्यालय में तलब की। नप अधिकारियों ने शुक्रवार को ही तय समय में बंद लिफाफे में अपनी जांच रिपोर्ट के साथ गायब रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेज भी डीसी को भेज दिए।
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रजिस्टर के रिकार्ड में छीपा है नप घोटाले का राज
नगर परिषद अधिकारियों ने जिस रजिस्टर को पहले गायब दिखाया था, उसमें शहर के एमसी कॉलोनी मेला ग्राउंड, दादरी-लोहारू रोड, एमसी कॉलोनी रोहतक रोड, आदर्श नगर, ऑटो मार्केट के आसपास का क्षेत्र शामिल है। इस इलाके में काफी संपत्ति नगर परिषद की हैं, जिसमें नगर परिषद ने कुछ संपत्ति की खुली बोली में नीलामी तक की हुई है। नगर परिषद ने 1984-85 में ऑटो मार्केट की दुकानों की खुली निलामी की थी। इसी तरह 1998 में एमसी कॉलोनी भी नगर परिषद ने काटी थी। इनमें नगर परिषद ने खुली बोली में प्लाट व दुकानों को नीलाम किया था। कुछ लोगों ने नीलामी के दौरान बोली छुड़वाई थी और उसकी कुछ किस्तों का भुगतान भी किया था, मगर बाद में वे किसी वजह से इसे आगे नहीं बढ़ा पाए या फिर उनकी मौत हो गई। ऐसे लोगों के परिजनों ने भी कोई सुध नहीं ली। जिसके बाद नगर परिषद के उसी अधूरे रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की आशंका जताते हुए अन्य लोगों के नाम वो संपत्ति अधिकारियों से मिलीभगत के बाद कर दी गई। अगर इस रिकॉर्ड की जानकार से एक्सपर्ट अधिकारियों की निगरानी में विस्तृत जांच कराई जाए तो बड़ा भूमि घोटाला उजागर हो सकता है। इसी लिए इस भूमि के रिकॉर्ड का रजिस्टर भी अचानक ही गायब हो गया था और बाद में यह प्रकट भी हो गया।
राजस्व रिकार्ड में कुछ नप के रिकॉर्ड में गायब जानकारी
शहर की भूमि का रिकॉर्ड राजस्व विभाग के पास मौजूद है। लेकिन नगर परिषद के समक्ष मौजूद रिकार्ड में नगर परिषद की भूमि पर भी कुछ निजी लोग काबिज हैं, जिनके पास फर्जी रजिस्ट्रियां भी हैं। ऐसे में राजस्व विभाग और नगर परिषद के भूमि का रिकॉर्ड भी मिलान नहीं हो रहा है। अगर राजस्व विभाग के रिकार्ड में दर्ज नगर परिषद की संपत्ति को नगर परिषद के रिकॉर्ड से मिलान किया जाए तो शहर में कई ऐसे करोड़ों की भूमि का घोटाला उजागर होगा, जहां आज बड़े बड़े शोरूम और दुकानें बन चुकी हैं। नप अधिकारियों की मिलीभगत से शहर के अंदर सार्वजनिक शौचालयों तक की जगह पर दुकानें बना दी गई हैं।
भवन शाखा के सात कर्मचारियों पर भी घुम रही शक की सूई
भूमि रिकॉर्ड रजिस्टर प्रकरण में डीसी द्वारा जांच की बात से ही नप भवन शाखा के करीब छह से सात कर्मचारियों की भूमिका पर शक की सूई घूम रही है। इन कर्मचारियों पर रिकॉर्ड से छेड़छाड़ किए जाने का शक गहरा रहा है। इसी को लेकर डीसी ने भी स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अगर रिकॉर्ड से कोई भी छेड़छाड़ मिलती है तो ऐसे कर्मचारियों की एफआईआर दर्ज कराई जाए। मगर अधिकारी ऐसे कर्मचारियों के बचाव में उतरे हैं।

उपायुक्त को रिपोर्ट भेज दी गई है। नगर परिषद में भूमि से जुड़ा कोई भी रजिस्टर गायब नहीं है। सभी रिकॉर्ड नप के समक्ष सुरक्षित है। उपायुक्त को भूमि से जुड़े रिकॉर्ड के साथ रिपोर्ट भेजी है। किसी तरह की कोई गड़बड़ी अभी तक सामने नहीं आई है। - मनेंद्र श्योकंद, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद भिवानी
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