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Bhiwani News: पिता बोले- बेटी की चीख सुनकर लगा कोई जानवर घुस गया है...अंदर देखा तो होश उड़ गए, बेटी बस के फर्श में फंसी थी

Fri, 28 Aug 2026 01:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Fri, 28 Aug 2026 01:02 AM IST
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Father said - Hearing my daughter's scream, I thought some animal had entered... When I looked inside, I was shocked, my daughter was stuck in the bus floor
निजी स्कूल की बस का फर्श जहां से बच्ची गिरी। 
तोशाम। सुबह करीब आठ बजे मैं अपनी दोनों बच्चियों को घर की गली के कॉर्नर पर बनी दुकान के आगे बस में बैठाकर लौट ही रहा था कि अचानक चीखने की आवाज सुनी। मैंने मुड़कर देखा तो लगा बस में कोई जानवर घुस गया है। तभी धीमी गति से चल रही बस एकाएक रुकती है। मैं भी दौड़कर बस के पास पहुंचा। दुकान से तकरीबन 40-50 मीटर की दूरी पर बस थी। मैं बस के अंदर घुसा। बच्चे व एक-दो शिक्षक डरे हुए से खड़े थे। पीछे की सीट पर बैठी बड़ी बच्ची पाविका बहुत डरी और चिल्ला रही थी। मैं उसकी ओर बढ़ा...आगे का मंजर देखा तो मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई...। निजी स्कूल बस के टूटे फर्श से गिरी मासूम बच्ची के पिता सुमित मेहता यह बताते हुए भगवान का शुक्रिया अदा कर रहे थे कि उनकी बेटी की जान बच गई। साथ ही सोए हुए सिस्टम को कोस रहे थे।
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सुमित ने बताया कि उनकी दो बेटियां निजी स्कूल की नर्सरी व चौथी कक्षा में पढ़ती हैं। आठ साल की पाविका व छोटी बेटी निशिका को परिचालक साइड में पिछले टायरों के ऊपर एक ही सीट पर बैठाया था। निशिका खिड़की की साइड की तरफ अपनी सीट पर न बैठकर खड़ी हो गई थी और अपना बैग आगे की सीट पर रख दिया। जिस जगह वह खड़ी थी वह एकाएक नीचे धंस गई। उसके पैर-हाथ उसमें से होते हुए नीच चले गए। पैरे दोनों टायरों के बीच की जगह में फंस गए। गर्दन ऊपर लोहे के फर्श के टूटे पतरे में फंस गई। मैंने बड़ी सावधानी से पतरे को नीचे किया और थोड़ी जगह मिलते ही उसमें से बेटी को बाहर निकाल लिया। उसकी गर्दन व पैरों पर खरोंच आ गई थी। वह रो रही थी।
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मौके पर जुटी भीड़, किया हंगामा

सुमित और उनके बड़े भाई अमित मेहता ने चालक को खरी-खोटी सुनाई। डायल 112 को फोन कर बुलाया गया। इसके साथ ही स्कूल प्रबंधन को सूचना दी। बस में सवार सभी बच्चे नीचे उतर गए। भीड़ जुट गई। कई बच्चों के अभिभावक भी पहुंच गए और हंगामा करने लगे। इस बीच चालक भाग गया। रोड पर जाम लग गया। पुलिस ने लोगों को हटाकर वाहनों का आवागमन सुचारू किया। बस को इंपाउंड कर लिया गया।
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एक घंटे बाद स्कूल से आए कर्मचारी मांगते रहे माफी

अतिम मेहता ने बताया कि करीब एक घंटे बाद स्कूल से कुछ कर्मचारी मौके पर पहुंचे। आते ही लोगों ने उन्हें घेर लिया और खरी-खोटी सुनाई। बच्चों की जान जोखिम में डालकर खटारा बसें चलाने पर सवाल पूछा तो कोई जवाब न दे सके और माफी मांगने लगे।

बस का बीमा नहीं, 2014 में एक्सपायरी डेट निकली

अमित मेहता ने बताया कि आरटीओ विभाग से पता किया तो सामने आया कि इस बस का बीमा नहीं है। नवीनीकरण की अंतिम तिथि 2014 थी। यह बस सड़कों पर चलने लायक भी नहीं है। अमित ने आरोप लगाया कि सारा सिस्टम सो रहा है। आरटीओ, स्कूल और पुलिस के गठजोड़ के चलते आम आदमी के जीवन की कोई कीमत नहीं है। पुलिस यूं तो हर किसी का चालान कर देती है लेकिन ऐसे वाहन शहर में धड़ल्ले से चल रहे हैं। इन पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। भगवान का शुक्र है कि बच्ची बच गई। लोहे के पतरे से उसकी गर्दन भी कट सकती थी। पुलिस को लिखित में शिकायत दे दी है। उधर, एसएचओ विशेष कुमार ने कहा कि शिकायत मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अमित ने सवाल उठाया कि साढ़े तीन साल की बच्ची के वजन से फर्श टूटकर धंस गया। इससे समझ सकते हैं कि बस की फिटनेस कैसी है। ऐसी ही हालत चालक साइड के पीछे के पहियों के ऊपर के फर्श की थी।


बसें बाहर से चमचमा रही, अंदर से खोखली

प्रत्यक्षदर्शी रवि बंसल ने बताया कि निजी स्कूल संचालक बच्चों से परिवहन फीस के नाम पर मोटी राशि लेते हैं लेकिन बसों की हालत पर ध्यान नहीं देते। बाहर से रंग-रोगन करवाकर यूं दिखाते हैं जैसे बस नई है लेकिन अंदर सीटों और फर्श की स्थिति खटारा बस जैसी होती है। अमित ने कहा कि बस की यह हालत एक ही दिन में ऐसी नहीं हुई है। चालक को पता था तो फिर ऐसी बस को क्यों चलाया जा रहा था। चालक ने स्कूल प्रबंधन को बताया था तो फिर रूट से क्यों नहीं हटाया। इस संबंध में स्कूल के एमडी प्रदीप से बात करने की कोशिश की गई तो उनके भाई संजय ने बताया कि प्रदीप की अभी तबीयत खराब है, वे बात करने की स्थिति में नहीं है।
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