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किसानों ने घेरा एफसीआई कार्यालय तो पुलिस ने बंद किया देवसर चुंगी से अनाजमंडी तक मार्ग, लगा जाम
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लोहारू रेलवे ओवरब्रिज पर जाम में फंसे वाहन। संवाद
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने एफसीआई कार्यालय घेरने का प्रयास किया तो शहर की ट्रैफिक व्यवस्था ही बिगड़ गई। व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस ने देवसर चुंगी से अनाजमंडी तक के मार्ग को बंद कर दिया। जिस कारण सभी वाहनों को अनाजमंडी ओवरब्रिज से गुजारा गया। जहां लंबा जाम लग गया। सैकड़ों वाहन जाम में फंसे रहे। रोडवेज बसें भी जाम में फंसी रही। व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस को शहर के कुछ अन्य मार्गों से भी वाहनों के रूट डायवर्ट करने पड़े। जिस कारण दोपहर बाद तक पूरे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था बेपटरी नजर आई।
पूर्व नियोजित कार्यक्रम के तहत किसान सुबह करीब 10 बजे एफसीआई कार्यालय के नजदीक अनाजमंडी पहुंचे। जहां किसानों को देख एफसीआई कर्मचारियों ने मुख्य गेट को बंद कर दिया। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि वे बाहर धरना देंगे तो रोड जाम होगा। सूचना पर डीएसपी वीरेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे। किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने देवसर चुंगी के पास ही बीच सड़क गाड़ी खड़ी कर रास्ता बंद कर दिया। मार्ग को दूसरी ओर मंडी के गेट के पास से बंद किया गया। सभी वाहनों को अनाजमंडी ओवरब्रिज से गुजारा गया। जिस कारण यहां लंबा जाम लगा। रोडवेज बसें भी जाम में फंसी रही। यहां के जाम ने पूरे सरकुलर रोड की ट्रैफिक व्यवस्था बिगाड़ दी। ट्रैफिक पुलिस को मजबूरन रोहतक-दिल्ली मार्ग से आने वाले वाहनों को मिनी बाईपास से गुजारा।
वर्जन:::
सोमवार को वाहनों की भीड़ ज्यादा रहती है। इसके अलावा किसानों के प्रदर्शन के कारण देवसर चुंगी पर मार्ग बंद करना पड़ा। इस कारण व्यवस्था बिगड़ी। हमारे कर्मचारी नियमित रूप से व्यवस्था बनाने में जुटे रहे। वाहन चालकों को थोड़ी परेशान हुई है मगर यह सब भीड़ ज्यादा होने और मार्ग बंद होने के कारण हुई।
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- इंस्पेक्टर विक्रांत, इंचार्ज ट्रैफिक पुलिस थाना
किसानों की मांग, सरकार एफसीआई को दे पूरा बजट
संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर सोमवार को किसानों ने एफसीआई कार्यालय का घेराव किया। सुबह किसान घेराव के लिए पहुंचे तो कर्मचारियों ने कार्यालय परिसर में घुसने से रोका और मुख्य गेट बंद कर दिया। जिस कारण सभी किसान और विभिन्न संगठनों के सदस्य कार्यालय के बाहर सड़क पर आए तो हालात बिगड़े। बाद में पुलिस अधिकारियों ने एफसीआई कार्यालय अधिकारियों से बातचीत कर कार्यालय परिसर में ही धरने की व्यवस्था की। सुबह से दोपहर बाद तक किसान धरना देकर रोष जताते रहे। किसानों ने एक मांग पत्र मैनेजर सुमित कौशल को सौंपा।
धरनारत किसानों ने सबसे पहले छतीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों के हमले में शहीद 23 जवानों को 2 मिनट का मौन रख श्रद्धांजलि दी। धरने की अध्यक्षता नरसिंह डीपीई और मा. शेर सिंह ने संयुक्त रूप से की। किसानों ने केंद्रीय मंत्री को प्रेषित ज्ञापन में कहा कि एफसीआई पर बड़ा संकट है और सरकार की मंशा इसको बंद कर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने की है। हम आगाह करते हुए मांग करते है कि एफसीआई को बड़ा बजट जारी किया जाए। गेहूं पर खरीद के लिए जमाबंदी जमा कराने का फैसला तुरंत वापस हो और फसल का भुगतान काश्तकार को करना चाहिए। किसान नेताओं ने कहा कि लाखों करोड़ों लोगों के लिए भोजन का स्त्रोत एफसीआई के माध्यम से पीडीएस सिस्टम है। इसलिए सरकार द्वारा भंडारण जारी रखना चाहिए। एफसीआई के कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने और रिक्त पदों को जल्द भरने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि हमारी मांगे नहीं मानी गई तो आंदोलन तेज किया जाएगा। मंच संचालन कामरेड ओमप्रकाश ने किया। धरने में फौगाट खाप के प्रधान बलवंत नंबरदार, बिजेंद्र बेरला, गंगाराम श्योराण, बाबा सदानंद सरस्वती, राजू मान, सुरेश गोयल, धर्मेन्द्र छपार, कमलेश भैरवी, मुकेश पहाड़ी, इंदु परमार, सत्यवान बलियाली, महिपाल आर्य, केके शर्मा, सूबे सिंह सरपंच, शमशेर फौगाट, प्रोफेसर राजेन्द्र डोहकी, रणधीर घिकाड़ा, जिले सिंह, दयानंद पूनिया, ठाकुर अमर सिंह, मा. रघुबीर श्योराण, सुनील एडवोकेट, परमजीत मड्डू, रिसाल कौर, रणधीर कुंगड़, अनिल शेषमा, सत्यवान पंघाल, ओमप्रकाश सैनी, महेंद्र मित्ताथल, पप्पू नंबरदार ने अपने विचार रखे।
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पूर्व नियोजित कार्यक्रम के तहत किसान सुबह करीब 10 बजे एफसीआई कार्यालय के नजदीक अनाजमंडी पहुंचे। जहां किसानों को देख एफसीआई कर्मचारियों ने मुख्य गेट को बंद कर दिया। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि वे बाहर धरना देंगे तो रोड जाम होगा। सूचना पर डीएसपी वीरेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे। किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने देवसर चुंगी के पास ही बीच सड़क गाड़ी खड़ी कर रास्ता बंद कर दिया। मार्ग को दूसरी ओर मंडी के गेट के पास से बंद किया गया। सभी वाहनों को अनाजमंडी ओवरब्रिज से गुजारा गया। जिस कारण यहां लंबा जाम लगा। रोडवेज बसें भी जाम में फंसी रही। यहां के जाम ने पूरे सरकुलर रोड की ट्रैफिक व्यवस्था बिगाड़ दी। ट्रैफिक पुलिस को मजबूरन रोहतक-दिल्ली मार्ग से आने वाले वाहनों को मिनी बाईपास से गुजारा।
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सोमवार को वाहनों की भीड़ ज्यादा रहती है। इसके अलावा किसानों के प्रदर्शन के कारण देवसर चुंगी पर मार्ग बंद करना पड़ा। इस कारण व्यवस्था बिगड़ी। हमारे कर्मचारी नियमित रूप से व्यवस्था बनाने में जुटे रहे। वाहन चालकों को थोड़ी परेशान हुई है मगर यह सब भीड़ ज्यादा होने और मार्ग बंद होने के कारण हुई।
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- इंस्पेक्टर विक्रांत, इंचार्ज ट्रैफिक पुलिस थाना
किसानों की मांग, सरकार एफसीआई को दे पूरा बजट
संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर सोमवार को किसानों ने एफसीआई कार्यालय का घेराव किया। सुबह किसान घेराव के लिए पहुंचे तो कर्मचारियों ने कार्यालय परिसर में घुसने से रोका और मुख्य गेट बंद कर दिया। जिस कारण सभी किसान और विभिन्न संगठनों के सदस्य कार्यालय के बाहर सड़क पर आए तो हालात बिगड़े। बाद में पुलिस अधिकारियों ने एफसीआई कार्यालय अधिकारियों से बातचीत कर कार्यालय परिसर में ही धरने की व्यवस्था की। सुबह से दोपहर बाद तक किसान धरना देकर रोष जताते रहे। किसानों ने एक मांग पत्र मैनेजर सुमित कौशल को सौंपा।
धरनारत किसानों ने सबसे पहले छतीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों के हमले में शहीद 23 जवानों को 2 मिनट का मौन रख श्रद्धांजलि दी। धरने की अध्यक्षता नरसिंह डीपीई और मा. शेर सिंह ने संयुक्त रूप से की। किसानों ने केंद्रीय मंत्री को प्रेषित ज्ञापन में कहा कि एफसीआई पर बड़ा संकट है और सरकार की मंशा इसको बंद कर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने की है। हम आगाह करते हुए मांग करते है कि एफसीआई को बड़ा बजट जारी किया जाए। गेहूं पर खरीद के लिए जमाबंदी जमा कराने का फैसला तुरंत वापस हो और फसल का भुगतान काश्तकार को करना चाहिए। किसान नेताओं ने कहा कि लाखों करोड़ों लोगों के लिए भोजन का स्त्रोत एफसीआई के माध्यम से पीडीएस सिस्टम है। इसलिए सरकार द्वारा भंडारण जारी रखना चाहिए। एफसीआई के कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने और रिक्त पदों को जल्द भरने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि हमारी मांगे नहीं मानी गई तो आंदोलन तेज किया जाएगा। मंच संचालन कामरेड ओमप्रकाश ने किया। धरने में फौगाट खाप के प्रधान बलवंत नंबरदार, बिजेंद्र बेरला, गंगाराम श्योराण, बाबा सदानंद सरस्वती, राजू मान, सुरेश गोयल, धर्मेन्द्र छपार, कमलेश भैरवी, मुकेश पहाड़ी, इंदु परमार, सत्यवान बलियाली, महिपाल आर्य, केके शर्मा, सूबे सिंह सरपंच, शमशेर फौगाट, प्रोफेसर राजेन्द्र डोहकी, रणधीर घिकाड़ा, जिले सिंह, दयानंद पूनिया, ठाकुर अमर सिंह, मा. रघुबीर श्योराण, सुनील एडवोकेट, परमजीत मड्डू, रिसाल कौर, रणधीर कुंगड़, अनिल शेषमा, सत्यवान पंघाल, ओमप्रकाश सैनी, महेंद्र मित्ताथल, पप्पू नंबरदार ने अपने विचार रखे।

एफसीआई कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते किसान। संवाद- फोटो : Bhiwani