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एग्रीकल्चर: लोगों के तानों ने किसान में भरा जोश, खुद शुरू की चने की जैविक खेती, कमा रहा लाखों रुपये
Mon, 04 Apr 2022 01:24 AM IST
भूपेंद्र सिंह
नवनीत शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)
नवनीत शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Mon, 04 Apr 2022 01:24 AM IST
सार
भिवानी के किसान ने इलेक्ट्रॉनिक की दुकान बंद कर जैविक खेती शुरू की। कृषि मंत्री भी उनके जैविक चने की तारीफ कर चुके हैं। सांसद भी अमरजीत के खेत में पहुंचे। जैविक चने के एक पौधे पर लगी 1500 से अधिक फलियां है जोकि सामान्य से 10 से अधिक 15 गुणा अधिक है।
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अपने खेत में उगाए जैविक चने का पौधा दिखाते किसान अमरजीत सिंह।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
लोगों के तानों को भी सकारात्मक रूप में लेना चाहिए। ऐसी ही कहानी है हरियाणा के भिवानी जिले के गांव ईशरवाल निवासी एक किसान की। लोगों के तानों ने उसमें जोश भरा। उसने चने की जैविक खेती शुरू की। उसने चने की ऐसी किस्म इजाद की है, जिससे एक पौधे पर 1500 से अधिक टाट (फलियां) लगती हैं।
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लाखों रुपये की इलेक्ट्रॉनिक की दुकान बंद करके खेती में लगे अमरजीत की अब औसत आमदनी एक लाख रुपये प्रतिमाह से अधिक है। उनकी जैविक खेती को देखने के लिए किसान से लेकर कृषि अधिकारी आते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता से लेकर सांसद तक देख उसकी खेती देख चुके है। सूबे के कृषि कल्याण मंत्री जयप्रकाश दलाल भी उनके खेत में बने जैविक चने के कायल हैं।
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उनके खेत में लगे चने के एक पौधे पर 1500 से अधिक टाट (फलियां) हैं, जोकि सामान्य पौधे की तुलना में 10 से 15 गुणा अधिक है। पिछले दिनों उन्होंने कृषि मंत्री जेपी दलाल को अपने खेत में लगी चने की टाट भेंट की थीं। वहीं सांसद धर्मबीर सिंह तो खुद ही चलकर उनके खेत में पहुंचे और खेती की सराहना की।
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जिले के गांव ईशरवाल निवासी अमरजीत ने अपने खेत में एक एकड़ में जैविक चना और सरसों की खेती की हुई है। इसके लिए उन्होंने तीन किलोग्राम चना और 100 ग्राम सरसों की जुताई की थी। अब इस एक एकड़ भूमि से उन्हें 12.35 क्विंटल सरसों की पैदावार हुई है। वहीं चने के एक पौधे पर 1500 से अधिक फलियां लगी हैं। इनकी कटाई की जा रही है, जिसमें 10 से 12 क्विंटल पैदावार होने का अनुमान है।
अमरजीत ने बताया कि सामान्य सरसों के लिए एक एकड़ में एक किलो बीज की आवश्यकता होती है, जिसकी बाजार में कीमत 700 से 800 रुपये तक है। उन्होंने घर पर ही तैयार की हुई 100 ग्राम सरसों की बुआई की थी। अब पैदावार के बाद सरसों की कीमत 200 रुपये प्रति किलो के लिए एडवांस ऑर्डर आए हुए हैं।
जैविक चने को चखते प्रदेश के कृषि मंत्री जेपी दलाल, साथ में है किसान अमरजीत सिंह व अन्य।
वहीं चने के लिए 100 रुपये प्रति किलो के ऑर्डर आए हुए हैं। अमरजीत ने बताया कि उन्हें इस एक एकड़ से करीब एक लाख रुपये चना और करीब ढाई लाख रुपये सरसों की फसल की आमदनी होगी। अमरजीत चने और सरसों के अलावा अन्य फसलों की भी जैविक खेती कर रहे हैं। इन सबसे उनको एक माह में करीब एक लाख रुपये की आमदनी होती है।
जैविक खाद और ड्रिप सिस्टम से कर रहे खेती
किसान अमरजीत ने बताया कि वे अपने खेत में जैविक खेत का प्रयोग कर रहे है, जिनमें जीवाणु खाद गोकृपा अमृत मुख्य है। इसके अलावा उन्होंने खेत में ही गोबर गैस प्लांट बनाया हुआ है, जिससे निकले वाली गैस को अपनी रसोई में प्रयोग कर रहे हैं। इससे उनके घरेलू गैस सिलिंडर के खर्च की बचत आ रही है। साथ ही गोबर गैस प्लांट से निकलने वाले तरल गोबर का फसल में प्रयोग कर रहे हैं। इससे फसल की पैदावार में वृद्धि हो रही है। वे अपने खेत में किसी भी कीटनाशक उर्वरक या स्प्रे का प्रयोग नहीं करते। साथ ही एक लाख 10 हजार रुपये की लागत से सोलर सिस्टम लगाया हुआ है, जिसकी वजह से उन पर बिजली बिल के अतिरिक्त खर्च की बचत हो रही है। साथ ही खेत में सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम लगाया हुआ है, जिसके माध्यम से 90 फीसदी जल का संरक्षण हो रहा है।
लोगों के ताने से अगस्त 2019 में शुरू की जैविक खेती, गोभी से बनाई पहचान
अमरजीत के पास सात एकड़ की अपनी पुश्तैनी जमीन है, जिनमें उन्होंने अगस्त 2019 में जैविक खेती शुरू की थी। अमरजीत बताते है कि उनकी खुद की गांव में ही इलेक्ट्रॉनिक की दुकान थी। वे 2019 के शुरुआती माह में लोगों को जैविक खेती के प्रति जागरूक करते थे। इस दौरान काफी लोगों ने उन्हें ताने दिए कि जैविक खेती सिर्फ कहने की बात है गुड़, गोबर से कोई अच्छी उपज नहीं ले सकता। इसके अलावा लोग उन्हें ताने देने लगे कि खुद करके देखो खेती पता चल जाएगा, कितना फायदा है जैविक खेती से। लोगों की ऐसे बातें अमरजीत के जेहन में बैठ गईं और उन्होंने अगस्त 2019 में अपने खेत में जैविक खेती करनी शुरू कर दी। शुरूआत में उन्होंने अमरूद का बाग लगाया, जिसमें पौधों के बीच में गोभी की सब्जी लगाई। इनके द्वारा लगाई गोभी का एक फूल करीब सात किलो की औसत का था। गोभी की बेहतर पैदावार के बाद उनकी विशेष पहचान बना गई, जिसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार जैविक खेती करने लग गए।
खेत में लगाए फल व सब्जियां
अमरजीत ने अपने खेत में फिलहाल अमरूद, बेरी, नींबू, मौसमी, किन्नू, आडू, जामुन, पपीता आदि फल के पेड़ लगाए हुए हैं। इनके अलावा उन्होंने अब सिंचाई करके बेल वाली सब्जियां लगाई है, जिनमें मुख्यत: घीया, तौरी, पेठा, तरबूज, तरकाकड़ी लगाई हुई है।
सोशल मीडिया और कार्यशाला के माध्यम से दे रहे प्रशिक्षण
गांव ईशरवाल निवासी अमरजीत अपने क्षेत्र में जैविक खेती में विशेष पहचान बनाए हुए हैं। दूरदराज के क्षेत्र से किसान उनके पास जैविक खेती और खाद बनानी सीखने के लिए आ रहे हैं। ऐसे में अमरजीत अपने खेत और आसपास के क्षेत्र में प्रशिक्षण शिविर लगाकर किसानों को जैविक खेती की विधि और तरीके के बारे में जानकारी दे रहे हैं। साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से भी वे वीडियो डालकर जानकारी साझा कर रहे हैं। उनसे प्रशिक्षण लेकर गांव ईशरवाल और आसपास के गांव में भी लोग जैविक खेती की ओर बढ़े हैं।