गजब: पिता की उम्र 19, मां की 14 और बेटा 40 साल का, सरकारी योजना में निकली गड़बड़ी
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पिता 19 साल का तो बेटा 40 और मां की उम्र महज 14 साल। यह हम नहीं कह रहे बल्कि प्रदेश सरकार की तरफ से परिवारों को मिले परिवार पहचान पत्र दर्शा रहा है। यह सिर्फ एक परिवार की बात नहीं है बल्कि ज्यादातर परिवार पहचान पत्रों में गलत जानकारियां दर्ज हैं।
बता दें कि बीते चार महीनों से परिवार पहचान पत्र बनाने की व्यापक स्तर पर मुहिम चल रही है। अब तक भिवानी जिले में दो लाख 70 हजार परिवारों के परिवार पहचान पत्र बन चुके हैं, मगर अधिकांश में त्रुटियां हैं। किसी की जाति बदल दी गई है तो किसी की उम्र बेटा-बेटी से भी छोटी हो गई है।
सबसे गंभीर तो इसमें फैमिली के मुखिया ही किसी दूसरे को बना दिया है। इन सभी त्रुटियों को अब जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। 23 अक्तूबर को सुबह नगर परिषद में सदन की बैठक होगी। जिसमें नप अधिकारी और परियोजना अधिकारी पार्षदों के साथ परिवार पहचान पत्र की त्रुटियों पर मंथन करेंगे।
प्रदेश सरकार ने प्रत्येक परिवार को एक यूनिक आर्डडी नंबर जारी करने के लिए परिवार पहचान पत्र बनाए जाने की योजना बनाई थी। इसी के तहत जिलेभर में दो लाख 70 हजार परिवारों के परिवार पहचान पत्र पोर्टल पर जारी किए गए। पोर्टल पर परिवार पहचान पत्र का अधिकांश डाटा मिस मैच यानी परिवार के सदस्यों से मिलान नहीं हो रहा है।
परिवार पहचान पत्र में परिवार का मुखिया और फिर उस परिवार के सदस्य दर्शाये हुए हैं। जिनमें उनकी जन्म तिथि और आपस में संबंध भी दर्शाया है। बैंक अकाउंट की जानकारी और जाति वर्ग का भी कॉलम है। परिवार पहचान पत्र में कई परिवारों की जाति ही बदल गई है।
सामान्य श्रेणी के परिवार को आरक्षित वर्ग का दर्शाया गया है। ऐसे में उम्र का गणित भी बिगड़ने से परिवार के सदस्यों के संबंधों का भी मिलान नहीं हो रहा है। त्रुटियों की वजह से परिवार पहचान पत्र किसी भी सरकारी योजना का लाभ लेने में काम नहीं आ रहा है।
नप कार्यालय में 50 हजार परिवार पहचान पत्र फांक रहे धूल
नगर परिषद कार्यालय में शहरी वार्डों के करीब 50 हजार परिवार पहचान पत्र ईओ कार्यालय में ही धूल फांक रहे हैं। इनको खोला ही नहीं गया, जबकि नियम के अनुसार इनका वितरण घर-घर किया जाना था, ताकि समय रहते अगर कोई गलती मिलती है तो उसे ठीक कराया जा सके। मगर नप कार्यालय में टेबल के नीचे रखा परिवार पहचान पत्र का बंडल पिछले कई महीनों से टस से मस तक नहीं हुआ।
पेंशन की टेंशन भी बढ़ाई
परिवार पहचान पत्र ने जिला समाज कल्याण विभाग से पेंशन बनवाने वालों की भी टेंशन बढ़ा दी है। क्योंकि बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांग पेंशन के लिए परिवार पहचान पत्र अनिवार्य रूप से लागू किया हुआ है। परिवार पहचान पत्र में बुजुर्गों की उम्र को लेकर संशय बना हुआ है।
पोर्टल में उम्र का कोई मिलान नहीं हो पा रहा है। जबकि बुजुर्गों के आधार कार्ड मेें उम्र दर्शायी गई हैं, उसकी भी कोई प्रमाणिकता नहीं है। यही वजह है कि जिले भर में करीब साढ़े चार हजार पेंशन के आवेदन अटके हैं। समाज कल्याण विभाग के पास केवल वही आवेदन पहुंचते हैं, जो पूरी तरह से सही है। पेंशन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है, इस वजह से बुजुर्ग कार्यालय के चक्कर लगाकर भी थक चुके हैं।
मेरे बेटे को बना दिया परिवार का मुखिया, पति का नाम तक दर्ज नहीं है। मैं ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं हूं, इसलिए बार-बार दफ्तर के चक्कर लगा रही हूं। यहां कोई सुनवाई नहीं कर रहा है। मैंने अपना परिवार पहचान पत्र सीएचसी सेंटर पर बनवाया था। त्रुटियों की वजह से मुझे काफी दिक्कतें आ रही हैं। आस-पड़ोस के कई लोगों की भी इसी तरह त्रुटियां हैं। अब ठीक कराने के लिए भटक रहे हैं। - माया देवी, खाड़ी मोहल्ला निवासी।
हमारे घर पर सक्षम युवा परिवार पहचान पत्र बनाने के लिए आए थे। मेरे परिवार के सभी सदस्यों के आधार कार्ड लिए और फिर मोबाइल फोन में ही एंट्री कर मेरे परिवार का फैमिली पहचान पत्र बनाया था। लेकिन जब मैंने इसका प्रिंट आउट निकलवाया तो मेरी उम्र 14 साल और मेरे बेटे की उम्र 40 साल दर्शायी है। जबकि पति का नाम भी गलत लिखा है। मैं अब इस तरह की त्रुटि ठीक कराने नगर परिषद में आई हूं। - अमरपती, जीतुवाला जोहड़ क्षेत्रवासी।
परिवार पहचान पत्र को लेकर नगर परिषद कार्यालय में 23 अक्तूबर सुबह 11 बजे सभी पार्षदों की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त कार्यालय से जिला परियोजना समन्वयक द्वारा पार्षदों को महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी। इस कार्य के लिए नगर पार्षदों को भी सूचित किया जा चुका है। - संजय यादव, कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद भिवानी।
प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना परिवार पहचान पत्र बनाना है। इस योजना में अब तक बन चुके परिवार पहचान पत्रों को अपडेट करने के संबंध में पार्षदों को जागरूक किया जाएगा और वार्ड स्तर पर परिवार पहचान पत्र की त्रुटियों को दुरुस्त कराया जाएगा। पार्षदों को फैमिली आईडी कार्ड की उपयोगिता के बारे में भी जागरूक किया जाएगा। - डॉ. भागीरथ कौशिक जिला परियोजना समन्वयक भिवानी।