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Bhiwani News: दस साल राज में हिस्सेदारी के बाद भी नहीं हो पाया बवानीखेड़ा में विकास
Wed, 18 Sep 2024 10:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Wed, 18 Sep 2024 10:50 PM IST
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बवानीखेड़ा की खस्ताहाल झील।
बवानीखेड़ा। पिछले दस साल से हरियाणा की भाजपा सरकार में बिशंबर वाल्मीकि के दो बार विधायक व राज्यमंत्री रहने बावजूद बवानीखेड़ा आज भी विकास को तरस रहा है।
कस्बे के हिस्से पिछले कुछ विकास परियोजनाएं भी आईं। इसमें कस्बे का अग्निशमन केंद्र, डॉ. हेडगवार भवन व लगभग 3 करोड़ रुपये लागत की झील शामिल है। लेकिन तीनों ही बड़ी परियोजनाओं का शहर को कोई फायदा नहीं हुआ है।
झील में हुए भ्रष्टाचार को लेकर बहुत बार शहर के लोग आवाज उठा चुके हैं, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। लगभग 3 करोड रुपये की लागत से बनी कस्बे की झील जिससे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना था आज गंदे पानी का तालाब और नशेड़ियों का अड्डा बन कर रह गई है।
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वहीं कस्बे का डॉ. हेडगवार भवन भी करोड़ों रुपये की लागत के बाद आज तक शहर के कोई काम नहीं आया है, जहां हर समय ताला लगा रहता है और भवन की हालात भी जर्जर होने लगी है। वही करोड़ों रुपये खर्च कर शहर में डाली गई सीवरे लाइन भी आज बदहाली के आंसू बहा रही है।
पिछले लंबे समय से शहर के किसी न किसी हिस्से में सीवर व्यवस्था के ठप होने को लेकर कस्बे के लोग प्रशासन व सरकार के खिलाफ नजर आए हैं। दूसरी तरफ कस्बे के हांसी चुंगी रोड पर बने अग्निशमन केंद्र का आज तक उद्घाटन नहीं हो पाया है। वहीं अग्निशमन के केंद्र में भ्रष्टाचार के आरोप भी कस्बे के लोग लगाते हैं।
सितंबर 2022 में पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बवानीखेड़ा सहित 6 अन्य कस्बों को उपमंडल का दर्जा देने की घोषणा की थी। इसके लिए मौजूदा सरकार ने एक समिति का गठन किया और सभी नॉमर्स पूरा करके आश्वासन दिया था कि जल्द ही बवानीखेड़ा को उपमंडल का दर्जा दे दिया जाएगा। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल व निवर्तमान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित हलके विधायक व राज्यमंत्री बिशंबर वाल्मीकि भी उपमंडल की मांग को पूरा नहीं कर पाए।
-महेंद्र कस्बावासी
बवानीखेड़ा में झील का निर्माण हुआ है। लेकिन ये झील न तो भ्रमण के लायक है न ही यहां बुजुर्गाें की सुरक्षा की कोई व्यवस्था। देर शाम तक यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। इसलिए यहां कोई घूमने भी नहीं जाता है। साफ सफाई की व्यवस्था तक यहां नहीं है। सरकार का पैसा भी लगा लेकिन इसका कोई फायदा भी नहीं हुआ।
- ओमपति बुजुर्ग महिला।
बवानीखेड़ा को उपमंडल का दर्जा दिलाने की मांग हर चुनाव में मुखर रही है। लेकिन अब चुनाव का दौर है तो किसी भी पार्टी ने अपने एजेंडे में इलाके की इस मांग को शामिल नहीं किया है। निवर्तमान सरकार ने उपमंडल का दर्जा देने की घोषणा भी कर दी थी, मगर आज तक यह तहसील के तौर पर ही काम कर रही है। यहां तहसील कार्यालय ही है, जबकि उपमंडल कार्योें के लिए शहर की तरफ दौड़ना पड़ता है।
- टोनी पाराशर।
कस्बा में बड़ी कोई परियोजना नहीं है। क्षेत्र के लोग यहां पांच सालों तक बदहाली में रहे हैं। अधिकांश वार्डों के अंदर सीवर ठप पड़ा है। गंदे पानी की भी ठीक से निकासी तक नहीं है। नगर पालिका की तरफ से भी सफाई का कोई प्रबंध नहीं है। कस्बा के लोग अपनी प्रमुख मांगों को सरकार तक पहुंचाते रहे, मगर उन मांगों पर न तो जनप्रतिनिधियों ने ध्यान दिया न सरकार ने कोई सुध ली।
- जीतराम शर्मा कस्बावासी।
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कस्बे के हिस्से पिछले कुछ विकास परियोजनाएं भी आईं। इसमें कस्बे का अग्निशमन केंद्र, डॉ. हेडगवार भवन व लगभग 3 करोड़ रुपये लागत की झील शामिल है। लेकिन तीनों ही बड़ी परियोजनाओं का शहर को कोई फायदा नहीं हुआ है।
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झील में हुए भ्रष्टाचार को लेकर बहुत बार शहर के लोग आवाज उठा चुके हैं, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। लगभग 3 करोड रुपये की लागत से बनी कस्बे की झील जिससे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना था आज गंदे पानी का तालाब और नशेड़ियों का अड्डा बन कर रह गई है।
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वहीं कस्बे का डॉ. हेडगवार भवन भी करोड़ों रुपये की लागत के बाद आज तक शहर के कोई काम नहीं आया है, जहां हर समय ताला लगा रहता है और भवन की हालात भी जर्जर होने लगी है। वही करोड़ों रुपये खर्च कर शहर में डाली गई सीवरे लाइन भी आज बदहाली के आंसू बहा रही है।
पिछले लंबे समय से शहर के किसी न किसी हिस्से में सीवर व्यवस्था के ठप होने को लेकर कस्बे के लोग प्रशासन व सरकार के खिलाफ नजर आए हैं। दूसरी तरफ कस्बे के हांसी चुंगी रोड पर बने अग्निशमन केंद्र का आज तक उद्घाटन नहीं हो पाया है। वहीं अग्निशमन के केंद्र में भ्रष्टाचार के आरोप भी कस्बे के लोग लगाते हैं।
सितंबर 2022 में पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बवानीखेड़ा सहित 6 अन्य कस्बों को उपमंडल का दर्जा देने की घोषणा की थी। इसके लिए मौजूदा सरकार ने एक समिति का गठन किया और सभी नॉमर्स पूरा करके आश्वासन दिया था कि जल्द ही बवानीखेड़ा को उपमंडल का दर्जा दे दिया जाएगा। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल व निवर्तमान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित हलके विधायक व राज्यमंत्री बिशंबर वाल्मीकि भी उपमंडल की मांग को पूरा नहीं कर पाए।
-महेंद्र कस्बावासी
बवानीखेड़ा में झील का निर्माण हुआ है। लेकिन ये झील न तो भ्रमण के लायक है न ही यहां बुजुर्गाें की सुरक्षा की कोई व्यवस्था। देर शाम तक यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। इसलिए यहां कोई घूमने भी नहीं जाता है। साफ सफाई की व्यवस्था तक यहां नहीं है। सरकार का पैसा भी लगा लेकिन इसका कोई फायदा भी नहीं हुआ।
- ओमपति बुजुर्ग महिला।
बवानीखेड़ा को उपमंडल का दर्जा दिलाने की मांग हर चुनाव में मुखर रही है। लेकिन अब चुनाव का दौर है तो किसी भी पार्टी ने अपने एजेंडे में इलाके की इस मांग को शामिल नहीं किया है। निवर्तमान सरकार ने उपमंडल का दर्जा देने की घोषणा भी कर दी थी, मगर आज तक यह तहसील के तौर पर ही काम कर रही है। यहां तहसील कार्यालय ही है, जबकि उपमंडल कार्योें के लिए शहर की तरफ दौड़ना पड़ता है।
- टोनी पाराशर।
कस्बा में बड़ी कोई परियोजना नहीं है। क्षेत्र के लोग यहां पांच सालों तक बदहाली में रहे हैं। अधिकांश वार्डों के अंदर सीवर ठप पड़ा है। गंदे पानी की भी ठीक से निकासी तक नहीं है। नगर पालिका की तरफ से भी सफाई का कोई प्रबंध नहीं है। कस्बा के लोग अपनी प्रमुख मांगों को सरकार तक पहुंचाते रहे, मगर उन मांगों पर न तो जनप्रतिनिधियों ने ध्यान दिया न सरकार ने कोई सुध ली।
- जीतराम शर्मा कस्बावासी।