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विधानसभा का रण : चिर प्रतिद्वंद्वी फिर आमने-सामने
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विधानसभा की रणभेरी बज चुकी है। नामांकन प्रक्रिया पूर होने के बाद अब सभी राजनीति दलों के उम्मीदवारों के चेहरों की तस्वीर भी साफ हो चुकी है। मगर इस बार भी पिछले कुछ विधानसभा चुनावों की तरह चिर-प्रतिद्वंद्वियों के बीच ही मुकाबला होगा। मुख्य मुकाबला कांग्रेस, भाजपा और जेजेपी के उम्मीदवारों में ही है। कुछ दलों के उम्मीदवार तो ऐसे है जो तीसरी, चौथी बार आमने-सामने है। कभी एक का पलड़ा भारी रहा है तो कभी दूसरे का। ऐसे में इस बार फिर मुकाबले कांटे के होंगे और देखना दिलचस्प होगा कि बाजी किसके हाथ लगेगी।
घनश्याम लगाएंगे हैट्रिक या डॉ. भारद्वाज करेंगे हिसाब बराबर : कुछ दिन पहले तक भाजपा में साथ दिखने वाले निवर्तमान विधायक घनश्याम सर्राफ और डॉ. शिव शंकर भारद्वाज इस बार भी विधानसभा चुनाव में आमने-सामने हैं। यह चौथी मर्तबा है कि दोनों के बीच मुकाबला हो रहा है। अब तक हुए तीन मुकाबलों में दो में बाजी घनश्याम के हाथ लगी तो एक बार डॉ. भारद्वाज विजयी रहे। दोनों के बीच की जंग वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव से शुरू हुई। इस चुनाव में डॉ. शंकर भारद्वाज ने बाजी मारी। कांग्रेस की सीट पर चुनाव लड़ने वाले डॉ. भारद्वाज ने 45675 वोट हासिल किए जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी भाजपा उम्मीदवार घनश्याम सर्राफ 23874 वोट हासिल कर सके। इसके बाद 2005 में फिर आमने-सामने हुए मगर इस बार बाजी घनश्याम सर्राफ के हाथ लगी। 27337 वोट लेकर उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. भारद्वाज को 2645 मतों से हराया। 2014 के चुनाव में भाजपा की लहर के बीच निवर्तमान विधायक घनश्याम सर्राफ ने डॉ. भारद्वाज को फिर मात दी। इस बार डॉ. भारद्वाज दूसरा स्थान भी हासिल नहीं कर पाए और इनेलो की निर्मला सर्राफ तीसरे स्थान पर रही। विधायक सर्राफ को 50020 वोट मिले। इस बार भी मुख्य मुकाबला विधायक सर्राफ और डॉ. भारद्वाज के बीच देखा जा रहा है।
लोहारू में सोमबीर सिंह और जेपी दलाल तीसरी बार आमने-सामने : लोहारू में कांग्रेस के पूर्व विधायक सोमबीर सिंह और भाजपा नेता जेपी दलाल तीसरी बार आमने-सामने हैं। अब तक हुए दोनों मुकाबलों में दोनों को ही हार मिली जबकि जीत का सेहरा तीसरे के सिर सजा। 1996 से लगातार चुनाव लड़ रहे सोमबीर सिंह वर्ष 1996 और 2000 में विधायक बने। जेपी दलाल ने 2009 से लोहारू विधानसभा में अपनी किस्मत आजमाई। 2009 के चुनाव में पहली बार सोमबीर सिंह और जेपी दलाल आमने सामने हुए मगर दोनों हारे। जीत का सेहरा इनेलो के धर्मपाल के सिर सजा। जेपी दलाल उप विजेता रहे तो सोमबीर सिंह तीसरे स्थान पर रहे। जेपी दलाल को 30264 वोट मिले। 2014 चुनाव में फिर दोनों आमने-सामने हुए। इस बार भी स्थिति पहले वाली ही रही और इनेलो उम्मीदवार ओमप्रकाश बड़वा विजेता रहे। जेपी दलाल दूसरे और सोमबीर सिंह तीसरे स्थान पर रहे। हालांकि इस बार स्थिति थोड़ी अलग है। इनेलो के दो फाड़ होने से इस बार मुख्य मुकाबला सोमबीर सिंह और जेपी दलाल के बीच ही देखा जा रहा है। हालांकि जेजेपी से अलका और इनेलो के राज सिंह गागड़वास को भी कम नहीं आंका जा सकता।
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किरण चौधरी के सामने फिर कमला रानी की चुनौती : तोशाम विधानसभा क्षेत्र में पिछले तीन विधानसभा चुनावों से मुख्य मुकाबला कांग्रेस और इनेलो के बीच ही चलता आ रहा है। मगर इस बार भाजपा के शशि रंजन परमार भी मैदान में है तो मुकाबला त्रिकोणीय है। तोशाम पूर्व मुख्यमंत्री चौ. बंसीलाल का गढ़ है और पिछले 14 विधानसभा चुनावों में 12 बार बंसीलाल परिवार ही विजेता रहा है। पिछला मुकाबला किरण चौधरी और कमला रानी के बीच हुआ। यह तोशाम का पहला ऐसा विधानसभा चुनाव था, जिसमें दो महिला उम्मीदवार आमने-सामने थी। किरण चौधरी ने 58218 वोट हासिल किए जबकि कमला रानी 38477 वोट मिले। इस बार भी दोनों आमने-सामने हैं।
बवानीखेड़ा में बिशंबर-फौजी फिर आमने-सामने : बवानीखेड़ा में जीत की हैट्रिक लगाने वाले पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामकिशन फौजी के सामने एक बार फिर भाजपा से निवर्तमान विधायक बिशंबर वाल्मीकि की चुनौती है। 2014 में भी दोनों आमने-सामने थे और बाजी बिशंबर वाल्मीकि के हाथ लगी। रामकिशन फौजी तीसरे स्थान पर रहे जबकि इनेलो की दया भुरटाना दूसरे स्थान पर रही। इस बार फिर दोनों आमने-सामने है। हालांकि इस बार जेजेपी के राम सिंह वैद, जनता पार्टी से विकास बड़सी, इनेलो की धर्म देवी भी कड़ी टक्कर के मूड में है और पासा पलट सकते हैं।
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घनश्याम लगाएंगे हैट्रिक या डॉ. भारद्वाज करेंगे हिसाब बराबर : कुछ दिन पहले तक भाजपा में साथ दिखने वाले निवर्तमान विधायक घनश्याम सर्राफ और डॉ. शिव शंकर भारद्वाज इस बार भी विधानसभा चुनाव में आमने-सामने हैं। यह चौथी मर्तबा है कि दोनों के बीच मुकाबला हो रहा है। अब तक हुए तीन मुकाबलों में दो में बाजी घनश्याम के हाथ लगी तो एक बार डॉ. भारद्वाज विजयी रहे। दोनों के बीच की जंग वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव से शुरू हुई। इस चुनाव में डॉ. शंकर भारद्वाज ने बाजी मारी। कांग्रेस की सीट पर चुनाव लड़ने वाले डॉ. भारद्वाज ने 45675 वोट हासिल किए जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी भाजपा उम्मीदवार घनश्याम सर्राफ 23874 वोट हासिल कर सके। इसके बाद 2005 में फिर आमने-सामने हुए मगर इस बार बाजी घनश्याम सर्राफ के हाथ लगी। 27337 वोट लेकर उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. भारद्वाज को 2645 मतों से हराया। 2014 के चुनाव में भाजपा की लहर के बीच निवर्तमान विधायक घनश्याम सर्राफ ने डॉ. भारद्वाज को फिर मात दी। इस बार डॉ. भारद्वाज दूसरा स्थान भी हासिल नहीं कर पाए और इनेलो की निर्मला सर्राफ तीसरे स्थान पर रही। विधायक सर्राफ को 50020 वोट मिले। इस बार भी मुख्य मुकाबला विधायक सर्राफ और डॉ. भारद्वाज के बीच देखा जा रहा है।
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लोहारू में सोमबीर सिंह और जेपी दलाल तीसरी बार आमने-सामने : लोहारू में कांग्रेस के पूर्व विधायक सोमबीर सिंह और भाजपा नेता जेपी दलाल तीसरी बार आमने-सामने हैं। अब तक हुए दोनों मुकाबलों में दोनों को ही हार मिली जबकि जीत का सेहरा तीसरे के सिर सजा। 1996 से लगातार चुनाव लड़ रहे सोमबीर सिंह वर्ष 1996 और 2000 में विधायक बने। जेपी दलाल ने 2009 से लोहारू विधानसभा में अपनी किस्मत आजमाई। 2009 के चुनाव में पहली बार सोमबीर सिंह और जेपी दलाल आमने सामने हुए मगर दोनों हारे। जीत का सेहरा इनेलो के धर्मपाल के सिर सजा। जेपी दलाल उप विजेता रहे तो सोमबीर सिंह तीसरे स्थान पर रहे। जेपी दलाल को 30264 वोट मिले। 2014 चुनाव में फिर दोनों आमने-सामने हुए। इस बार भी स्थिति पहले वाली ही रही और इनेलो उम्मीदवार ओमप्रकाश बड़वा विजेता रहे। जेपी दलाल दूसरे और सोमबीर सिंह तीसरे स्थान पर रहे। हालांकि इस बार स्थिति थोड़ी अलग है। इनेलो के दो फाड़ होने से इस बार मुख्य मुकाबला सोमबीर सिंह और जेपी दलाल के बीच ही देखा जा रहा है। हालांकि जेजेपी से अलका और इनेलो के राज सिंह गागड़वास को भी कम नहीं आंका जा सकता।
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किरण चौधरी के सामने फिर कमला रानी की चुनौती : तोशाम विधानसभा क्षेत्र में पिछले तीन विधानसभा चुनावों से मुख्य मुकाबला कांग्रेस और इनेलो के बीच ही चलता आ रहा है। मगर इस बार भाजपा के शशि रंजन परमार भी मैदान में है तो मुकाबला त्रिकोणीय है। तोशाम पूर्व मुख्यमंत्री चौ. बंसीलाल का गढ़ है और पिछले 14 विधानसभा चुनावों में 12 बार बंसीलाल परिवार ही विजेता रहा है। पिछला मुकाबला किरण चौधरी और कमला रानी के बीच हुआ। यह तोशाम का पहला ऐसा विधानसभा चुनाव था, जिसमें दो महिला उम्मीदवार आमने-सामने थी। किरण चौधरी ने 58218 वोट हासिल किए जबकि कमला रानी 38477 वोट मिले। इस बार भी दोनों आमने-सामने हैं।
बवानीखेड़ा में बिशंबर-फौजी फिर आमने-सामने : बवानीखेड़ा में जीत की हैट्रिक लगाने वाले पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामकिशन फौजी के सामने एक बार फिर भाजपा से निवर्तमान विधायक बिशंबर वाल्मीकि की चुनौती है। 2014 में भी दोनों आमने-सामने थे और बाजी बिशंबर वाल्मीकि के हाथ लगी। रामकिशन फौजी तीसरे स्थान पर रहे जबकि इनेलो की दया भुरटाना दूसरे स्थान पर रही। इस बार फिर दोनों आमने-सामने है। हालांकि इस बार जेजेपी के राम सिंह वैद, जनता पार्टी से विकास बड़सी, इनेलो की धर्म देवी भी कड़ी टक्कर के मूड में है और पासा पलट सकते हैं।