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डीसी और शिक्षा विभाग के आदेशों के बीच फंसे गुरुजी
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Tue, 09 Aug 2016 12:09 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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मंझधार में फंसे को रास्ता दिखाने का दायित्व निभाने वाले गुरुजी (शिक्षक) अब खुद असमंजस में हैे। स्कूलों में जादू का शो करवाने को लेकर विकट स्थिति उनके समक्ष पैदा हो गई है। एक तरफ जहां जिला प्रशासन जादू के शो करवाने और इनके लिए बच्चों से फंड एकत्रित करने के आदेश जारी किए है तो वहीं ये सब करना शिक्षा विभाग गैरकानूनी मान रहा है। बकायदा इसके लिए स्कूल मुखियाओं के पास पहले ही शिक्षा विभाग के आयुक्त ने पत्र भेजकर ऐसा न करने के आदेश जारी कर रखे हैं।
दरअसल जिला उपायुक्त ने 19 जुलाई को जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र जारी किया था। इस पत्र में जिला बाल कल्याण विभाग की सहायतार्थ जिले के सभी सरकार व निजी स्कूलों के साथ-साथ कॉलेजों में जादू का शो करवाने की बात कही गई है। इतना ही एक घंटे के शो के लिए पहली से 12वीं तक के प्रति बच्चे से 10 रुपये बतौर फंड भी लिए जाएं। इन आदेशों में जादूगर को रुपये देने के बाद रसीद प्राप्त करने की भी बात भी कही गई है। वहीं शिक्षा विभाग के आयुक्त एवं महानिदेशक द्वारा 16 अक्तूबर 2009 को सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी किए गए पत्र में स्थिति बिल्कुल उलट है। इनमें स्पष्ट तौर पर इस तरह के शो को बैन करने की बात कही गई है। इस पत्र में बच्चों की पढ़ाई बाधित होने का हवाला भी शिक्षा विभाग के महानिदेशक ने दिया है।
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दरअसल जिला उपायुक्त ने 19 जुलाई को जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र जारी किया था। इस पत्र में जिला बाल कल्याण विभाग की सहायतार्थ जिले के सभी सरकार व निजी स्कूलों के साथ-साथ कॉलेजों में जादू का शो करवाने की बात कही गई है। इतना ही एक घंटे के शो के लिए पहली से 12वीं तक के प्रति बच्चे से 10 रुपये बतौर फंड भी लिए जाएं। इन आदेशों में जादूगर को रुपये देने के बाद रसीद प्राप्त करने की भी बात भी कही गई है। वहीं शिक्षा विभाग के आयुक्त एवं महानिदेशक द्वारा 16 अक्तूबर 2009 को सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी किए गए पत्र में स्थिति बिल्कुल उलट है। इनमें स्पष्ट तौर पर इस तरह के शो को बैन करने की बात कही गई है। इस पत्र में बच्चों की पढ़ाई बाधित होने का हवाला भी शिक्षा विभाग के महानिदेशक ने दिया है।
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