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Bhiwani News: ईयरफोन कर रही ध्वनि क्षमता को कमजोर
Sun, 15 Mar 2026 12:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sun, 15 Mar 2026 12:57 AM IST
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भिवानी। युवाओं में ईयरफोन, ईयरबड की बढ़ती लोकप्रियता उनके स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रही है। इनके अधिक प्रयोग से कानों में दर्द, खुजली, ध्वनि क्षमता कम होना जैसी समस्या हो रही हैं। वहीं, कानों में संक्रमण की समस्या भी आम होती जा रही है। शहर के पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज के ओपीडी विभाग में भी इस तरह की शिकायत लेकर मरीज पहुंच रहे हैं।
दरअसल, पढ़ाई, यात्रा के दौरान, अकेले में समय व्यतीत करने के लिए लोग ईयरफोन व ईयरबड का प्रयोग कर संगीत सुनते हैं। लेकिन यहीं आदत धीरे-धीरे कानों के लिए समस्या बन जाती है। हालांकि ईयरफोन और ईयरबड की तुलना में हेडफोन कानों को कम नुकसान पहुंचाता है।
ऐसे होती है समस्या
नागरिक अस्पताल प्रभारी ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. बलवान ने बताया कि ईयरफोन को लंबे समय तक तेज आवाज में इस्तेमाल करने से कान में हवा का प्रवाह नहीं हो पाता, जिससे कान में संक्रमण बनने की संभावना बन जाती है। ईयरफोन का प्रयोग करते समय उससे निकलनी वाली ध्वनि तरंगों और कान के पर्दे के बीच की दूरी कम रहती है। तेज आवाज का दबाव कान के अंदर नसों को सुन्न कर देता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर कान की नसें कमजोर हो जाती हैं और व्यक्ति को सामान्य आवाजें भी सुनाई देना बंद हो जाती हैं।
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ऐसे करें बचाव
डॉ. बलवान ने कहा कि लोगों में सुनाई देने की क्षमता कम होती जा रही है। इसको लेकर सावधानी की जरूरत है। उन्होंने कहा कि तेज आवाज से श्रवण कोशिका को नुकसान पहुंचता है। इसके लिए जरूरी है कि ईयरफोन का इस्तेमाल कम करें। अगर ज्यादा ही जरूरत है तो आवाज को 60 फीसदी से नीचे रखे। लगातार लंबे समय तक ईयरफोन और हेडफोन का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। हर तीस मिनट बाद ब्रेक जरूर लें। ईयरफोन को दूसरों से साझा न करें। इसके अलावा कान के ज्यादा अंदर तक ना डालें।
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दरअसल, पढ़ाई, यात्रा के दौरान, अकेले में समय व्यतीत करने के लिए लोग ईयरफोन व ईयरबड का प्रयोग कर संगीत सुनते हैं। लेकिन यहीं आदत धीरे-धीरे कानों के लिए समस्या बन जाती है। हालांकि ईयरफोन और ईयरबड की तुलना में हेडफोन कानों को कम नुकसान पहुंचाता है।
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ऐसे होती है समस्या
नागरिक अस्पताल प्रभारी ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. बलवान ने बताया कि ईयरफोन को लंबे समय तक तेज आवाज में इस्तेमाल करने से कान में हवा का प्रवाह नहीं हो पाता, जिससे कान में संक्रमण बनने की संभावना बन जाती है। ईयरफोन का प्रयोग करते समय उससे निकलनी वाली ध्वनि तरंगों और कान के पर्दे के बीच की दूरी कम रहती है। तेज आवाज का दबाव कान के अंदर नसों को सुन्न कर देता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर कान की नसें कमजोर हो जाती हैं और व्यक्ति को सामान्य आवाजें भी सुनाई देना बंद हो जाती हैं।
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ऐसे करें बचाव
डॉ. बलवान ने कहा कि लोगों में सुनाई देने की क्षमता कम होती जा रही है। इसको लेकर सावधानी की जरूरत है। उन्होंने कहा कि तेज आवाज से श्रवण कोशिका को नुकसान पहुंचता है। इसके लिए जरूरी है कि ईयरफोन का इस्तेमाल कम करें। अगर ज्यादा ही जरूरत है तो आवाज को 60 फीसदी से नीचे रखे। लगातार लंबे समय तक ईयरफोन और हेडफोन का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। हर तीस मिनट बाद ब्रेक जरूर लें। ईयरफोन को दूसरों से साझा न करें। इसके अलावा कान के ज्यादा अंदर तक ना डालें।