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गांवों में पानी की गुणवत्ता जांच रहा विभाग, शहर के टैंकों में नहीं दिख रही गंदगी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 04 Sep 2021 01:08 AM IST
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dirty water supply in Bhiwani
महम रोड स्थित जलघर के वाटर टैंक में दलदल, इसी से होती है शहरवासियों को पीने के पानी की आपूर्ति। सं? - फोटो : Bhiwani
संजय वर्मा
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भिवानी। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ग्रामीण क्षेत्र में पानी की गुणवत्ता जांचने में जुटा है, लेकिन विभाग को शहर के वाटर टैंकों की गंदगी नहीं दिख रही है। जलघरों की सफाई नहीं होने से शहर की कई कॉलोनियों में गंदे पानी की आपूर्ति हो रही है। इस वजह से लोगों की सेहत भी बिगड़ रही है।
पानी के साथ लगातार मिट्टी टैंकों तक आने के कारण दलदल बन चुकी है, जिसमें अब वनस्पति भी सड़ने लगी है। इस कारण इस पानी की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। इसके सेवन से शहरवासियों की सेहत पर बीमारियों के संक्रमण का खतरा भी बना है।
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महम रोड स्थित पुराने जलघर के टैंकों में दलदल और इसके अंदर सड़ रही वनस्पति की वजह से पानी का स्वाद ही बिगड़ गया है। यहां बने करीब सात वाटर टैंकों से पुराने शहर की करीब एक लाख से अधिक की आबादी को पेयजल आपूर्ति दी जा रही है। कई कॉलोनियों के अंदर गंदा पानी आ रहा है। इसकी शिकायतें भी अधिकारियों के पास पहुंच रही हैं, मगर पानी की गुणवत्ता क्लोरिनेशन के बावजूद भी नहीं सुधर रही है। यहां बने जलघर के वाटर टैंकों की कागजों में क्षमता करीब 10 एमएलडी है, लेकिन धरातल पर मिट्टी की वजह से यहां सिर्फ चार एमएलडी पानी का भंडारण ही हो पा रहा है। इस पानी से भी 15 दिन तक ही शहर में सप्लाई का काम चलता है।
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कीचड़ के पानी से मिट रही शहरवासियों की प्यास
पुराने जलघर के टैंकों के अंदर कीचड़ में कमल खिल उठे हैं, देखने में तो ये नजारा काफी सुहावना लग रहा हैं, मगर इस कीचड़ के पानी को स्वच्छ कर लोगों की पेयजल जरूरतों को पूरा करने में काफी दिक्कतें आ रही हैं। हालांकि टैंक के पानी को क्लोरिनेशन के बाद ही पेयजल सप्लाई में दिया जा रहा है। मगर सिंगल क्लोरिनेशन प्रक्रिया में भी कीचड़ पूरी तरह से साफ नहीं हो पा रहा हैं, जिससे लोगों के घरों तक भी मटमैला पानी पहुंच रहा है, जिसके अंदर बदबू भी आ रही है। अगर इस पानी को लोग पीने में सीधे इस्तेमाल करते हैं तो फिर जलजनित बीमारियों के संक्रमण का खतरा भी बना रहता है। इस कीचड़ के पानी से शहरवासियों की प्यास भी नहीं मिट रही है, क्योंकि पानी का स्वाद भी बिगड़ गया है।
बाढ़ प्रबंधों में लगी प्रशासन की नाव, टैंकों में कौन छांटे गंदगी
जिला प्रशासन के पास बाढ़ नियंत्रण के प्रबंधों को लेकर नौका भी हैं। फिलहाल इन नौकाओं को जिला प्रशासन ने सुरक्षित रखा हुआ है। टैंकों की सफाई का काम भी नौका से ही होता है, क्योंकि पानी के अंदर उगी घास, बेल व अन्य वनस्पति को बाहर निकाला जाता है। इसके लिए प्रशिक्षित कर्मचारी या फिर ठेकेदार के कारिंदे ही काम करते हैं। मगर नौका के अभाव में टैंकों के अंदर गंदगी को आखिर कौन छांटे, यह भी सवाल खड़ा है। (संवाद)
पानी को उबालकर पीएं
मानसून में जनजनित बीमारियों के संक्रमण के मामले बढ़ जाते हैं। इसलिए सप्लाई में आने वाले पानी को सीधे पीने में इस्तेमाल न करें, पानी को पीने से पहले अच्छी तरह उबालकर ठंडा करें। अशुद्ध पानी के सेवन से पेट में दर्द, उल्टी, दस्त, आंतों में संक्रमण तक बढ़ जाता है, इसलिए पीने के पानी को इस्तेमाल से पहले उसकी शुद्धता अवश्य जांचें।

-डॉ. आशीष सांगवान, उप सिविल सर्जन भिवानी।
अक्तूबर में साफ होंगे टैंक
जलघर के टैंकों की सफाई का काम अक्तूबर में कराया जाएगा। इस कार्य के टेंडर कराए जाएंगे। जहां से भी गंदे पानी की आपूर्ति की शिकायतें मिल रही हैं, वहां कर्मचारी मौका मुआयना कर समस्या का समाधान करा रहे हैं। बारिश के मौसम की वजह से टैंकों तक इन दिनों ज्यादा मिट्टी आती है। पूरी तरह स्वच्छ किए जाने के बाद ही पानी को सप्लाई में दिया जा रहा है।
-प्रमोद कुमार, कार्यकारी अभियंता, शहरी पेयजल शाखा, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग।
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