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Bhiwani News: सरकारी स्कूलों में डेस्क टूटे, ब्लैक बोर्ड के नाम पर सिर्फ दीवार ही ब्लैक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 20 Apr 2025 11:03 PM IST
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Desks are broken in government schools, only the walls are black in the name of blackboard
गांव दांग खुर्द के प्राइमरी स्कूल में टूटे पड़े डेस्क। 
भिवानी। जिले के सरकारी स्कूलों की हालात दयनीय है। पड़ताल करने पर सामने आया कि ज्यादातर स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए डेस्क की भी कमी बनी हुई है। बच्चों को टूटे हुए डेस्क पर बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। इसके कारण बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं कुछ स्कूलों में बच्चों को टाट पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है।
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वहीं स्मार्ट बोर्ड के जमाने में स्कूलों में ब्लैक बोर्ड की स्थिति भी खराब बनी है। इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। शिक्षा विभाग की ओर से सरकारी स्कूलों में बच्चों को सुविधा देने के लिए हर साल लाखों रुपये का बजट खर्च किया जाता है, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। सरकार के लाख प्रयासों के बाद भी स्कूलों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा है।
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हालांकि, पीएमश्री व मॉडल संस्कृति स्कूल बनने के बाद कुछ स्कूलों में शिक्षा के साथ-साथ व्यवस्थागत सुधार हुआ है, लेकिन फिर भी ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर जगह आज भी बच्चे मुलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। पड़ताल के तहत तोशाम क्षेत्र के गांव दांग में बने राजकीय प्राइमरी स्कूल की स्थिति जांची तो उसमें पाया कि बच्चों के बैठने के डेस्क ही टूटे हुए हैं। इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
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ब्लैक बोर्ड के नाम पर केवल दीवार ही काली है। वहीं बहल क्षेत्र के गांच चैहड़ कलां के राजकीय स्कूल व खरकड़ी सोहान के सरकारी स्कूल में बच्चों को टाट पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। इसके कारण बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
एक अध्यापक के सहारे चल रही प्राइमरी विंग
गांव दांग के प्राइमरी स्कूल में अध्यापकों की कमी बनी हुई है। स्कूल के चार अध्यापकों में से दो का प्रमोशन व एक अध्यापक का ट्रांसफर होने के कारण स्कूल का पूरा भार इंचार्ज के कंधों पर ही आया हुआ है। इसके कारण बच्चों की पढ़ाई व रोजमर्रा के कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।


--------------नए डेस्क सरकार की ओर से भेजे नहीं गए हैं। पहले वाले डेस्क के सहारे ही काम चलाया जा रहा है। जो कि सही हालत में है। जिन डेस्क में टूट फूट है, जल्द ही उन्हें ठीक करवाया जाएगा। बच्चों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। वहीं ब्लैक बोर्ड के लिए पेंट मंगवाया गया है।
- राजेश कुमार, इंजार्च, प्राइमरी विंग, गांव दांग।
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