फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Bhiwani News ›   Crisis in Ukraine: Locals stopping Indians from boarding the train

यूक्रेन में संकट: भारतीयों को ट्रेन में बैठने से रोक रहे स्थानीय लोग, पैदल ही खारकीव से रूस बॉर्डर पहुंचे विद्यार्थी

Thu, 03 Mar 2022 10:51 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Thu, 03 Mar 2022 10:51 PM IST
सार

दो दिन 25 किलोमीटर पैदल जाने के बाद भी विद्यार्थियों को ट्रेन में जगह नहीं मिली। विद्यार्थियों ने वहां पर ब्रेड खाकर गुजारा किया। भारतीय मेडिकल स्टूडेंट खारकीव से पैदल चल रूस बॉर्डर पर पहुंचे।

विज्ञापन
Crisis in Ukraine: Locals stopping Indians from boarding the train
रूस के बॉर्डर पर पहुंची नैना और मुस्कान स्कूल में बैठी हुई। दूसरी ओर केशव। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

यूक्रेन में रूसी सेना के हमले के बाद हालात लगातार ही बिगड़ते जा रहे हैं। इसकी वजह से मेडिकल स्टूडेंट और उनके परिजन काफी चिंतित हैं। वहीं अब यूक्रेन के स्थानीय लोगों द्वारा भारतीयों को ट्रेन में न बैठने देने का मामला भी सामने आया है, जिससे परिजनों को हर पल अपने बच्चों की सुरक्षा का डर सता रहा है।

विज्ञापन


खारकीव में इन दिनों लगातार ही बमबारी हो रही है, इसको लेकर सरकार ने भी दूतावास को अलर्ट किया हुआ है। बावजूद इसके मेडिकल स्टूडेंट को अपनी सुरक्षा के लिए 25 से अधिक किलोमीटर पैदल चलाना पड़ा। अभी वे सुरक्षित जगह पर तो हैं, मगर नई दिल्ली के लिए फ्लाइट कब मिलेगी यह कहना मुश्किल है। 
विज्ञापन


हरियाणा के भिवानी जिले के छोटूराम कॉलोनी निवासी राजेंद्र शर्मा ने बताया कि उनके बेटे केशव के साथ स्नेहा शर्मा और मुस्कान भी यूक्रेन के शहर खारकीव में मेडिकल स्टूडेंट हैं। दूतावास के निर्देश के बाद केशव, स्नेहा और मुस्कान मंगलवार को खारकीव रेलवे स्टेशन पर 12 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


अचानक बमबारी होने की वजह से उन्हें हॉस्टल के बंकर में लौटना पड़ा। बुधवार को वे सभी पैदल चलकर फिर से खारकीव रेलवे स्टेशन पहुंचें, जहां बमबारी के धमाके सुनाई जिए, जिसकी वजह से वे चिंतित हो गए। फिर रोमानिया के लिए स्टेशन पर ट्रेन आ गई, मगर यूक्रेन के स्थानीय लोगों ने उन्हें ट्रेन में नहीं बैठने दिया। यूक्रेनियों द्वारा उन्हें ट्रेन में बैठने न देने की वजह उन्हें पुलिस से याचना की, जिसके बाद सिर्फ लड़कियों को ट्रेन में बैठने देने की अनुमति दी। मगर बिछड़ जाने की डर से वे ट्रेन में नहीं बैठीं।

फिर केशव, स्नेहा और मुस्कान ने दूतावास में संपर्क किया, जिसके बाद दूतावास ने उनके पास तीन लोकेशन भेजीं। उन्होंने प्राइवेट वाहन किराये पर करना चाहा। मगर सभी ने जाने से मना कर दिया। इसके बाद वे तीनों दूतावास द्वारा भेजी गई लोकेशन रूसी बॉर्डर के नजदीक स्थित गांव पैसों चीनू के लिए पैदल ही निकल लिए, जोकि उनसे 12 किलोमीटर की दूरी पर था।

पैसों चीनू में दूतावास और स्थानीय प्रशासन ने स्कूल में रहने की व्यवस्था की, जहां करीब 700 मेडिकल स्टूडेंट ठहरे हुए हैं। रात सात बजे पहुंचने की वजह से उन्हें भोजन नहीं मिला और उन्हें चाय ब्रेड खाकर ही गुजारा करना पड़ा।


खारकीव में सप्ताह भर से हालात अधिक बिगड़े हुए हैं। पिछले दिनों उन्हें बंकर में रखा गया, जहां इंटरनेट प्रयोग पर भी पाबंदी लगा दी। इसके बाद वे परिजनों ने दिन में महज एक बार ही बात कर पाते थे। इसकी वजह से परिजन चिंतित थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed