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अब आयुष्मान भारत योजना में भी शुरू हुआ फर्जीवाड़ा
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अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। स्वास्थ्य बीमा योजना के बाद अब हाल ही में शुरू की गई प्रधानमंत्री की महत्वकांक्षी योजना आयुष्मान भारत में फर्जीवाड़ा शुरू हो गया है। पैनल में शामिल एक निजी अस्पताल संचालक ने ऐसे ऑपरेशन करके राशि के लिए क्लेम किया है जो सालभर में दो-तीन होते हैं। लेकिन संचालक ने स्कीम के एक माह बाद ही 83 ऑपरेशन करने का दावा कर 17 लाख से अधिक का क्लेम किया है। प्रत्येक ऑपरेशन के लिए 21 हजार रुपये का क्लेम किया गया है।
इतने ऑपरेशन और इतनी राशि का क्लेम किया तो चंडीगढ़ मुख्यालय में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी हैरान रह गए और इसकी जांच शुरू की गई। जांच में सामने आया कि जिन रिटर्नल डिटेचमेंट ऑपरेशन का क्लेम किया है, वे नहीं किए गए बल्कि आईयूएल के ऑपरेशन किए गए। ये इस स्कीम के तहत नहीं होते और सरकार अस्पताल जालान में ये ऑपरेशन करने का प्रावधान है। इसके अलावा 83 नहीं बमुश्किल 10 से 12 ही ऑपरेशन किए गए। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है और जांच के बाद अस्पताल को डिपैनल करने के अलावा धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज भी करवाया जा सकता है।
यूं किया गया फर्जीवाड़ा
पैनल में शामिल महम गेट क्षेत्र के एक अस्पताल ने स्कीम के तहत एक महीने में आंखों के रिटर्नल डिटेचमेंट के 83 ऑपरेशन दिखाए। इसके लिए प्रत्येक ऑपरेशन के लिए 21 हजार रुपये प्रति का क्लेम किया गया। 17 लाख 43 हजार रुपये की राशि का क्लेम किया गया। जब आयुष्मान भारत के सीईओ डॉ. साकेत कुमार के पास यह फाइल पहुंची तो उन्हें संदेह हुआ। जितने ऑपरेशन पूरे हरियाणा में नहीं हुए उतने एक अस्पताल ने किए। जिस पर जांच के निर्देश दिए। चंडीगढ़ मुख्यालय से डॉ. निशिकांत और स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की टीम जांच के लिए अस्पताल पहुंची। जिन मरीजों के ऑपरेशन किए गए उन्हें भी बुलाया गया। केवल आठ मरीज ही पहुंचे। जिनमें से पांच के आईयूएल के ऑपरेशन किए गए थे। जबकि क्लेम किया गया था रिटर्नल डिटेचमेंट का। टीम ने जांच के बाद अब अपनी रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी है। जहां से अब मामले में कार्रवाई की जाएगी।
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ये है पैनल में शामिल अस्पताल
आयुष्मान भारत के पैनल में जिले के जेबी गुप्ता अस्पताल, आईक्यू, गणपराय अस्पताल, धीर अस्पताल आदि शामिल है। इसके अलावा सभी सरकारी अस्पताल, जालान अस्पताल, ईएसआई अस्पताल इस पैनल में शामिल है।
आयुष्मान भारत योजना स्कीम में एक अस्पताल संचालक द्वारा फर्जीवाड़ा की सूचना मिली है, जिसकी जांच मुख्यालय से की जा रही है। अगर अस्पताल संचालक दोषी पाया जाता है तो उसे पैनल से हटाया जा सकता है और उसके खिलाफ धोखाधड़ी का केस भी दर्ज किया जाएगा।
डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता, सिविल सर्जन
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भिवानी। स्वास्थ्य बीमा योजना के बाद अब हाल ही में शुरू की गई प्रधानमंत्री की महत्वकांक्षी योजना आयुष्मान भारत में फर्जीवाड़ा शुरू हो गया है। पैनल में शामिल एक निजी अस्पताल संचालक ने ऐसे ऑपरेशन करके राशि के लिए क्लेम किया है जो सालभर में दो-तीन होते हैं। लेकिन संचालक ने स्कीम के एक माह बाद ही 83 ऑपरेशन करने का दावा कर 17 लाख से अधिक का क्लेम किया है। प्रत्येक ऑपरेशन के लिए 21 हजार रुपये का क्लेम किया गया है।
इतने ऑपरेशन और इतनी राशि का क्लेम किया तो चंडीगढ़ मुख्यालय में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी हैरान रह गए और इसकी जांच शुरू की गई। जांच में सामने आया कि जिन रिटर्नल डिटेचमेंट ऑपरेशन का क्लेम किया है, वे नहीं किए गए बल्कि आईयूएल के ऑपरेशन किए गए। ये इस स्कीम के तहत नहीं होते और सरकार अस्पताल जालान में ये ऑपरेशन करने का प्रावधान है। इसके अलावा 83 नहीं बमुश्किल 10 से 12 ही ऑपरेशन किए गए। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है और जांच के बाद अस्पताल को डिपैनल करने के अलावा धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज भी करवाया जा सकता है।
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यूं किया गया फर्जीवाड़ा
पैनल में शामिल महम गेट क्षेत्र के एक अस्पताल ने स्कीम के तहत एक महीने में आंखों के रिटर्नल डिटेचमेंट के 83 ऑपरेशन दिखाए। इसके लिए प्रत्येक ऑपरेशन के लिए 21 हजार रुपये प्रति का क्लेम किया गया। 17 लाख 43 हजार रुपये की राशि का क्लेम किया गया। जब आयुष्मान भारत के सीईओ डॉ. साकेत कुमार के पास यह फाइल पहुंची तो उन्हें संदेह हुआ। जितने ऑपरेशन पूरे हरियाणा में नहीं हुए उतने एक अस्पताल ने किए। जिस पर जांच के निर्देश दिए। चंडीगढ़ मुख्यालय से डॉ. निशिकांत और स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की टीम जांच के लिए अस्पताल पहुंची। जिन मरीजों के ऑपरेशन किए गए उन्हें भी बुलाया गया। केवल आठ मरीज ही पहुंचे। जिनमें से पांच के आईयूएल के ऑपरेशन किए गए थे। जबकि क्लेम किया गया था रिटर्नल डिटेचमेंट का। टीम ने जांच के बाद अब अपनी रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी है। जहां से अब मामले में कार्रवाई की जाएगी।
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ये है पैनल में शामिल अस्पताल
आयुष्मान भारत के पैनल में जिले के जेबी गुप्ता अस्पताल, आईक्यू, गणपराय अस्पताल, धीर अस्पताल आदि शामिल है। इसके अलावा सभी सरकारी अस्पताल, जालान अस्पताल, ईएसआई अस्पताल इस पैनल में शामिल है।
आयुष्मान भारत योजना स्कीम में एक अस्पताल संचालक द्वारा फर्जीवाड़ा की सूचना मिली है, जिसकी जांच मुख्यालय से की जा रही है। अगर अस्पताल संचालक दोषी पाया जाता है तो उसे पैनल से हटाया जा सकता है और उसके खिलाफ धोखाधड़ी का केस भी दर्ज किया जाएगा।
डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता, सिविल सर्जन