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राजस्थान पुलिस का फर्जी इंस्पेक्टर चढ़ा सीआईए के हत्थे

Wed, 07 Feb 2018 01:00 AM IST
Updated Wed, 07 Feb 2018 01:00 AM IST
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राजस्थान पुलिस का फर्जी इंस्पेक्टर चढ़ा सीआईए के हत्थे
राजस्थान पुलिस का फर्जी इंस्पेक्टर चढ़ा सीआईए के हत्थे
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भिवानी। राजस्थान पुलिस का फर्जी इंस्पेक्टर बनकर ठगी करने वाले जालसाज को सीआईए पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी ने जेल में बंद मादक पदार्थ तस्करी के आरोपी को छुड़ाने के एवज में 50 हजार रुपये लेते सोमवार रात को सीआईए के गिरफ्त में आ गया। नकली इंस्पेक्टर बनकर ठगी करने वाले आरोपी के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने आरोपी को मंगलवार को अदालत में पेश किया।

गांव चंद्र भैणी महम निवासी प्रदीप ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसका पिता रमेश चंद्र हाल ही में मादक पदार्थ तस्करी के आरोप में भिवानी जेल में बंद है। उसने बताया कि जेल में उसके पिता रमेशचंद्र की मुलाकात झज्जर जिला के बिठला गांव का निवासी रणधीर पुत्र उमेद सिंह से हुई। रणधीर सिंह ने अपने आपको राजस्थान पुलिस का सब इंस्पेक्टर बताया। रणधीर ने जेल में उसके पिता से बाहर जाते ही छुड़ाने की बात कही। जेल से बाहर आते ही रणधीर ने उसे फोन करने शुरू कर दिए और कहा कि जेल में बंद उसके पिता को 50 हजार रुपये देने पर छुड़वा सकता है। जब बार-बार फोन करने पर शक हुआ तो उसने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने सूचना के आधार पर सीआईए के सब इंस्पेक्टर भूषण कुमार के नेतृत्व में टीम का गठन किया। इसके बाद शिकायतकर्ता प्रदीप ने सोमवार रात करीब आठ बजे रणधीर सिंह को 50 हजार रुपये देने के लिए महम गेट चौक पर बुलाया। रणधीर सिंह जैसे ही वहां पहुंचा तो सीआईए पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। छानबीन करने पर उसकी वर्दी, बेल्ट नंबर व राजस्थान पुलिस का पहचान पत्र फर्जी पाया गया।
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आरोपी दो माह पहले ही आया था जेल से बाहर
रणधीर सिंह राजस्थान पुलिस की नकली वर्दी व स्टार के बल पर लोगों से ठगी करता था। इसी आरोप में वह 2015 में गिरफ्तार किया गया था। आरोपी दो महीने पहले ही भिवानी जेल में ठगी के मामले में दो साल की सजा काटकर बाहर आया था। जेल से छूटते ही लोगों को ठगना शुरू कर दिया।
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पहचान पत्र में उम्र देखकर हुआ फर्जी होने का संदेह
झज्जर जिला के बिठला निवासी रणधीर सिंह के फर्जी पहचान पत्र के मुताबिक वह राजस्थान पुलिस का इंस्पेक्टर है और बेलट नंबर 845 है। 1961 में जन्मे रणधीर इन फर्जी पहचान पत्रों के मुताबिक 1976 यानी 15 साल की उम्र में ही इंस्पेक्टर बन गया था। पहचान पत्र में उम्र देखकर उस पर पूरी तरह से फर्जी होने का संदेह हुआ। रणधीर सिंह पिछले 6-7 सालों से राजस्थान पुलिस का नकली इंस्पेक्टर बनकर लोगों से ठगी कर रहा था।
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वर्दी में मुलाकात कर लोगों को लेता था अपने झांसे में
रणधीर सिंह पुलिस की नकली वर्दी पहनकर लोगों से मिलकर अपने झांसे में लेता था। रणधीर लोगों को बताता कि वो राजस्थान पुलिस में ना केवल इंस्पेक्टर है, बल्कि उसके आला अधिकारियों से उसकी अच्छी दोस्ती है। वह लोगों को झांसे में लेकर बेरोजगार युवकों को राजस्थान पुलिस में भर्ती करवाने के लिए 6-7 लाख रुपये मांग करता था।
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इससे पहले दादरी में भी दबोचा जा चुका है यह नटवरलाल
आरोपी रणधीर सिंह युवाओं की बेरोजगारी का फायदा उठा कर राजस्थान का रिहायसी प्रमाण पत्र बनाने के लिए 20-25 हजार रुपये की मांग करता, जो उसे आसानी से मिल जाते। इसके बाद वह फरार हो जाता। फर्जी रिहायशी प्रमाण पत्र बनाने के मामले में रणधीर को 2015 में गिरफ्तार किया गया था।

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रणधीर से नकली वर्दी, स्टार, दो नकली मुहर व फर्जी पहचान पत्र बरामद किए गए हैं। महम के गांव चन्द्र भैणी निवासी प्रदीप की शिकायत पर रणधीर को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी को अदालत में पेश कर तीन दिन के रिमांड पर लिया है।
-भूषण कुमार सब इंस्पेक्टर, सीआईए

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