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प्रीमियम लौटाने का मामला गर्माया
Updated Wed, 11 Oct 2017 12:07 AM IST
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तोशाम। फसल बीमा प्रीमियम राशि किसानों के खाते में वापस लौटाकर ओलावृष्टि से प्रभावित सरसों व गेहूं की फसल के मुआवजे पर पलीता लगाने का मामला गर्मा गया है। संबंधित बैंक शाखा में 400 से ज्यादा किसानों की बीमा प्रीमियम राशि छह माह बाद लौटा दी गई है। सांसद धर्मबीर सिंह ने मामले में सरकार व पार्टी को बदनाम करने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने व मुआवजा प्रभावित किसानों को मुआवजा दिए जाने की मांग की है।
बैंक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बीमा कंपनी ने प्रीमियम राशि को लेकर ओलावृष्टि से पहले कोई सवाल खड़ा नहीं किया। गांव देवावास में ओलावृष्टि होने के बाद बीमा कंपनी ने प्रीमियम राशि यह कहकर लौटा की प्रीमियम राशि देरी से आई है। मामले में गंभीर सवाल खड़े होने लाजमी हैं। प्रीमियम राशि देर से आने की तुरंत कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इसके अलावा छह माह बाद मुआवजा राशि बनने के हालात को मद्देनजर राशि को वापस खातों में डाल देना सवाल खड़े कर रहा है।
मामले को लेकर गांव देवावास के सरपंच रामधारी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री के ओएसडी कैप्टन भूपेंद्र सिंह से मुलाकात की। सरपंच ने मुख्यमंत्री के नाम लिखा पत्र ओएसडी को सौंपा। पत्र के माध्यम से सरपंच ने मामले को बैंक व बीमा कंपनी द्वारा मिलीभगत कर गोलमाल का आरोप लगाया। सरपंच ने कहा कि मुआवजा राशि बनने के बाद बीमा प्रीमियम राशि लौटाना किसानों के साथ घोटाला किया गया है। मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो और किसानों को मुआवजा राशि दी जाए।
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बीमा कंपनी का एरिया बदला, अब संपर्क नहीं
जानकारी के अनुसार गत वर्ष फसली बीमा जिस कंपनी द्वारा किया गया था। इस वर्ष यह क्षेत्र उस कंपनी के पास नहीं है। कंपनी बदले जाने के कारण तत्कालीन कंपनी के अधिकारियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। तत्कालीन बीमा कंपनी अधिकारियों के संपर्क सूत्र बदल चुके हैं।
ये है मामला
गांव देवावास के किसानों के साथ मुआवजा राशि को लेकर हादसा हो गया है। ओलावृष्टि से सरसों व गेंहू की फसल तबाह हो गई थी। जानकारी के अनुसार फसल बर्बादी को लेकर मुआवजा राशि भी बना दी गई है। लेकिन मुआवजे की बाट जोह रहे किसानों के साथ यह घटना बड़े सदमे से कम नहीं है कि उनकी फसल बीमे की प्रीमियम राशि छह माह बाद वापस खातों में आ गई है। गांव देवावास के किसानों का केसीसी खाता सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक शाखा ईशरवाल में है। बैंक शाखा के विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि शाखा में 400 से ज्यादा ऐसे किसान हैं जिनकी बीमा प्रीमियम राशि वापस खातों में आ गई है।
भारतीय किसान यूनियन की भौंहें तनी
मुआवजा राशि देने से बचने के लिए बीमा प्रीमियम राशि किसानों के खातों में वापस लौटाए जाने के मामले में भारतीय किसान यूनियन भी ताव में आ गई है। भारतीय किसान यूनियन के खंड बहल के अध्यक्ष रवि आजाद, तोशाम खंड के उप-प्रधान सुरेंद्र छपारिया ने बताया कि मामले में बुधवार शाम को ही गांव देवावास में महापंचायत बुलाई गई है। महापंचायत में आगामी निर्णय लिया लाएगा।
सांसद ने की जांच की मांग
सांसद धर्मबीर सिंह ने कहा कि मामले की जांच होनी चाहिए। ऐसा लगता है कि सरकार व पार्टी को बदनाम करने की यह साजिश है। व्यवस्था के बीच के लोगों की यह साजिश है। सांसद ने कहा कि मामले की जांच कर दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। किसानों को हर हाल में न्याय मिलना चाहिए। सांसद ने कहा कि केसीसी कार्ड धारकों के खातों से प्रीमियम राशि कटी है तो इसमें देरी या बिना देरी का सवाल कैसे खड़ा हो सकता है। किसानों को मुआवजा मिलना ही चाहिए।
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बैंक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बीमा कंपनी ने प्रीमियम राशि को लेकर ओलावृष्टि से पहले कोई सवाल खड़ा नहीं किया। गांव देवावास में ओलावृष्टि होने के बाद बीमा कंपनी ने प्रीमियम राशि यह कहकर लौटा की प्रीमियम राशि देरी से आई है। मामले में गंभीर सवाल खड़े होने लाजमी हैं। प्रीमियम राशि देर से आने की तुरंत कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इसके अलावा छह माह बाद मुआवजा राशि बनने के हालात को मद्देनजर राशि को वापस खातों में डाल देना सवाल खड़े कर रहा है।
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मामले को लेकर गांव देवावास के सरपंच रामधारी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री के ओएसडी कैप्टन भूपेंद्र सिंह से मुलाकात की। सरपंच ने मुख्यमंत्री के नाम लिखा पत्र ओएसडी को सौंपा। पत्र के माध्यम से सरपंच ने मामले को बैंक व बीमा कंपनी द्वारा मिलीभगत कर गोलमाल का आरोप लगाया। सरपंच ने कहा कि मुआवजा राशि बनने के बाद बीमा प्रीमियम राशि लौटाना किसानों के साथ घोटाला किया गया है। मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो और किसानों को मुआवजा राशि दी जाए।
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बीमा कंपनी का एरिया बदला, अब संपर्क नहीं
जानकारी के अनुसार गत वर्ष फसली बीमा जिस कंपनी द्वारा किया गया था। इस वर्ष यह क्षेत्र उस कंपनी के पास नहीं है। कंपनी बदले जाने के कारण तत्कालीन कंपनी के अधिकारियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। तत्कालीन बीमा कंपनी अधिकारियों के संपर्क सूत्र बदल चुके हैं।
ये है मामला
गांव देवावास के किसानों के साथ मुआवजा राशि को लेकर हादसा हो गया है। ओलावृष्टि से सरसों व गेंहू की फसल तबाह हो गई थी। जानकारी के अनुसार फसल बर्बादी को लेकर मुआवजा राशि भी बना दी गई है। लेकिन मुआवजे की बाट जोह रहे किसानों के साथ यह घटना बड़े सदमे से कम नहीं है कि उनकी फसल बीमे की प्रीमियम राशि छह माह बाद वापस खातों में आ गई है। गांव देवावास के किसानों का केसीसी खाता सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक शाखा ईशरवाल में है। बैंक शाखा के विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि शाखा में 400 से ज्यादा ऐसे किसान हैं जिनकी बीमा प्रीमियम राशि वापस खातों में आ गई है।
भारतीय किसान यूनियन की भौंहें तनी
मुआवजा राशि देने से बचने के लिए बीमा प्रीमियम राशि किसानों के खातों में वापस लौटाए जाने के मामले में भारतीय किसान यूनियन भी ताव में आ गई है। भारतीय किसान यूनियन के खंड बहल के अध्यक्ष रवि आजाद, तोशाम खंड के उप-प्रधान सुरेंद्र छपारिया ने बताया कि मामले में बुधवार शाम को ही गांव देवावास में महापंचायत बुलाई गई है। महापंचायत में आगामी निर्णय लिया लाएगा।
सांसद ने की जांच की मांग
सांसद धर्मबीर सिंह ने कहा कि मामले की जांच होनी चाहिए। ऐसा लगता है कि सरकार व पार्टी को बदनाम करने की यह साजिश है। व्यवस्था के बीच के लोगों की यह साजिश है। सांसद ने कहा कि मामले की जांच कर दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। किसानों को हर हाल में न्याय मिलना चाहिए। सांसद ने कहा कि केसीसी कार्ड धारकों के खातों से प्रीमियम राशि कटी है तो इसमें देरी या बिना देरी का सवाल कैसे खड़ा हो सकता है। किसानों को मुआवजा मिलना ही चाहिए।