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बलियाली में पशुओं की अज्ञात बीमारी से मौत, शहर के चिकित्सक भी पहुंचे बलियाली गांव
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अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। बलियाली में पालतु पशुओं में अज्ञात बीमारी का कहर बना हुआ है। अब तक सरकारी रिकार्ड के अनुसार 15 पशुओं की मौत हो चुकी है जबकि ग्रामीणों का दावा है कि यह संख्या इससे ज्यादा है। वीरवार को शहर के चार चिकित्सकों की टीम भी बलियाली पहुंची और बीमार पशुओं का इलाज किया। दो पशुओं को जांच के लिए हिसार भेजा गया। कृषि उप निदेशक और एसडीओ भी गांव में पहुंचे।
बलियाली में पिछले 15 दिनों से पशुओं में बीमारी फैली हुई है। जिसके कारण पशुओं को बुखार होता है और वे दम तोड़ जाते है। इससे पशुपालकों में भी हड़कंप मचा हुआ है। मामला संज्ञान में आने के बाद पशुपालन विभाग के अधिकारी, चिकित्सक भी बलियाली गांव पहुंचे और जांच अभियान चलाया। अनेक पशुओं के सैंपल लिए गए। उप निदेशक डा. जय सिंह, एसडीओ डा. राजेंद्र वत्स के अलावा भिवानी से चिकित्सकों की टीम डा. संदीप सहरावत, डा. जगबीर ढांडा, डा. सुनील भी पहुंचे और जांच की। वहां कार्यरत डा. विजय सनसनवाल ने भी पशुओं को जांचा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार अब तक करीब पांच भैंसों और करीब 10 काटड़ों की मौत हुई जबकि ग्रामीणों के अनुसार 20 से 25 पशुओं की मौत हो चुकी है।
हिसार में हुई दो पशुओं की जांच, निमोनिया की हुई पुष्टि
बलियाली के पशुपालक रोहताश की एक भैंस और एक कट्डी को बीमारी के चलते जांच के लिए हिसार पशु विश्वविद्यालय में भेजा गया। जहां जांच की तो सामने आया कि दोनों पशुओं को निमोनिया है। वहीं गांव में चर्चाएं ये भी है कि मुंहखुर बीमारी के भी पशुओं में लक्षण है।
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पशुओं की मौत के मामले में अलग-अलग आंकड़े देकर गलतफहमी फैलाई जा रही है। बलियाली में स्थिति नियंत्रण में है। मौसम बदल रहा है तो भैंसों के छोटे बच्चे कई बार बदलते मौसम का दबाव नहीं सहन कर पाते। इसके अलावा यह भी सामने आया है कि काफी लोग काटड़ों को जमीन में दबाने की बजाए नालों में फेंक रहे है। जिससे नाले जाम होते है और बीमारी फैलती है। पशुपालक एहतियात के तौर पर पशुओं को कुछ समय जोहड़ों में भी ना लेकर जाए।
डा. जय सिंह, उप निदेशक
पशुपालन विभाग
फौजी बोले, 39 पशुओं की हुई मौत, प्रति पशु मिले एक लाख रुपये मुआवजा
बवानीखेड़ा। चिकित्सकों की लाख कोशिशें के बावजूद बलियाली में हर रोज पशुओं की मौत का सिलसिला जारी है। अब तक 39 पशुओं की मौत हो चुकी है। यह कहना है पूर्व सीपीएस रामकिशन फौजी ने सरकार से पीड़ित पशु पालकों को एक लाख रुपये प्रति पशु देने की मांग की है। उन्होने सरकार से मांग की है कि वो गांव में विशेषज्ञ डॉक्टरों की अतिरिक्त टीम भेजे, जो कि बीमारी का पता लगा कर इलाज कर सके। रामकिशन फौजी गांव बलियाली में लगातार हो रही पशुओं की मौत प्रकरण में हालातों का जायजा लेने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि पिछले 15 दिनों से गांव बलियाली में कई दुधारु पशु मर चुके है। बीमार पशुओं के लिए ईलाज के लिए गांव में एम्बुलेंस का प्रबंध किया जाए।
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भिवानी। बलियाली में पालतु पशुओं में अज्ञात बीमारी का कहर बना हुआ है। अब तक सरकारी रिकार्ड के अनुसार 15 पशुओं की मौत हो चुकी है जबकि ग्रामीणों का दावा है कि यह संख्या इससे ज्यादा है। वीरवार को शहर के चार चिकित्सकों की टीम भी बलियाली पहुंची और बीमार पशुओं का इलाज किया। दो पशुओं को जांच के लिए हिसार भेजा गया। कृषि उप निदेशक और एसडीओ भी गांव में पहुंचे।
बलियाली में पिछले 15 दिनों से पशुओं में बीमारी फैली हुई है। जिसके कारण पशुओं को बुखार होता है और वे दम तोड़ जाते है। इससे पशुपालकों में भी हड़कंप मचा हुआ है। मामला संज्ञान में आने के बाद पशुपालन विभाग के अधिकारी, चिकित्सक भी बलियाली गांव पहुंचे और जांच अभियान चलाया। अनेक पशुओं के सैंपल लिए गए। उप निदेशक डा. जय सिंह, एसडीओ डा. राजेंद्र वत्स के अलावा भिवानी से चिकित्सकों की टीम डा. संदीप सहरावत, डा. जगबीर ढांडा, डा. सुनील भी पहुंचे और जांच की। वहां कार्यरत डा. विजय सनसनवाल ने भी पशुओं को जांचा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार अब तक करीब पांच भैंसों और करीब 10 काटड़ों की मौत हुई जबकि ग्रामीणों के अनुसार 20 से 25 पशुओं की मौत हो चुकी है।
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हिसार में हुई दो पशुओं की जांच, निमोनिया की हुई पुष्टि
बलियाली के पशुपालक रोहताश की एक भैंस और एक कट्डी को बीमारी के चलते जांच के लिए हिसार पशु विश्वविद्यालय में भेजा गया। जहां जांच की तो सामने आया कि दोनों पशुओं को निमोनिया है। वहीं गांव में चर्चाएं ये भी है कि मुंहखुर बीमारी के भी पशुओं में लक्षण है।
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पशुओं की मौत के मामले में अलग-अलग आंकड़े देकर गलतफहमी फैलाई जा रही है। बलियाली में स्थिति नियंत्रण में है। मौसम बदल रहा है तो भैंसों के छोटे बच्चे कई बार बदलते मौसम का दबाव नहीं सहन कर पाते। इसके अलावा यह भी सामने आया है कि काफी लोग काटड़ों को जमीन में दबाने की बजाए नालों में फेंक रहे है। जिससे नाले जाम होते है और बीमारी फैलती है। पशुपालक एहतियात के तौर पर पशुओं को कुछ समय जोहड़ों में भी ना लेकर जाए।
डा. जय सिंह, उप निदेशक
पशुपालन विभाग
फौजी बोले, 39 पशुओं की हुई मौत, प्रति पशु मिले एक लाख रुपये मुआवजा
बवानीखेड़ा। चिकित्सकों की लाख कोशिशें के बावजूद बलियाली में हर रोज पशुओं की मौत का सिलसिला जारी है। अब तक 39 पशुओं की मौत हो चुकी है। यह कहना है पूर्व सीपीएस रामकिशन फौजी ने सरकार से पीड़ित पशु पालकों को एक लाख रुपये प्रति पशु देने की मांग की है। उन्होने सरकार से मांग की है कि वो गांव में विशेषज्ञ डॉक्टरों की अतिरिक्त टीम भेजे, जो कि बीमारी का पता लगा कर इलाज कर सके। रामकिशन फौजी गांव बलियाली में लगातार हो रही पशुओं की मौत प्रकरण में हालातों का जायजा लेने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि पिछले 15 दिनों से गांव बलियाली में कई दुधारु पशु मर चुके है। बीमार पशुओं के लिए ईलाज के लिए गांव में एम्बुलेंस का प्रबंध किया जाए।