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कोरोना का असर : दिल्ली बंद होने से प्रवासी कारीगरों का भी पलायन शुरू

Sat, 08 May 2021 12:28 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 08 May 2021 12:28 AM IST
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cloth stiching worker, return home, railway station
भिवानी। कोरोना के कारण दिल्ली बंद होना कारीगरों पर भी भारी पड़ रहा है। प्रवासी मजदूरों के बाद अब कारीगरों ने भी पलायन शुरू कर दिया है। ये प्रवासी कारीगर भिवानी के रेलवे जंक्शन पर दिल्ली तक का सफर तय करने के लिए पेड़ की छांव में जमीन पर ही डेरा डाले हुए हैं। ये करीब पांच माह पहले ही सिलाई कारीगर के तौर पर भिवानी में काम करने आए थे।
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ये कारीगर भिवानी के औद्योगिक सेक्टर में कपड़ा सिलाई की इकाइयों में काम करते थे। लेकिन कोरोना संक्रमण की वजह से दिल्ली में माल की सप्लाई बंद पड़ी है। वहीं भिवानी में भी साप्ताहिक लॉकडाउन लगा हुआ है। ऐसे में ये कारीगर काम बंद होने और लॉकडाउन में फंसे होने की वजह से घर जाने को मजबूर हैं।
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मूल रूप से बिहार के चंदवार, मजगवा, कनौर निवासी मुकुल कुमार, संदीप कुमार, धर्मेंद्र ने बताया कि करीब चार माह पहले वे सिलाई कारीगर के तौर पर भिवानी में आए थे। सब ठीक चल रहा था। लेकिन कोरोना के ज्यादा मामले आने की वजह से दिल्ली बंद हो गई। उनके द्वारा तैयार किया जाने वाला कपड़ा दिल्ली में ही खपत होता था, मगर माल दिल्ली जाना बंद हुआ तो उनका काम भी ठप हो गया। कई दिनों तक तो बैठकर पहले कमाये पैसे से काम चलाया। लेकिन अब लॉकडाउन में घर जाना मजबूरी हो गया। वे भिवानी से ट्रेन के जरिए दिल्ली जाएंगे और फिर वहां से आगे गांव तक का सफर तय करेंगे। वहीं स्टेशन पर बैठे उत्तर प्रदेश के बांदा जिला निवासी कालू ने बताया कि वह ईंट भट्ठे पर पथेर का काम करता था। लॉकडाउन लगा है और गांव में उसकी मां की भी मौत हो गई है। अब बीबी बच्चों को लेकर वापस गांव लौट रहा हूं।
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औद्योगिक सेक्टर में बंद पड़ी हैं 300 से अधिक इकाइयां
पहले से ही मंदी की मार झेल रही अधिकांश औद्योगिक इकाइयां दिल्ली बंद होने के बाद से ही बंद हैं। सेक्टर 21 व सेक्टर 26 में करीब 300 औद्योगिक इकाइयां बंद हैं। इनमें काम करने वाले कारीगर और मजदूर अब पलायन कर रहे हैं। हालांकि कुछ उद्योग अभी भी चल रहे हैं, जिनमें खपत होने वाला माल दिल्ली के रास्ते प्रदेश के अन्य हिस्सों में पहुंच रहा है। जिनमें मुश्किल से 25 फीसदी लेबर ही काम कर रहे हैं।
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