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ऑक्सीजन और दवा फुल, व्यवस्था गुल
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सामान्य अस्पताल में कोरोना टेस्ट के लिए फ्लू कॉर्नर पर उमड़ी भीड़। संवाद
- फोटो : Bhiwani
आदेश चौधरी
भिवानी। प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का दावा है कि जिले में कोरोना से निपटने के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। ऑक्सीजन और दवाओं का कोटा भी फुल होने के दावे किए जा रहे हैं। मगर चिंता की बात यह है कि जिला सामान्य अस्पताल में व्यवस्थाएं बदहाल हैं। कोरोना पर काबू पाने के लिए जिन पाबंदियों पर अमल करना जरूरी है, जो एहतियात बरतनी जरूरी हैं, उन पर जिला सामान्य अस्पताल में कोई काम नहीं किया जा रहा है। (संवाद)
अव्यवस्था : 1.
सामुदायिक दूरी का प्रबंध नहीं
कोरोना की जांच कराने के लिए जिला सामान्य अस्पताल में फ्लू कॉर्नर बनाया गया है। ओपीडी से पर्ची बनवाने के बाद यहां पर कोरोना की जांच की जाती है। हर रोज यहां औसतन 400 लोग जांच करवाने के लिए पहुंच रहे हैं। इन लोगों के लिए सामुदायिक दूरी बनाए रखने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। लोग समूह में एक दूसरे से सटकर खड़े होते हैं। लोगों का कहना है कि बचाव के लिए हम घर से मास्क लगाकर आते हैं। यहां पर लोग पहले नंबर लगाने के चक्कर मेें सारा माहौल बिगाड़ देते हैं। भीड़ लग जाती है। अस्पताल प्रशासन की ओर से सामुदायिक दूरी का कोई प्रबंध नहीं किया गया है। हंगामा होने की स्थिति में पुलिस को बुला लिया जाता है। रविवार को भी स्थिति संभालने के लिए पुलिस बुलानी पड़ी। थोड़ी देर बाद फिर से वही हालात हो जाते हैं। ऐसे में जो लोग संक्रमित नहीं हैं और सिर्फ जांच कराने आए हैं, उनको भी संक्रमण होने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
समाधान या सुझाव
फ्लू कॉर्नर में जांच करवाने के लिए टोकन व्यवस्था शुरू की जा सकती है। लोगों को टोकन देकर सामुदायिक दूरी के साथ बैठा दिया जाए। जिसका नंबर आए वो जाकर अपनी जांच करा ले। इससे लोग सामुदायिक दूरी के साथ रह सकेंगे। भीड़ नहीं होगी तो हंगामे की नौबत भी नहीं आएगी। लोगों को अपनी बारी के इंतजार में घंटों तक लाइन में भी नहीं खड़ा रहना होगा। टोकन सिस्टम एक बेहतर व्यवस्था हो सकती है।
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अव्यवस्था : 2
आइसोलेशन वार्ड में बिना मास्क घूमते हैं कर्मचारी
जिला सामान्य अस्पताल के वार्ड 10 में आइसोलेशन के लिए रिजर्व है। वहां कोरोना मरीजों का उपचार किया जा रहा है। नियमों के अनुसार कोरोना मरीजों के पास ड्यूटी करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को पीपीई किट पहनकर रखनी चाहिए ताकि वे संक्रमण की चपेट में न आ सकें। मगर जिला सामान्य अस्पताल में बनाए गए कोरोना वार्ड में स्वास्थ्य कर्मचारी मास्क और दस्ताने तक पहनना जरूरी नहीं समझ रहे हैं। लोग बेरोकटोक वार्ड में घुस जाते हैं। वहां कोई सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं किया गया है। शुक्रवार को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती एक मरीज वहां से गायब हो गया। किसी को पता नहीं चला और बाद में वह बेसुध हालत में बाहर चाय की दुकान के पास पड़ा मिला। बाद में उसकी मौत भी हो गई। एक साल पहले भी एक कैदी आइसोलेशन वार्ड से फरार हो गया था। उसका आज तक सुराग नहीं लगा है। दो लोगों को इस मामले में सस्पेंड भी किया गया था।
समाधान या सुझाव
वार्ड में आने-जाने का एक ही रास्ता हो। वहां पर सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएं। अनाधिकृत किसी भी व्यक्ति को अंदर नहीं जाने दिया जाए। किसी वरिष्ठ अधिकारी की ड्यूटी लगाई जाए जो इस बात का ध्यान रखे कि वार्ड में तैनात कर्मचारी पीपीई किट या अन्य सभी जरूरी उपकरणों का सही तरीके से प्रयोग कर रहे हैं या नहीं। अगर सुरक्षा उपकरणों की कमी है तो उसे भी पूरा कराया जाए। वार्ड और उसके आस-पास के क्षेत्र को लगातार सैनिटाइज किया जाए, ताकि संक्रमण वार्ड से बाहर न जा सके।
वर्जन-
अस्पताल में बेहतर से बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास किया जा रहा है। इसके बावजूद अगर कुछ कमियां हैं तो उनको तुरंत दूर कराया जाएगा। फ्लू कॉर्नर पर सामुदायिक दूरी की व्यवस्था बनाई जाएगी और आइसोलेशन वार्ड में सुरक्षा और एहतियात के बारे में भी ज्यादा संजीदगी बरती जाएगी।
- डॉ. कृष्ण कुमार, कार्यकारी सिविल सर्जन
फ्लू कॉर्नर का हाल
सुबह 10 बजे से 500 रुपये की रसीद कटाकर कोरोना टेस्ट के लिए लाइन में लगे हुए हैं, लेकिन अभी तक कोरोना टेस्ट नहीं हुआ है। मेरे भाई को फ्लाइट से वापस ड्यूटी पर लौटना है, इसलिए अर्जेंट में 72 घंटे के अंदर रिपोर्ट लेनी जरूरी है। अगर समय पर टेस्ट नहीं हुआ तो न तो रसीद काम आएगी और न ही वह वापस ड्यूटी पर लौट पाएगा। यहां कोई व्यवस्था तक नहीं है।
- पूजा, एमसी कॉलोनी वासी।
रुटीन में गला खराब हुआ है। लेकिन मैं सुबह दस बजे से कोरोना टेस्ट कराने के लिए फ्लू कॉर्नर पर खड़ा हूं, यहां लोग भी आपस में भीड़ बनाकर जुटे हैं, इसलिए यहां कोई व्यवस्था तक नहीं है। मैं काफी देर से अपनी बारी का इंतजार कर रहा हूं, मगर अभी तक नंबर नहीं आया है।
- वीरेंद्र सिंह घणघस, शारीरिक शिक्षक।
हम तो जारी की कई सभी हिदायतों का पालन करते हुए यहां कोरोना टेस्ट कराने आए हैं, मगर स्वास्थ्य विभाग की कोई व्यवस्था ठीक नहीं है। हमारे लिए गाइडलाइन हैं, मगर यहां स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए कोई गाइडलाइन नहीं हैं, यही वजह है कि यहां कोई टेस्ट करने का नियम कायदा तक नहीं है।
- एडवोकेट मंदीप सिंह कांटिया, भिवानी।
पहले पर्ची बनवाने के लिए लंबी लाइन में लगे, अब फ्लू कॉर्नर पर टेस्ट कराने वालों की लंबी लाइन लगी है। लोग एक दूसरे के साथ भीड़ बनाकर खड़े हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। मैं बामला से सुबह दस बजे यहां पहुंच गया था, मगर दोपहर एक बजे तक भी मेरा टेस्ट नहीं हुआ है। यहां की व्यवस्था ही खराब है।
एडवोकेट अनिल
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भिवानी। प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का दावा है कि जिले में कोरोना से निपटने के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। ऑक्सीजन और दवाओं का कोटा भी फुल होने के दावे किए जा रहे हैं। मगर चिंता की बात यह है कि जिला सामान्य अस्पताल में व्यवस्थाएं बदहाल हैं। कोरोना पर काबू पाने के लिए जिन पाबंदियों पर अमल करना जरूरी है, जो एहतियात बरतनी जरूरी हैं, उन पर जिला सामान्य अस्पताल में कोई काम नहीं किया जा रहा है। (संवाद)
अव्यवस्था : 1.
सामुदायिक दूरी का प्रबंध नहीं
कोरोना की जांच कराने के लिए जिला सामान्य अस्पताल में फ्लू कॉर्नर बनाया गया है। ओपीडी से पर्ची बनवाने के बाद यहां पर कोरोना की जांच की जाती है। हर रोज यहां औसतन 400 लोग जांच करवाने के लिए पहुंच रहे हैं। इन लोगों के लिए सामुदायिक दूरी बनाए रखने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। लोग समूह में एक दूसरे से सटकर खड़े होते हैं। लोगों का कहना है कि बचाव के लिए हम घर से मास्क लगाकर आते हैं। यहां पर लोग पहले नंबर लगाने के चक्कर मेें सारा माहौल बिगाड़ देते हैं। भीड़ लग जाती है। अस्पताल प्रशासन की ओर से सामुदायिक दूरी का कोई प्रबंध नहीं किया गया है। हंगामा होने की स्थिति में पुलिस को बुला लिया जाता है। रविवार को भी स्थिति संभालने के लिए पुलिस बुलानी पड़ी। थोड़ी देर बाद फिर से वही हालात हो जाते हैं। ऐसे में जो लोग संक्रमित नहीं हैं और सिर्फ जांच कराने आए हैं, उनको भी संक्रमण होने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
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फ्लू कॉर्नर में जांच करवाने के लिए टोकन व्यवस्था शुरू की जा सकती है। लोगों को टोकन देकर सामुदायिक दूरी के साथ बैठा दिया जाए। जिसका नंबर आए वो जाकर अपनी जांच करा ले। इससे लोग सामुदायिक दूरी के साथ रह सकेंगे। भीड़ नहीं होगी तो हंगामे की नौबत भी नहीं आएगी। लोगों को अपनी बारी के इंतजार में घंटों तक लाइन में भी नहीं खड़ा रहना होगा। टोकन सिस्टम एक बेहतर व्यवस्था हो सकती है।
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आइसोलेशन वार्ड में बिना मास्क घूमते हैं कर्मचारी
जिला सामान्य अस्पताल के वार्ड 10 में आइसोलेशन के लिए रिजर्व है। वहां कोरोना मरीजों का उपचार किया जा रहा है। नियमों के अनुसार कोरोना मरीजों के पास ड्यूटी करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को पीपीई किट पहनकर रखनी चाहिए ताकि वे संक्रमण की चपेट में न आ सकें। मगर जिला सामान्य अस्पताल में बनाए गए कोरोना वार्ड में स्वास्थ्य कर्मचारी मास्क और दस्ताने तक पहनना जरूरी नहीं समझ रहे हैं। लोग बेरोकटोक वार्ड में घुस जाते हैं। वहां कोई सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं किया गया है। शुक्रवार को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती एक मरीज वहां से गायब हो गया। किसी को पता नहीं चला और बाद में वह बेसुध हालत में बाहर चाय की दुकान के पास पड़ा मिला। बाद में उसकी मौत भी हो गई। एक साल पहले भी एक कैदी आइसोलेशन वार्ड से फरार हो गया था। उसका आज तक सुराग नहीं लगा है। दो लोगों को इस मामले में सस्पेंड भी किया गया था।
समाधान या सुझाव
वार्ड में आने-जाने का एक ही रास्ता हो। वहां पर सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएं। अनाधिकृत किसी भी व्यक्ति को अंदर नहीं जाने दिया जाए। किसी वरिष्ठ अधिकारी की ड्यूटी लगाई जाए जो इस बात का ध्यान रखे कि वार्ड में तैनात कर्मचारी पीपीई किट या अन्य सभी जरूरी उपकरणों का सही तरीके से प्रयोग कर रहे हैं या नहीं। अगर सुरक्षा उपकरणों की कमी है तो उसे भी पूरा कराया जाए। वार्ड और उसके आस-पास के क्षेत्र को लगातार सैनिटाइज किया जाए, ताकि संक्रमण वार्ड से बाहर न जा सके।
वर्जन-
अस्पताल में बेहतर से बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास किया जा रहा है। इसके बावजूद अगर कुछ कमियां हैं तो उनको तुरंत दूर कराया जाएगा। फ्लू कॉर्नर पर सामुदायिक दूरी की व्यवस्था बनाई जाएगी और आइसोलेशन वार्ड में सुरक्षा और एहतियात के बारे में भी ज्यादा संजीदगी बरती जाएगी।
- डॉ. कृष्ण कुमार, कार्यकारी सिविल सर्जन
फ्लू कॉर्नर का हाल
सुबह 10 बजे से 500 रुपये की रसीद कटाकर कोरोना टेस्ट के लिए लाइन में लगे हुए हैं, लेकिन अभी तक कोरोना टेस्ट नहीं हुआ है। मेरे भाई को फ्लाइट से वापस ड्यूटी पर लौटना है, इसलिए अर्जेंट में 72 घंटे के अंदर रिपोर्ट लेनी जरूरी है। अगर समय पर टेस्ट नहीं हुआ तो न तो रसीद काम आएगी और न ही वह वापस ड्यूटी पर लौट पाएगा। यहां कोई व्यवस्था तक नहीं है।
- पूजा, एमसी कॉलोनी वासी।
रुटीन में गला खराब हुआ है। लेकिन मैं सुबह दस बजे से कोरोना टेस्ट कराने के लिए फ्लू कॉर्नर पर खड़ा हूं, यहां लोग भी आपस में भीड़ बनाकर जुटे हैं, इसलिए यहां कोई व्यवस्था तक नहीं है। मैं काफी देर से अपनी बारी का इंतजार कर रहा हूं, मगर अभी तक नंबर नहीं आया है।
- वीरेंद्र सिंह घणघस, शारीरिक शिक्षक।
हम तो जारी की कई सभी हिदायतों का पालन करते हुए यहां कोरोना टेस्ट कराने आए हैं, मगर स्वास्थ्य विभाग की कोई व्यवस्था ठीक नहीं है। हमारे लिए गाइडलाइन हैं, मगर यहां स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए कोई गाइडलाइन नहीं हैं, यही वजह है कि यहां कोई टेस्ट करने का नियम कायदा तक नहीं है।
- एडवोकेट मंदीप सिंह कांटिया, भिवानी।
पहले पर्ची बनवाने के लिए लंबी लाइन में लगे, अब फ्लू कॉर्नर पर टेस्ट कराने वालों की लंबी लाइन लगी है। लोग एक दूसरे के साथ भीड़ बनाकर खड़े हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। मैं बामला से सुबह दस बजे यहां पहुंच गया था, मगर दोपहर एक बजे तक भी मेरा टेस्ट नहीं हुआ है। यहां की व्यवस्था ही खराब है।
एडवोकेट अनिल