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ठेकेदार ने की हटाए गए 11 कर्मचारियों की नियुक्ति की सिफारिश
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भिवानी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर मचे बवाल पर लीपापोती करते हुए शनिवार को ठेकेदार ने 11 कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए सिफारिश की। ये वही कर्मचारी हैं जिन्हें मिशन के तहत पहले नियुक्ति की गई थी और इसके बाद बवाल मचने पर नाटकीय के ढंग से हटाया गया था। चार दिन के बवाल के बाद उन्हीं कर्मचारियों की सूची जारी कर दी गई, जिन्हें हटाया गया था।
सवाल यह है कि जब ठेकेदार की भूमिका संदिग्ध थी तो उसे फिर से काम करने की इजाजत कैसे मिली। इससे अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है और जो समिति कर्मचारियों की पारदर्शी तरीके से नियुक्ति के लिए बनाई गई थी, वह भी संदेह के घेरे में है। स्वास्थ्य विभाग में नियमों को ताक पर रखकर ठेकेदार ने कर्मचारियों की भर्ती की। योग्यता पर खरे नहीं उतरने के बावजूद लैब टेक्निशियन व अन्य पदों पर भर्ती की गई। जो कि मरीजों के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ था। मामला उजागर हुआ तो 14 एलटी समेत 38 कर्मचारियों को बीते मंगलवार हटा दिया गया। इस मामले में जांच के बाद अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई थी। पहले जांच समिति कहती थी कि ठेकेदार के कारिंदे को बुलाए बिना जांच अधूरी थी। लेकिन बाद में एक खामी बताई कि ठेकेदार ने अपने कारिंदों को पेश नहीं किया। लेकिन इसके साथ-साथ उसे काम देने की सिफारिश भी कर दी गयी। मामला गंभीर था लेकिन अधिकारियों ने ठेकेदार के प्रति नरमी दिखाई। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। अब ठेकेदार ने नए सिरे से 11 कर्मचारियों की नियुक्ति की सिफारिश की है और ये कर्मचारी पहले भी लगे हुए थे।
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सवाल यह है कि जब ठेकेदार की भूमिका संदिग्ध थी तो उसे फिर से काम करने की इजाजत कैसे मिली। इससे अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है और जो समिति कर्मचारियों की पारदर्शी तरीके से नियुक्ति के लिए बनाई गई थी, वह भी संदेह के घेरे में है। स्वास्थ्य विभाग में नियमों को ताक पर रखकर ठेकेदार ने कर्मचारियों की भर्ती की। योग्यता पर खरे नहीं उतरने के बावजूद लैब टेक्निशियन व अन्य पदों पर भर्ती की गई। जो कि मरीजों के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ था। मामला उजागर हुआ तो 14 एलटी समेत 38 कर्मचारियों को बीते मंगलवार हटा दिया गया। इस मामले में जांच के बाद अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई थी। पहले जांच समिति कहती थी कि ठेकेदार के कारिंदे को बुलाए बिना जांच अधूरी थी। लेकिन बाद में एक खामी बताई कि ठेकेदार ने अपने कारिंदों को पेश नहीं किया। लेकिन इसके साथ-साथ उसे काम देने की सिफारिश भी कर दी गयी। मामला गंभीर था लेकिन अधिकारियों ने ठेकेदार के प्रति नरमी दिखाई। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। अब ठेकेदार ने नए सिरे से 11 कर्मचारियों की नियुक्ति की सिफारिश की है और ये कर्मचारी पहले भी लगे हुए थे।
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