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फाइलों तक सिमटे बडे प्रोजेक्ट, बजट न होने से कुछ अटके
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Mon, 29 May 2017 01:28 AM IST
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प्रोजेक्ट फाइल तक सिमटे
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिले के करीब छह प्रोजेक्टों पर अब भी संशय की तलवार लटकी हुई है। इनमें से कोई प्रोजेक्ट फाइल तक सिमट कर रह गया वहीं कुछ प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। वहीं, कुछ प्रोजेक्ट ऐसे हैं जिन्हें बजट की दरकार है। इन प्रोजेक्टों के लिए बजट की मांग संबंधित विभागों ने सरकार को भेज दी है, लेकिन कई माह बाद भी मामला ठंडे बस्ते में ही पड़ा है।
इस समय सिविल अस्पताल की शिफ्टिंग और अधूरे आरओबी का निर्माण कार्य पूरा होना बेहद जरूरी है। दोनों ही प्रोजेक्टों के पूरा होने का इंतजार पिछले ढाई सालों से बढ़ता ही चला जा रहा है। इन प्रोजेक्टों के धरातल पर पूरा होने संबंधित कोई डेडलाइन प्रशासनिक अधिकारी नहीं दे पा रहे है।
जिले में कई ऐसे प्रोजेक्ट कागजों तक सिमटे हैं तो कुछ प्रोजेक्ट शुरू तो कर दिए लेकिन उन पर काम धीमी गति से चल रहा है। मानसून सीजन में सवा माह बाकी है लेकिन जिले के लिए सबसे बड़ी समस्या बरसाती पानी की है। यह यूपीडी ड्रेन निर्माण प्रोजेक्ट पिछले करीब नौ माह से फाइल में अटका हुआ है। इसी प्रकार दिल्ली बाईपास एसटीपी प्रोजेक्ट भी सिरे नहीं चढ़ पा रहा है। इसके अलावा नया अस्पताल शुरू न होने और पुराने अस्पताल में स्टाफ की तैनाती भी अधर में लटकी हुई है।
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वहीं आरओबी का प्रोजेक्ट कांग्रेस सरकार के समय से अटका है। जिले में सीएम घोषणा के तहत गांवों में 24 व्यायामशालाएं बनने की फाइल इस समय हेड ऑफिस में अटकी हुई है। इस फाइल की केवल समीक्षा ही हुई है। फाइल पर एक बार ऑब्जेक्शन भी लग चुका है। इसके अलावा पंचायत विभाग के 100 गांवों के विकास कार्यों के प्रोजेक्टों पर भी ऑब्जेेक्शन लगा दिए गए हैं। ये प्रोजेक्ट रिवाइज कर भेज गए हैं ताकि बजट राशि मंजूरी हो सके। पंचायतों की ओर से लिखित प्रस्ताव न भेजे जाने की वजह से इन पर ऑब्जेक्शन लगे थे।
आरओबी का प्रोजेक्ट लंबे समय से अटका हुआ है। भिवानी रोड से रोहतक रोड तक बाईपास का निर्माण पूरा हो चुका है लेकिन रेलवे की ओर आरओबी निर्माण की मंजूरी न मिलने से ये प्रोजेक्ट कांग्रेस सरकार के शासनकाल से अटका हुआ है। आरओबी निर्माण की मंजूरी रेलवे मुंबई प्रशासन की ओर से दी जानी है। वहीं, सीसीआई फाटक पर एफओबी या आरओबी निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से लोगों का जान मुसीबत में डालकर रेलवे लाइन पार करनी पड़ रही है।
बजट की कमी से सौ बेड का भवन में नहीं हो रहा शिफ्ट
शहर के नए 100 बैड के सिविल अस्पताल की ओपनिंग पर भी अनिश्चितता बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग चिकित्सकों की उपलब्धता न होने की बात कह रहा है। वहीं अस्पताल की पार्किंग और सड़कों का काम बजट राशि के बिना ठप पड़ा है। इस अस्पताल का बजट 10 करोड़ से घटाकर सात करोड़ कर दिया गया था। पीडब्ल्यूडी विभाग ने रिवाइज एस्टीमेट तैयार कर 10 करोड़ की ही मांग कर रखी है लेकिन रिवाइज एस्टीमेट की यह फाइल भी छह माह से अटकी हुई है। इस प्रोजेक्ट पर विभाग निर्धारित से एक्सेस बजट खर्च कर चुका है। शहर में यह नया सिविल अस्पताल 100 बेड का बनाया गया है। इस समय नए अस्पताल के भवन निर्माण कार्य तकरीबन पूरा हो चुका है लेकिन पार्किंग समेत अस्पताल का काफी कार्य अभी भी अधूरा पड़ा है। बजट पर्याप्त न होने की वजह से यह काम पेंडिंग चला आ रहा है।
जिले का ड्रेन निर्माण प्रोजेक्ट भी खटाई में
गत सितंबर माह में जिले के लिए ड्रेन निर्माण की घोषणा की गई थी। ङ्क्षसचाई विभाग ने इस पर काम शुरू किया था। जमीन अधिग्रहण के लिए सर्वे की गई थी लेकिन किसानों द्वारा जमीन देने से इंकार कर दिए जाने पर ड्रेन निर्माण का फै सला रदद करना पड़ा।बाद मेें यूपीडी डेन निर्माण का प्रोजेक्ट तैयार कर हैड ऑफिस भेजा गया। इस प्रोजेक्ट के तहत सतगामा के गांवों में पौंड बनाकर अंडर ग्राउंड पाइप लाइन बिछाकर नहरों में बरसाती पानी डाले जाने की प्लान तैयार की गई थी। इस पर करीब 10 करोड़ की लागत आने का अनुमान है। अब पिछले दिनो सीएम कार्यालय की ओर से इस प्रोजेक्ट पर रोक लगा दी गई है ।इसके पीछे सरकार का यह तर्क रहा कि पहले झज्जर जिले के ढाकला- सुबाना में ड्रेन बनाई जाएगी उसके बाद चरखी दादरी में यूपीडी ड्रेन बनाए जाने पर विचार किया जाएगा।
दिल्ली बाईपास एसटीपी प्रोजेक्ट भी ठंडे बस्ते में
शहर की सीवरेज से जुड़ा एसटीपी सिस्टम का प्रोजेक्ट भी लंबे समय से पेंडिंग चला आ रहा है। एसटीपी के समीप जनस्वास्थ्य विभाग ने बांध बनाकर सीवरेज के पानी को एकत्र कर रखा है। बारिश व सर्दी के मौसम में यह बांध ओवरफ्लो बना रहता है। जिससे आसपास फसलों पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है तथा आसपास का वातावरण भी खराब बना रहता है। इतना ही नहीं ओवरफ्लो होने से शहर की सीवरेज लाइन भी बैक मारने लगती है। यह प्रोजेक्ट भी पिछले एक साल से लटकता आ रहा है। अब विभाग ने यहां बने तालाब की गहराई बढ़ाने व पूरे सिस्टम को अपडेट का एस्टीमेट तैयार किया है लेकिन यह काम शुरू नहीं हो सका है। इसके लिए 24.50 लाख का बजट निर्धारित किया गया है।
अस्पताल अपग्रेड हुआ लेकिन सुविधा शुरू नहीं
शहर का पुराना अस्पताल जच्चा-बच्चा अस्पताल के रूप में अपग्रेड तो कर दिया गया है लेकिन करीब एकसाल बाद भी यहां चिकित्सक व स्टाफ की तैनाती नहीं हो पाई है। यहां एसएमओ के अलावा सात चिकित्सक तैनात किए जाने हैं। सभी प्रकार की मेन लैब भी यहां स्थापित होनी हैं। बाल नर्सरी, अल्ट्रासाउंड के अलावा एक्सरे व अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जानी हैं।
एसटीपी सिस्टम को जल्द ही ठीक कर दिया जाएगा। जल्द ही इसके लिए टेंडर लगाए जाएंगे। विभाग ने यहां काम शुरू करवाने के लिए अपनी तैयारियां पूरी ली है और जल्द ही लोगों को सीवरेज संबंधित समस्याओं से निजात दिलाया जाएगा।
रामपाल, एसडीओ, जन स्वास्थ्य विभाग
पंचायतों के विकास कार्यो के आने वाले दस रोज में बजट राशि जारी होने की उम्मीद है। हमने जो भी ऑब्जेक्शन थे उन्हें दूर करके भेज दिया था। बजट आते ही गांवों में विकास कार्यों के लिए राशि अलॉट कर दी जाएगी।
अजीत सिंह, जूनियर इंजीनियर, पंचायत विभाग
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इस समय सिविल अस्पताल की शिफ्टिंग और अधूरे आरओबी का निर्माण कार्य पूरा होना बेहद जरूरी है। दोनों ही प्रोजेक्टों के पूरा होने का इंतजार पिछले ढाई सालों से बढ़ता ही चला जा रहा है। इन प्रोजेक्टों के धरातल पर पूरा होने संबंधित कोई डेडलाइन प्रशासनिक अधिकारी नहीं दे पा रहे है।
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जिले में कई ऐसे प्रोजेक्ट कागजों तक सिमटे हैं तो कुछ प्रोजेक्ट शुरू तो कर दिए लेकिन उन पर काम धीमी गति से चल रहा है। मानसून सीजन में सवा माह बाकी है लेकिन जिले के लिए सबसे बड़ी समस्या बरसाती पानी की है। यह यूपीडी ड्रेन निर्माण प्रोजेक्ट पिछले करीब नौ माह से फाइल में अटका हुआ है। इसी प्रकार दिल्ली बाईपास एसटीपी प्रोजेक्ट भी सिरे नहीं चढ़ पा रहा है। इसके अलावा नया अस्पताल शुरू न होने और पुराने अस्पताल में स्टाफ की तैनाती भी अधर में लटकी हुई है।
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वहीं आरओबी का प्रोजेक्ट कांग्रेस सरकार के समय से अटका है। जिले में सीएम घोषणा के तहत गांवों में 24 व्यायामशालाएं बनने की फाइल इस समय हेड ऑफिस में अटकी हुई है। इस फाइल की केवल समीक्षा ही हुई है। फाइल पर एक बार ऑब्जेक्शन भी लग चुका है। इसके अलावा पंचायत विभाग के 100 गांवों के विकास कार्यों के प्रोजेक्टों पर भी ऑब्जेेक्शन लगा दिए गए हैं। ये प्रोजेक्ट रिवाइज कर भेज गए हैं ताकि बजट राशि मंजूरी हो सके। पंचायतों की ओर से लिखित प्रस्ताव न भेजे जाने की वजह से इन पर ऑब्जेक्शन लगे थे।
आरओबी का प्रोजेक्ट लंबे समय से अटका हुआ है। भिवानी रोड से रोहतक रोड तक बाईपास का निर्माण पूरा हो चुका है लेकिन रेलवे की ओर आरओबी निर्माण की मंजूरी न मिलने से ये प्रोजेक्ट कांग्रेस सरकार के शासनकाल से अटका हुआ है। आरओबी निर्माण की मंजूरी रेलवे मुंबई प्रशासन की ओर से दी जानी है। वहीं, सीसीआई फाटक पर एफओबी या आरओबी निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से लोगों का जान मुसीबत में डालकर रेलवे लाइन पार करनी पड़ रही है।
बजट की कमी से सौ बेड का भवन में नहीं हो रहा शिफ्ट
शहर के नए 100 बैड के सिविल अस्पताल की ओपनिंग पर भी अनिश्चितता बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग चिकित्सकों की उपलब्धता न होने की बात कह रहा है। वहीं अस्पताल की पार्किंग और सड़कों का काम बजट राशि के बिना ठप पड़ा है। इस अस्पताल का बजट 10 करोड़ से घटाकर सात करोड़ कर दिया गया था। पीडब्ल्यूडी विभाग ने रिवाइज एस्टीमेट तैयार कर 10 करोड़ की ही मांग कर रखी है लेकिन रिवाइज एस्टीमेट की यह फाइल भी छह माह से अटकी हुई है। इस प्रोजेक्ट पर विभाग निर्धारित से एक्सेस बजट खर्च कर चुका है। शहर में यह नया सिविल अस्पताल 100 बेड का बनाया गया है। इस समय नए अस्पताल के भवन निर्माण कार्य तकरीबन पूरा हो चुका है लेकिन पार्किंग समेत अस्पताल का काफी कार्य अभी भी अधूरा पड़ा है। बजट पर्याप्त न होने की वजह से यह काम पेंडिंग चला आ रहा है।
जिले का ड्रेन निर्माण प्रोजेक्ट भी खटाई में
गत सितंबर माह में जिले के लिए ड्रेन निर्माण की घोषणा की गई थी। ङ्क्षसचाई विभाग ने इस पर काम शुरू किया था। जमीन अधिग्रहण के लिए सर्वे की गई थी लेकिन किसानों द्वारा जमीन देने से इंकार कर दिए जाने पर ड्रेन निर्माण का फै सला रदद करना पड़ा।बाद मेें यूपीडी डेन निर्माण का प्रोजेक्ट तैयार कर हैड ऑफिस भेजा गया। इस प्रोजेक्ट के तहत सतगामा के गांवों में पौंड बनाकर अंडर ग्राउंड पाइप लाइन बिछाकर नहरों में बरसाती पानी डाले जाने की प्लान तैयार की गई थी। इस पर करीब 10 करोड़ की लागत आने का अनुमान है। अब पिछले दिनो सीएम कार्यालय की ओर से इस प्रोजेक्ट पर रोक लगा दी गई है ।इसके पीछे सरकार का यह तर्क रहा कि पहले झज्जर जिले के ढाकला- सुबाना में ड्रेन बनाई जाएगी उसके बाद चरखी दादरी में यूपीडी ड्रेन बनाए जाने पर विचार किया जाएगा।
दिल्ली बाईपास एसटीपी प्रोजेक्ट भी ठंडे बस्ते में
शहर की सीवरेज से जुड़ा एसटीपी सिस्टम का प्रोजेक्ट भी लंबे समय से पेंडिंग चला आ रहा है। एसटीपी के समीप जनस्वास्थ्य विभाग ने बांध बनाकर सीवरेज के पानी को एकत्र कर रखा है। बारिश व सर्दी के मौसम में यह बांध ओवरफ्लो बना रहता है। जिससे आसपास फसलों पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है तथा आसपास का वातावरण भी खराब बना रहता है। इतना ही नहीं ओवरफ्लो होने से शहर की सीवरेज लाइन भी बैक मारने लगती है। यह प्रोजेक्ट भी पिछले एक साल से लटकता आ रहा है। अब विभाग ने यहां बने तालाब की गहराई बढ़ाने व पूरे सिस्टम को अपडेट का एस्टीमेट तैयार किया है लेकिन यह काम शुरू नहीं हो सका है। इसके लिए 24.50 लाख का बजट निर्धारित किया गया है।
अस्पताल अपग्रेड हुआ लेकिन सुविधा शुरू नहीं
शहर का पुराना अस्पताल जच्चा-बच्चा अस्पताल के रूप में अपग्रेड तो कर दिया गया है लेकिन करीब एकसाल बाद भी यहां चिकित्सक व स्टाफ की तैनाती नहीं हो पाई है। यहां एसएमओ के अलावा सात चिकित्सक तैनात किए जाने हैं। सभी प्रकार की मेन लैब भी यहां स्थापित होनी हैं। बाल नर्सरी, अल्ट्रासाउंड के अलावा एक्सरे व अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जानी हैं।
एसटीपी सिस्टम को जल्द ही ठीक कर दिया जाएगा। जल्द ही इसके लिए टेंडर लगाए जाएंगे। विभाग ने यहां काम शुरू करवाने के लिए अपनी तैयारियां पूरी ली है और जल्द ही लोगों को सीवरेज संबंधित समस्याओं से निजात दिलाया जाएगा।
रामपाल, एसडीओ, जन स्वास्थ्य विभाग
पंचायतों के विकास कार्यो के आने वाले दस रोज में बजट राशि जारी होने की उम्मीद है। हमने जो भी ऑब्जेक्शन थे उन्हें दूर करके भेज दिया था। बजट आते ही गांवों में विकास कार्यों के लिए राशि अलॉट कर दी जाएगी।
अजीत सिंह, जूनियर इंजीनियर, पंचायत विभाग