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भिवानी में ASI की दबंगई: CJM कोर्ट में जज को स्टेटस रिपोर्ट देने से किया इंकार, खड़े किए ये सवाल

Mon, 13 Mar 2023 05:01 PM IST
नवीन दलाल संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Mon, 13 Mar 2023 05:01 PM IST
सार

चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रितु की अदालत ने शहर थाना पुलिस से जुड़े एक केस की सुनवाई के दौरान पुलिस के जांच अधिकारी एएसआई दशरथ से रिपोर्ट तलब की थी। जिस पर जांच अधिकारी न्यायालय में आया, लेकिन उसने जज के कहने पर पहले तो मामले में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया।

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Bullying of ASI in Bhiwani refused to give status report to judge in CJM court
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भिवानी थाना पुलिस के एक जांच अधिकारी एएसआई द्वारा भिवानी न्यायालय में चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने दबंगई दिखाने और जज के मांगे जाने पर भी केस की स्टेटस रिपोर्ट देने से इंकार कर देने का मामला सामने आया है।

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पुलिस जांच अधिकारी ने कोर्ट में जज पर ही उठा दिए केस में पर्सनल इंट्रेस्ट होने के सवाल 
जांच अधिकारी यहीं नहीं रुका, जज के सवाल किए जाने पर भी न्यायालय में बदतमीजी पर उतर आया और जज पर ही केस में पर्सनल इंट्रेस्ट होने का सवाल उठा डाला। इस पर सीजेएम ने मामले को गंभीरता से लिया और आरोपी पुलिस के जांच अधिकारी के खिलाफ पुलिस अधीक्षक को तुरंत कार्रवाई करने व अपने रीडर को न्यायालय में आदेशों की अवमानना करने पर शिकायत दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। वहीं शहर थाना पुलिस एसएचओ को भी इस मामले में जांच अधिकारी को तुरंत प्रभाव से बदलकर इसकी जानकारी कोर्ट को देने के आदेश दिए हैं। 
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चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रितु की अदालत ने शहर थाना पुलिस से जुड़े एक केस की सुनवाई के दौरान पुलिस के जांच अधिकारी एएसआई दशरथ से रिपोर्ट तलब की थी। जिस पर जांच अधिकारी न्यायालय में आया, लेकिन उसने जज के कहने पर पहले तो मामले में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इसके बाद जब जज ने केस में काफी अहम दस्तावेज होने पर भी एफआईआर कैंसिल किए जाने पर इस मामले से जुड़े दस्तावेज और स्टेटस रिपोर्ट लाने के लिए कहा तो एएसआई दशरथ ने साफ इंकार कर दिया।

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पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के आदेश दिए

जज ने इस मामले में जांच अधिकारी को अपनी स्टेटमेंट दर्ज कराने के लिए बोला तो भी जांच अधिकारी साफ इंकार कर गया। एएसआई यहीं नहीं थमा कोर्ट में जज पर इस मामले में पर्सनल इंट्रेस्ट होने के गंभीर सवाल उठा दिए। जिस पर सीजेएम ने मामले के जांच अधिकारी दशरथ पर कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक को आदेश दिए वहीं कोर्ट के रीडर को भी न्यायालय के आदेशों की अवमानना करने पर अलग से पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के आदेश दिए। वहीं संबंधित केस में सीजेएम ने एएसआई दशरथ की जगह नए जांच अधिकारी को नियुक्त कर शहर थाना पुलिस एसएचओ से इसकी रिपोर्ट भी 16 मार्च तक कोर्ट में तलब की है। 

ये था पूरा मामला

शिकायतकर्ता ने एक वाहन कंपनी से 2016 माडल का वाहन खरीदा था। लेकिन कंपनी ने उसे 2015 का माडल दे दिया। शिकायतकर्ता ने कंपनी के उच्चाधिकारियों से बात की तो कंपनी ने अपनी गलती मानी और वाहन बदलने का आश्वासन दिया। इस पर शिकायतकर्ता ने वाहन कंपनी के कार्यालय में खड़ा कर दिया। जिसके बाद कंपनी ने उसे दूसरा वाहन तो नहीं दिया, लेकिन बकाया राशि का नोटिस जरूर भेज दिया।

इसके बाद पीडि़त ने मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक को दी। पुलिस अधीक्षक की शिकायत देने पर भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। शिकायतकर्ता ने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में इस्तगासा डाला। जिस पर कोर्ट ने पुलिस को इस संबंध में एफआईआर दर्ज के आदेश दिए। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की, लेकिन उसे बाद में खारिज कर डाला। इस पर शिकायतकर्ता ने प्रोटेस्ट पेटीशन डाल दी। इसी की सुनवाई के दौरान सीजेएम ने पुलिस के जांच अधिकारी के खिलाफ केस की स्टेटस रिपोर्ट देने से इंकार करने पर एसपी को कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

वहीं इस मामले में दिनोद गेट पुलिस चौकी प्रभारी एएसआई दशरथ का कहना है कि साल 2018 में पुलिस विभाग में लगे एक एसपीओ ने गाड़ी से संबंधित केस शहर थाना पुलिस में दर्ज कराया था। इस केस की फाइल तत्कालीन पुलिस अधीक्षक गंगाराम पूनिया ने विशाखापटनम भेज दी थी, क्योंकि शिकायतकर्ता का मामला यहां का न होकर विशाखापटनम का था। इस संबंध में वहां केस विचाराधीन चल रहा है। यहां केस को कैंसिल कर दिया था। मेरे से पहले छह अक्तूबर 2022 को मामले की तफ्तीश की गई थी। जिसके बाद इस मामले की फाइल मेरे पास पांच दिसंबर 2022 को आई थी। विशाखापटनम के पुलिस कमीशनर ने भी इस संबंध में पत्र जारी कर इस केस के वहां विचाराधीन होने की जानकारी देते हुए कार्रवाई अमल में लाने की बात कही थी। इसी आधार पर केस यहां कैंसिल हुआ था। मैने केस के संबंध में अपना पक्ष कोर्ट में रखा था, कोई गुस्ताखी नहीं की।

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