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पांच प्रतिशत तक बढ़ेगा इस बार गेहूं बिजाई का रकबा
ब्यूरो/अमर उजाला भिवानी
Updated Sun, 29 Nov 2015 01:02 AM IST
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चरखी दादरी। रबी की प्रमुख गेहूं की बिजाई का रकबा इस बार बढ़ने की पूरी उम्मीद है। पिछले वर्ष की तुलना में इस रबी सीजन में पांच प्रतिशत तक यह आंकड़ा बढ़ने के आसार बने हुए हैं। अक्तूबर अंतिम सप्ताह में हल्की बारिश से सरसों की बिजाई खराब होने पर अधिकतर किसानों ने सरसों की दोबारा बिजाई करना उचित नहीं समझा। इन किसानों ने अब गेहूं की बिजाई शुरू कर दी है। सरसों की दोबारा बिजाई के लिए समय निकल गया था।
दादरी व आस पास के क्षेत्र में रबी की फसलों में गेहूं की फसल के प्रति किसानों का अधिक रुझान शुरू से ही रहा है। इस क्षेत्र की जलवायु व मिट्टी गेहूं उत्पादन के लिए हमेशा अनुकूल रही है। गेहूं का यहां औसत पैदावार भी हर वर्ष बढ़िया रही है। अक्तूबर माह के अंत में मौसम में खराबी व हल्की बारिश की वजह से किसानों की करीब 15 हजार एकड़ में ताजा बिजित सरसों की फसल खराब हो गई थी और इससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान झेलना पड़ा था। कुछ किसानों ने तो दोबारा से सरसों की बिजाई कर दी, लेकिन अधिकतर किसानों ने सरसों की बजाय गेहूं की बिजाई करना ही उचित समझा। क्योंकि सरसों की बिजाई का अगेता समय किसान के हाथों से निकल गया था। पिछले रबी सीजन में 50 हजार एकड़ क्षेत्र में गेहूं की बिजाई हुई थी। इस बार यह आंकड़ा पांच प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में करीब ढाई हजार एकड़ तक गेहूं की बिजाई का रकबा बढ़ेगा।
25 नवंबर तक था अगेता समय
गेहूं की बिजाई का अगेता समय 25 नवंबर तक था। अब पछेती बिजाई का दौर शुरू हो गया है। पछेती बिजाई के तहत किसान धान के खाली खेतों में बिजाई कर रहे हैं। धान की फसल की देरी से कटाई हुई है। ऐसे में अब इस क्षेत्र में गेहूं की बिजाई करना ही किसानों के समक्ष विकल्प बचा है। किसान गेहूं की पछेती बिजाई का कार्य 25 दिसंबर तक निपटा सकते हैं। दिसंबर माह में बिजाई होने से प्रति एकड़ औसत पैदावार में गिरावट जरूर आएगी।
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वर्जन::::::
दिसंबर माह में बिजाई करते समय किसानों को बीज की मात्रा थोड़ी सी बढ़ानी होगी। क्योंकि ठंड बढ़ जाने पर प्रत्येक दाना अंकुरित नहीं हो पाता।
डॉ. कृष्ण कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग
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दादरी व आस पास के क्षेत्र में रबी की फसलों में गेहूं की फसल के प्रति किसानों का अधिक रुझान शुरू से ही रहा है। इस क्षेत्र की जलवायु व मिट्टी गेहूं उत्पादन के लिए हमेशा अनुकूल रही है। गेहूं का यहां औसत पैदावार भी हर वर्ष बढ़िया रही है। अक्तूबर माह के अंत में मौसम में खराबी व हल्की बारिश की वजह से किसानों की करीब 15 हजार एकड़ में ताजा बिजित सरसों की फसल खराब हो गई थी और इससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान झेलना पड़ा था। कुछ किसानों ने तो दोबारा से सरसों की बिजाई कर दी, लेकिन अधिकतर किसानों ने सरसों की बजाय गेहूं की बिजाई करना ही उचित समझा। क्योंकि सरसों की बिजाई का अगेता समय किसान के हाथों से निकल गया था। पिछले रबी सीजन में 50 हजार एकड़ क्षेत्र में गेहूं की बिजाई हुई थी। इस बार यह आंकड़ा पांच प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में करीब ढाई हजार एकड़ तक गेहूं की बिजाई का रकबा बढ़ेगा।
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25 नवंबर तक था अगेता समय
गेहूं की बिजाई का अगेता समय 25 नवंबर तक था। अब पछेती बिजाई का दौर शुरू हो गया है। पछेती बिजाई के तहत किसान धान के खाली खेतों में बिजाई कर रहे हैं। धान की फसल की देरी से कटाई हुई है। ऐसे में अब इस क्षेत्र में गेहूं की बिजाई करना ही किसानों के समक्ष विकल्प बचा है। किसान गेहूं की पछेती बिजाई का कार्य 25 दिसंबर तक निपटा सकते हैं। दिसंबर माह में बिजाई होने से प्रति एकड़ औसत पैदावार में गिरावट जरूर आएगी।
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वर्जन::::::
दिसंबर माह में बिजाई करते समय किसानों को बीज की मात्रा थोड़ी सी बढ़ानी होगी। क्योंकि ठंड बढ़ जाने पर प्रत्येक दाना अंकुरित नहीं हो पाता।
डॉ. कृष्ण कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग