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यारी भुजिया बनाने वाली फैक्टरी पर छापा

Sun, 05 Jan 2020 12:27 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jan 2020 12:27 AM IST
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bhujiya, company, factory
04 फोटो ढाणा रोड स्थित भुजिया फैक्ट्री में छापेमारी के दौरान कार्रवाई करते हुए कंपनी के अधिकारी। - फोटो : Bhiwani
ढाणा रोड पर भुजिया बनाने वाली एक फैक्टरी में शनिवार को तीस हजारी कोर्ट के निर्देश के बाद छापेमारी की गई। उत्तर प्रदेश की वीके होम सोल्यूशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने छापेमारी के निर्देश दिए थे। कॉपी राइट एक्ट और ट्रेड मार्क एक्ट की अवहेलना की शिकायत पर छापेमारी की गई। छापेमारी के दौरान सामने आया कि यहां एक साल पहले ही उक्त भुजिया की पैकिंग बंद कर दी है। वहीं शिकायतकर्ता कंपनी का कहना है कि मार्केट में अभी भी उक्त नकली पैकिंग की भुजिया बिक रही है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि पैकिंग पर कोई निर्माण तिथि नहीं है जबकि कंपनी अधिकारियों का कहना था कि तीन महीने बाद पैकिंग की भुजिया खराब हो जाती है।
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शनिवार दोपहर करीब ढाई बजे जैन चौक पुलिस को साथ लेकर तीस हजारी कोर्ट के प्रतिनिधि और वीके होम सोल्यूशन प्राइवेट लि. के पदाधिकारी, सदस्यों ने छापेमारी की। जब टीम फैक्टरी में पहुंची तो तीन महिलाएं मूंगफली की पैकिंग कर रही थी। भुजिया कुछ थैलियों में बंद थी। अलग-अलग कंपनियों के एक सौ किलो रैपर बरामद हुए। टीम के सदस्यों ने वहां हरेक चीज के फोटो लिए और फैक्टरी संचालक के बयान दर्ज किए।
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वीके होम सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के अधिकृत अधिकारी मोहित अग्रवाल ने बताया कि उनकी कंपनी परी नाम से नमकीन भुजिया बनाती है। उनके पास शिकायत थी कि उनके जैसे ही पैकेट में ही नाम मामूली बदलकर मार्केट में भुजिया भेजी जा रही है। जो डुप्लीकेट है, वह निम्न क्वालिटी की है। जिस कारण उनकी छवि धूमिल हो रही है और लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। दादरी में एक बच्चे की तबीयत भी बिगड़ गई थी। उन्होंने अपने स्तर पर जांच की तो मार्केट में यारी नामक से भुजिया प्रोडक्ट बेचा जा रहा है। जबकि पैकिंग लुक पूरी तरह उनकी पैकिंग लुक के जैसे ही है। जिस पर उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कोर्ट के निर्देश पर ही यह छापेमारी हुई है। यहां संचालक नीरज तो नहीं है मगर उनके पिता अनिल कुमार और भाई सचिन है जो कि बता रहे हैं कि एक साल पहले ही उक्त नाम से भुजिया की पैकिंग बंद कर चुके हैं, जबकि मार्केट में इसी नाम से भुजिया बिक रही है।
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अनेक कंपनियां कर रही लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़
यारी भुजिया के पैकेट पर न निर्माण तिथि है और न ही एक्सपायरी तिथि। कंपनी अधिकारी मोहित अग्रवाल ने बताया कि पैकिंग भुजिया तीन महीने बाद खराब हो जाती है। ऐसे में अनेक कंपनियां ऐसी है जो खाद्य सामग्री की पैकिंग पर न निर्माण तिथि देती है और न ही एक्सपायरी। जिससे लोगों खासकर बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। बीते दिनों दादरी में एक बच्चे की तबीयत भी भुजिया खाने से बिगड़ गई थी। बीते दिसंबर माह में वहां छापेमारी भी हुई थी।
हमारी परी भुजिया के नाम से भुजिया पैकिंग है। यहां यारी भुजिया के नाम से पैकिंग कर बेची जा रही है। लोगो, पैकिंग डिजाइन सब हमारी पैकिंग की तरह है। इसी की कोर्ट में शिकायत की थी। जिस पर यह कार्रवाई हुई। संचालक भले ही कह रहे हैं कि एक साल से उन्होंने यह पैकिंग नही की है, मगर मार्केट में इसी पैकिंग की भुजिया बेची जा रही है। पैकिंग पर निर्माण तिथि और एक्सपायरी तिथि भी नहीं है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है।

- मोहित अग्रवाल, पदाधिकारी, वीके होम सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी
हमारे यहां टीम ने छापेमारी की थी मगर उन्हें कुछ नहीं मिला क्योंकि हम कुछ गलत नहीं कर रहे। यारी भुजिया की पैकिंग एक साल पहले ही बंद कर चुके हैं, जब कंपनी ने आपत्ति जताई थी। अब मार्केट में जो माल है, उसकी हमें कोई जानकारी नहीं है कि किसका है, कहां से आ रहा है।
- अनिल कुमार, फैक्टरी संचालक
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