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भिवानी और चरखी दादरी में 34 गायों की मौत, 40 की हालत गंभीर

Sun, 02 Oct 2016 12:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 02 Oct 2016 12:59 AM IST
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गाय - फोटो : अमर उजाला
भिवानी व चरखी दादरी में गायों के लिए आस्था एक बार फिर जानलेवा साबित हुई। अमावस्या के दिन खीर और पूरी खाने से भिवानी में 20 जबकि चरखी दादरी में 14 गायों की मौत हो गई। 40 अन्य जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है। उनका गोशाला में उपचार चल रहा है। एक सांड़ की भी मौत हुई। भिवानी में 20 गायों की मौत से गुस्साए गोसेवकों ने रोहतक गेट चौक पर सड़क किनारे गायों के शव रख रोष जताया। बाद में प्रशासन की तरफ से पहुंचे एसडीएम ने गोसेवकों को भविष्य में इस तरह के बारे में पहले ही अलर्ट रहने का आश्वासन दिया। नगर परिषद और गोसेवकों ने सभी मृत गायों के शवों को रोहतक रोड पर दफनाया।
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शुक्रवार को अमावस्या थी और लोगों ने अपने पितरों को खुश करने के लिए घरों में हलवा, खीर, पूरी बनाई। पहला भोग गाय को लगाया जाता है तो लोगों ने आस्था के नाम पर गायों को खूब खीर-पूरी, हलवा खिलाया। गो सेवक व पशुपालन विभाग की टीम दिनभर शहर में इसी के लिए जागरूकता अभियान चलाती थी और गायों को जांचती रही। इसके बावजूद रात को 20 गायों की मौत हो गई। 60 गाय गंभीर पायी गई थी। बाकी 40 अब भी जिंदगी-मौत के बीच जूझ रही है। महम रोड स्थित गोशाला में उपचार चल रहा है।
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गायों की मौत से खफा गोसेवक सभी मृत गायों के शवों को लेकर रोहतक गेट चौक पहुंचे। यहां सड़क किनारे शव रखकर रोष जताया। साथ ही गायों की मौत के लिए आरोपी लोगों पर मुकदमे दर्ज करने की मांग की। कार्रवाई नहीं होने तक शवों को नहीं उठाने की बात कही। दोपहर के समय एसडीएम सतपाल सिंह गोसेवकों के पास पहुंचे और आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को लेकर प्रशासन पहले ही जागरूकता कार्यक्रम चलाएगा। एसडीएम ने नप कर्मचारियों से गायों को दफनाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।
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गोसेवक संजय परमार ने बताया कि पिछले तीन दिन से लोगों को जागरूक किया जा रहा था कि गायों को खीर-पूरी न खिलाएं। इसके बाद भी लोग नहीं माने और आस्था के नाम पर पाप किया। हमारी टीम के सदस्य अमावस्या के दिन भी शहर में घूमते रहे और जो गाय बीमार दिखी उसका इलाज किया।

डाक्टरों की टीम करती रही गायों का इलाज
महम रोड स्थित गोशाला में 49 गायों को गंभीर हालत में उपचार के लिए ले जाया गया। यहां उपचार के दौरान आठ गायों की मौत हो गई जबकि 13 की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है जबकि 28 गाय खतरे से बाहर है। यहां पशु पालन विभाग से डा. विजय सनसनवाल, डा. जयपाल, डा. संदीप सहरावत ने गायों का इलाज किया। वीएलडीए मोहनलाल व राजेश पंघाल ने भी चिकित्सीय टीम की मदद की।

पिछले साल मरी थी 23 गाय
हर साल अमावस्या के लिए लोगों की आस्था के नाम पर गाय अपनी जान गंवाती है। इस बार 20 गायों की मौत हुई है तो पिछले वर्ष अकेले भिवानी शहर में 23 गायों की मौत हुई थी। जिलेभर में यह आंकड़ा 38 था। हर साल गाय अपनी जान गंवा रही है और लोग इन बातों की जानकारी होने के बावजूद ये पाप कर रहे है।


एसिडोसिस और गैस बनती है मौत का कारण
खीर-पूरी खाने से गायों के पेट में एसिडोसिस एसिड बनती है। यह ब्लड में चला जाता है। गैस बनती है और पशु में अफारे की समस्या होती है। गैस निकल नहीं पाती। अफारे के कारण गाय को सांस लेने में समस्या होती है और इसी कारण गाय अपनी जान गंवा बैठती है। खीर-पूरी ही नहीं ज्यादा मात्रा में रोटी खाने से भी यह समस्या होती है।
 
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