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सामाजिक सद्भावना की मिसाल बनी भात रस्म
ब्यूरो अमर उजाला
Updated Sat, 02 Apr 2016 12:36 AM IST
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रस्म
- फोटो : अमर उजाला
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जाट आरक्षण दंगों के बाद सामाजिक सौहार्द को लेकर बेशक सवाल उठ रहे हैं। लेकिन, सद्भावना हमारा मूल स्वभाव है, इसका उदाहरण तोशाम में देखने को मिला। भाई न होने के बावजूद तोशाम एक बेटी का पूरा मोहल्ला भाई बन गया और सभी ने मिलकर भात का सामान एकत्र किया। मोहल्ले की सभी बिरादरियों के लोग भाती बनकर शुक्रवार सुबह नाथुसरी चौपटा (सिरसा) के लिए रवाना हुए।
भले ही सुमन को सगा भाई न होने का मलाल रहा हो, लेकिन उसके भाईचारे ने उसके भाई न होने की कमी पूरी कर दी। सुमन ने अपने मायके में गली के भाईचारे में अपनी दो बेटियों के शादी के लिए भात का न्यौता दिया। इस पर कस्बावासियों ने सामूहिक रूप से भात की रस्म अदा करके नई मिसाल पेश की। बता दें कि तोशाम निवासी सुमन अपनी पिता की इकलौती संतान है। उनकी ससुराल जिला सिरसा के कस्बा नाथूसरी चौपटा है। सुमन की दो बेटियां हैं। दोनों बेटियों की शादी एक अप्रैल को निर्धारित हुई। भाई न होने पर सुमन का दिल एक बार तो भर आया लेकिन फिर से अपने मोहल्ले के भाईचारे की याद आई और वह फौरन भात न्योतने चली आई। उसने वार्ड नंबर 15 की गली में अपनी बेेटियों की शादी का न्योता दिया। न्योता मिलने पर सभी ने विचार विमर्श किया और भात भरने के लिए रुपए व अन्य सामग्री एकत्रित करने लगे। किसी ने 1100 रुपये दिए तो किसी ने साड़ी व अन्य सामान। देखते ही देखते मोहल्ले व कस्बावासी भी भात भरने में अपना हाथ बांटने लगे और श्रद्धा स्वरूप समान दान दिया। भात के रूप में 34 हजार रुपए एकत्रित हो गए। सामान देने में महिलाओं की विशेष भूमिका रही। कस्बा निवासी सेठ प्रीतम, रामचंद्र मिस्त्री, बिजेंद्र जैन और अशोक जैन ने बताया कि वैसे भी कन्यादान से बड़ा कोई धर्म नहीं होता है। यह एक अच्छी परंपरा है।
यह दिया भात के रूप में सामान
कस्बावासियों की तरफ से भात के रूप में 34 हजार रुपये के अलावा 120 सूट, 40 साड़ी, चार गर्म चद्दर, दो दरी, दो खेस, दो बैडसीट, दो कंबल, दो तकिये, दो पंखे, दो मेज, चार कुर्सी, 122 बर्तन, 35 पेंट शर्ट, छह साड़ी दो पीतल की टोकनी एकत्रित हुई।
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अन्य सामान के अलावा भात के लिए दो जोड़ी पाजेब, दो जोड़ी चुटकी, नाक की दो जोड़ी तिल्ली, सुमन के गले की तबीजी दान के रूप में दी गई। प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा लिए गए निर्णय के अनुरूप 34 हजार रुपए में से 21 हजार रुपए भात के रूप में थाली में डाले गए। इसके अलावा दोनों लड़कियों को 1100-1100 रुपए कन्यादान तथा पांच हजार रुपए सुमन को अलग से दिए गए। शेष राशि भात की रश्म के दौरान गौशाला, चौपाल व मंदिर आदि रश्मों-रिवाज के लिए दी गई।
उसे सगा भाई न होने का मलाल तो जरूर रहा है, लेकिन उनके भाईचारे ने उसको दूर कर दिया। भात की ऐसी रस्म अदा होगी, उसे इसका अंदाजा ही नहीं था।
सुमन
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भले ही सुमन को सगा भाई न होने का मलाल रहा हो, लेकिन उसके भाईचारे ने उसके भाई न होने की कमी पूरी कर दी। सुमन ने अपने मायके में गली के भाईचारे में अपनी दो बेटियों के शादी के लिए भात का न्यौता दिया। इस पर कस्बावासियों ने सामूहिक रूप से भात की रस्म अदा करके नई मिसाल पेश की। बता दें कि तोशाम निवासी सुमन अपनी पिता की इकलौती संतान है। उनकी ससुराल जिला सिरसा के कस्बा नाथूसरी चौपटा है। सुमन की दो बेटियां हैं। दोनों बेटियों की शादी एक अप्रैल को निर्धारित हुई। भाई न होने पर सुमन का दिल एक बार तो भर आया लेकिन फिर से अपने मोहल्ले के भाईचारे की याद आई और वह फौरन भात न्योतने चली आई। उसने वार्ड नंबर 15 की गली में अपनी बेेटियों की शादी का न्योता दिया। न्योता मिलने पर सभी ने विचार विमर्श किया और भात भरने के लिए रुपए व अन्य सामग्री एकत्रित करने लगे। किसी ने 1100 रुपये दिए तो किसी ने साड़ी व अन्य सामान। देखते ही देखते मोहल्ले व कस्बावासी भी भात भरने में अपना हाथ बांटने लगे और श्रद्धा स्वरूप समान दान दिया। भात के रूप में 34 हजार रुपए एकत्रित हो गए। सामान देने में महिलाओं की विशेष भूमिका रही। कस्बा निवासी सेठ प्रीतम, रामचंद्र मिस्त्री, बिजेंद्र जैन और अशोक जैन ने बताया कि वैसे भी कन्यादान से बड़ा कोई धर्म नहीं होता है। यह एक अच्छी परंपरा है।
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यह दिया भात के रूप में सामान
कस्बावासियों की तरफ से भात के रूप में 34 हजार रुपये के अलावा 120 सूट, 40 साड़ी, चार गर्म चद्दर, दो दरी, दो खेस, दो बैडसीट, दो कंबल, दो तकिये, दो पंखे, दो मेज, चार कुर्सी, 122 बर्तन, 35 पेंट शर्ट, छह साड़ी दो पीतल की टोकनी एकत्रित हुई।
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अन्य सामान के अलावा भात के लिए दो जोड़ी पाजेब, दो जोड़ी चुटकी, नाक की दो जोड़ी तिल्ली, सुमन के गले की तबीजी दान के रूप में दी गई। प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा लिए गए निर्णय के अनुरूप 34 हजार रुपए में से 21 हजार रुपए भात के रूप में थाली में डाले गए। इसके अलावा दोनों लड़कियों को 1100-1100 रुपए कन्यादान तथा पांच हजार रुपए सुमन को अलग से दिए गए। शेष राशि भात की रश्म के दौरान गौशाला, चौपाल व मंदिर आदि रश्मों-रिवाज के लिए दी गई।
उसे सगा भाई न होने का मलाल तो जरूर रहा है, लेकिन उनके भाईचारे ने उसको दूर कर दिया। भात की ऐसी रस्म अदा होगी, उसे इसका अंदाजा ही नहीं था।
सुमन