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महज 29 गैर ऋणी किसानों ने करवाया फसल बीमा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 10 Sep 2016 01:08 AM IST
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भिवानी में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को सिरे चढ़ाने को लेकर केंद्र व राज्य सरकार की भरसक प्रयास भी किसानों को रूझान नहीं पा सके। जिले में विभिन्न बैंकों की ओर से यूं तो हजारों किसानों की फसलों का बीमा किया गया है, लेकिन चौंकाने वाले तथ्य यह है कि इनमें से केवल 29 गैर-ऋणी किसानों ने अपनी फसलों का बीमा कराया। जो कुल प्रतिशत में लगभग 0.5 (आधा प्रतिशत) भी नहीं है। सभी बैंकों की रिपोर्ट के मुताबिक जिले के विभिन्न खंडों में 72,026 किसानों की खरीफ फसलों को बीमा किया गया है। इनमें से 29 किसानों को छोड़ दिया जाए, तो बाकी सभी किसान बैंकों के कर्जदार है। हर किसान केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) स्कीम के माध्यम से बैंकों के ऋणी है। फसल बीमा योजना के अंतर्गत बैंकों ने किसानों के उन फसलों का बीमा कर दिया जो उन्होंने केसीसी का लाभ उठाने के दौरान दर्शाई थी। चाहे खेत में कोई ओर फसल लहलहा रही हो। हालांकि कुछ किसानों के बैंक में सही फसल की जानकारी देने पर उन्हीं फसलों का बीमा किया गया।
क्या है फसल बीमा योजना:
मौसम के जोखिम से बचाने व खेती को लाभप्रद बनाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से फसल बीमा योजना चलाई गई है। इसके लिए निजी कंपनियों को अधिकृत किया गया है। बीमा योजना सभी किसानों के लिए अनिवार्य है, लेकिन अग्रणी किसान (बटाईदार व कास्तकार) के लिए स्वैच्छिक है। फसल जोखिम को चार भागों में बांटा गया है। यदि फसल कम वर्षा व प्रतिकूल मौसम होने के कारण नहीं रोपी गई हो, तो अधिकृत कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर किसानों को बीमा योजना का लाभ मिलेगा। वहीं खड़ी फसल से लेकर कटाई तक सूखा, बाढ़, बीमारी व अन्य प्राकृतिक कारणों से नष्ट होने पर भी योजना का लाभ दिया जाएगा। कटाई के दो सप्ताह बाद बरसात आदि के कारण होने वाले नुकसान का लाभ व ओलावृष्टि, भूस्खलन से होने वाले नुकसान को भी योजना में शामिल किया गया है।
क्यों हो रहा विरोध
- फसल बीमा योजना में जीरी, कपास, मक्का व बाजरा को शामिल किया है। ज्यादा नुकसान होने की संभावना वाली ग्वार, दलहन, फल, सब्जियों को शामिल नहीं किया गया।
- बीमा के लिए प्रति एकड़ प्रीमियम राशि जमा कराई जाएगी, जबकि बीमा का लाभ पूरे गांव को यूनिट मानकर आवंटित होगा।
- शीत लहर, पाला, गर्मी, बिजली, आग से होने वाले नुकसान को योजना के लाभान्वित श्रेणी में नहीं रखा गया।
- चार दिशाओं से पैमाइश के आधार पर फसल के उत्पादन का आंकलन किसानों के विरोध का कारण बना हुआ है।
फसल बीमा योजना में किसानों के हित को नहीं देखा गया। प्रति एकड़ यूनिट बनाने की बजाए पूरे गांव को एक यूनिट माना गया है। शीत लहर, पाला, आगजनी होने पर फसल का मुआवजा नहीं मिल पाएगा। योजना बनाने में किसानों को कोई नुमाइंदा शामिल नहीं किया।
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मास्टर शेर सिंह, प्रदेश प्रधान, अखिल भारतीय किसान सभा
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत जिले में लगभग 72 हजार किसानों की फसलों का बीमा किया गया। हालांकि पूरी जानकारी न होने के कारण गैर-ऋणी किसानों की संख्या 29 तक ही सीमित रही। आगामी सीजन की फसलों के बीमा करवाने पर सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।
कुलजीत, एलडीएम, भिवानी
क्या है फसल बीमा योजना:
मौसम के जोखिम से बचाने व खेती को लाभप्रद बनाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से फसल बीमा योजना चलाई गई है। इसके लिए निजी कंपनियों को अधिकृत किया गया है। बीमा योजना सभी किसानों के लिए अनिवार्य है, लेकिन अग्रणी किसान (बटाईदार व कास्तकार) के लिए स्वैच्छिक है। फसल जोखिम को चार भागों में बांटा गया है। यदि फसल कम वर्षा व प्रतिकूल मौसम होने के कारण नहीं रोपी गई हो, तो अधिकृत कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर किसानों को बीमा योजना का लाभ मिलेगा। वहीं खड़ी फसल से लेकर कटाई तक सूखा, बाढ़, बीमारी व अन्य प्राकृतिक कारणों से नष्ट होने पर भी योजना का लाभ दिया जाएगा। कटाई के दो सप्ताह बाद बरसात आदि के कारण होने वाले नुकसान का लाभ व ओलावृष्टि, भूस्खलन से होने वाले नुकसान को भी योजना में शामिल किया गया है।
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क्यों हो रहा विरोध
- फसल बीमा योजना में जीरी, कपास, मक्का व बाजरा को शामिल किया है। ज्यादा नुकसान होने की संभावना वाली ग्वार, दलहन, फल, सब्जियों को शामिल नहीं किया गया।
- बीमा के लिए प्रति एकड़ प्रीमियम राशि जमा कराई जाएगी, जबकि बीमा का लाभ पूरे गांव को यूनिट मानकर आवंटित होगा।
- शीत लहर, पाला, गर्मी, बिजली, आग से होने वाले नुकसान को योजना के लाभान्वित श्रेणी में नहीं रखा गया।
- चार दिशाओं से पैमाइश के आधार पर फसल के उत्पादन का आंकलन किसानों के विरोध का कारण बना हुआ है।
फसल बीमा योजना में किसानों के हित को नहीं देखा गया। प्रति एकड़ यूनिट बनाने की बजाए पूरे गांव को एक यूनिट माना गया है। शीत लहर, पाला, आगजनी होने पर फसल का मुआवजा नहीं मिल पाएगा। योजना बनाने में किसानों को कोई नुमाइंदा शामिल नहीं किया।
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मास्टर शेर सिंह, प्रदेश प्रधान, अखिल भारतीय किसान सभा
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत जिले में लगभग 72 हजार किसानों की फसलों का बीमा किया गया। हालांकि पूरी जानकारी न होने के कारण गैर-ऋणी किसानों की संख्या 29 तक ही सीमित रही। आगामी सीजन की फसलों के बीमा करवाने पर सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।
कुलजीत, एलडीएम, भिवानी