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अधिकतर स्वास्थ्य केंद्रों और स्कूलों में पीने लायक नहीं पानी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 16 Jul 2016 12:51 AM IST
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Drinking water
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भिवानी में स्कूलों में जर्जर टंकी का पानी बच्चे पी रहे है तो सीएचसी-पीएचसी में भी मरीज खस्ताहाल टंकियों का पानी पी रहे है। महिला डिलीवरी रूम में गंदगी ही गंदगी है तो इमरजेंसी और जमालपुर स्वास्थ्य केंद्र में एक्सपायरी दवाइयां है।
सीएम के प्रधान सचिव डा. राकेश गुप्ता की स्पेशल टीम के चार दिन के औचक निरीक्षण के बाद रिपोर्ट में स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों में बदइंतजामी सामने आई। खामियों को टीम ने कल शाम प्रोजेक्टर के माध्यम से विभागीय अधिकारियों को बताया गया। रिपोर्ट डीसी व विभागों के अधिकारियों के समक्ष रखी गई। अब यह रिपोर्ट चंडीगढ़ में उच्च अधिकारियों के समक्ष रखी जाएगी।
सीएम के अतिरिक्त प्रधान सचिव डा. राकेश गुप्ता की ओर से भेजी दो सदस्यीय स्पेशल टीम के सदस्यों डॉ. सुनिधि और डॉ. रोहित ढाका ने 11 से 14 जुलाई तक जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। साथ ही स्कूलों में भी निरीक्षण किया। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के तहत टीम ने छापेमारी की और अव्यवस्थाओं की प्रोजेक्टर रिपोर्ट तैयार की।
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बृहस्पतिवार सायं डीआरडीए हॉल में उपायुक्त पंकज कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में अधिकारियों के समक्ष टीम ने अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट पेश की और विभागों की पोल खोली। टीम ने भिवानी शहर, दादरी, जमालपुर, तोशाम व सिवानी के आंगनवाड़ी केंद्र, सामान्य अस्पताल भिववनी, बवानीखेड़ा, दादरी, सिवानी, मिरान, तोशाम, जमालपुर व भिवानी सेक्टर 13 डिस्पेंसरी, झोझू कलां, भिवानी, जमालपुर व पालुवास के राजकीय विद्यालय और गांव खरकड़ी सोहान, झोझू कलां, झावरी व दुल्हेड़ी के घरों में बनाए जा रहे शौचालयों का निरीक्षण किया। प्रोजेक्ट रिपोर्ट के बाद उपायुक्त ने सभी खामियां दूर करने के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए। बैठक में एसीयूटी प्रशांत पंवार, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी मोनिका खन्ना, डीईआ सुरेश शर्मा, डा. कृष्ण कुमार, डा. उमेद सिंह दिसौदिया आदि मौजूद रहे।
इमरजेंसी में एक्सपायर दवाई, नदारद मिला स्टाफ
चार दिवसीय निरीक्षण के दौरान टीम को अनेक खामियां मिली। जिनमें सबसे अहम भिवानी सामान्य अस्पताल की इमरजेंसी और जमालपुर स्वास्थ्य केंद्र में एक्सपायर दवाइयां मिलना है। इनके अलावा लगभग सभी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों के लेबर रूम खराब मिले। कुछ स्वास्थ्य केंद्रों पर डाक्टर ही नहीं थे तो झोझू स्वास्थ्य केंद्र और सेक्टर 13 डिस्पेंसरी का भवन खस्ताहाल था। लगभग सभी स्वास्थ्य केंद्रों और स्कूलों में पानी पीने लायक नहीं था। स्वच्छता की बात की जाए तो हर जगह ही गंदगी मिली। स्टाफ की कमी की भी रिपोर्ट दी गई। जहां चार डाक्टरों की जरूरत वहां महज एक ही मिला। नर्सिंग स्टाफ भी कम था।
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सीएम के प्रधान सचिव डा. राकेश गुप्ता की स्पेशल टीम के चार दिन के औचक निरीक्षण के बाद रिपोर्ट में स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों में बदइंतजामी सामने आई। खामियों को टीम ने कल शाम प्रोजेक्टर के माध्यम से विभागीय अधिकारियों को बताया गया। रिपोर्ट डीसी व विभागों के अधिकारियों के समक्ष रखी गई। अब यह रिपोर्ट चंडीगढ़ में उच्च अधिकारियों के समक्ष रखी जाएगी।
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सीएम के अतिरिक्त प्रधान सचिव डा. राकेश गुप्ता की ओर से भेजी दो सदस्यीय स्पेशल टीम के सदस्यों डॉ. सुनिधि और डॉ. रोहित ढाका ने 11 से 14 जुलाई तक जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। साथ ही स्कूलों में भी निरीक्षण किया। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के तहत टीम ने छापेमारी की और अव्यवस्थाओं की प्रोजेक्टर रिपोर्ट तैयार की।
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बृहस्पतिवार सायं डीआरडीए हॉल में उपायुक्त पंकज कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में अधिकारियों के समक्ष टीम ने अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट पेश की और विभागों की पोल खोली। टीम ने भिवानी शहर, दादरी, जमालपुर, तोशाम व सिवानी के आंगनवाड़ी केंद्र, सामान्य अस्पताल भिववनी, बवानीखेड़ा, दादरी, सिवानी, मिरान, तोशाम, जमालपुर व भिवानी सेक्टर 13 डिस्पेंसरी, झोझू कलां, भिवानी, जमालपुर व पालुवास के राजकीय विद्यालय और गांव खरकड़ी सोहान, झोझू कलां, झावरी व दुल्हेड़ी के घरों में बनाए जा रहे शौचालयों का निरीक्षण किया। प्रोजेक्ट रिपोर्ट के बाद उपायुक्त ने सभी खामियां दूर करने के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए। बैठक में एसीयूटी प्रशांत पंवार, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी मोनिका खन्ना, डीईआ सुरेश शर्मा, डा. कृष्ण कुमार, डा. उमेद सिंह दिसौदिया आदि मौजूद रहे।
इमरजेंसी में एक्सपायर दवाई, नदारद मिला स्टाफ
चार दिवसीय निरीक्षण के दौरान टीम को अनेक खामियां मिली। जिनमें सबसे अहम भिवानी सामान्य अस्पताल की इमरजेंसी और जमालपुर स्वास्थ्य केंद्र में एक्सपायर दवाइयां मिलना है। इनके अलावा लगभग सभी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों के लेबर रूम खराब मिले। कुछ स्वास्थ्य केंद्रों पर डाक्टर ही नहीं थे तो झोझू स्वास्थ्य केंद्र और सेक्टर 13 डिस्पेंसरी का भवन खस्ताहाल था। लगभग सभी स्वास्थ्य केंद्रों और स्कूलों में पानी पीने लायक नहीं था। स्वच्छता की बात की जाए तो हर जगह ही गंदगी मिली। स्टाफ की कमी की भी रिपोर्ट दी गई। जहां चार डाक्टरों की जरूरत वहां महज एक ही मिला। नर्सिंग स्टाफ भी कम था।