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जमीन पर लेटकर किया कर्मचारियों का इंतजार
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Sat, 09 Apr 2016 12:43 AM IST
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इंतजार
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सामान्य अस्पताल में मरीजों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही। शुक्रवार को भी मरीज ड्रेसिंग रूम के बाहर कराहते रहे मगर कर्मचारी नहीं आया। करीब चार घंटे के इंतजार के बाद कर्मचारी पहुंचा और पट्टियां की गई।
सामान्य अस्पताल के ड्रेसिंग रूम में पट्टियां करवाना, प्लास्टर करवाना मरीजों के लिए परेशानी बना हुआ है। पिछले कुछ दिनों से मरीजों को चार-चार घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। ड्रेसिंग रूम में अधिकतर फ्रेक्चर वाले केस जाते है, ऐसे में दर्द कराहते मरीजों को फर्श पर बैठकर ही मरीजों का इंतजार करना पड़ रहा है। यहां नियुक्त कर्मचारी की वार्डों में भी ड्यूटी है। जिस कारण वह वार्ड ड्यूटी करने के बाद दोपहर एक बजे के बाद ही आता है। तब तक मरीज परेशान रहते है। अधिकतर तो इंतजार में बिना इलाज के ही लौट जाते है।
सुबह साढ़े नौ बजे आया था, अब तक कर रहा हूं इंतजार
एक्सीडेंट के कारण पांव में फ्रेक्चर आया। अब प्लास्टर करवाने के लिए आया था। सुबह साढ़े नौ बजे ही अस्पताल पहुंच गया था मगर यहां कोई कर्मचारी ही नहीं है। आसपास पता किया मगर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रहा। दोपहर सवा एक बजे कर्मचारी आया तो प्लास्टर हुआ।
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नरेंद्र कुमार, मानान पाना
35 दिन की पोती खुशी का पांव थोड़ा टेढ़ा है। जिस कारण प्लास्टर किया जाता है। सुबह आए थे बच्ची को लेकर मगर यहां कर्मचारी ही नहीं है। अन्य कर्मचारी बता रहे है कि कर्मचारी आएंगे मगर ये नहीं पता कब। बच्ची बार-बार रो रही है।
बुजुर्ग महिला, गांव मांढी
हाथ में फ्रेक्चर आया हुआ है। यहां प्लास्टर करवाना है मगर ड्रेसिंग में कोई कर्मचारी नहीं। यहां बैठने के लिए भी जगह नहीं है।
परम लाल, विद्यानगर
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सामान्य अस्पताल के ड्रेसिंग रूम में पट्टियां करवाना, प्लास्टर करवाना मरीजों के लिए परेशानी बना हुआ है। पिछले कुछ दिनों से मरीजों को चार-चार घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। ड्रेसिंग रूम में अधिकतर फ्रेक्चर वाले केस जाते है, ऐसे में दर्द कराहते मरीजों को फर्श पर बैठकर ही मरीजों का इंतजार करना पड़ रहा है। यहां नियुक्त कर्मचारी की वार्डों में भी ड्यूटी है। जिस कारण वह वार्ड ड्यूटी करने के बाद दोपहर एक बजे के बाद ही आता है। तब तक मरीज परेशान रहते है। अधिकतर तो इंतजार में बिना इलाज के ही लौट जाते है।
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सुबह साढ़े नौ बजे आया था, अब तक कर रहा हूं इंतजार
एक्सीडेंट के कारण पांव में फ्रेक्चर आया। अब प्लास्टर करवाने के लिए आया था। सुबह साढ़े नौ बजे ही अस्पताल पहुंच गया था मगर यहां कोई कर्मचारी ही नहीं है। आसपास पता किया मगर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रहा। दोपहर सवा एक बजे कर्मचारी आया तो प्लास्टर हुआ।
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नरेंद्र कुमार, मानान पाना
35 दिन की पोती खुशी का पांव थोड़ा टेढ़ा है। जिस कारण प्लास्टर किया जाता है। सुबह आए थे बच्ची को लेकर मगर यहां कर्मचारी ही नहीं है। अन्य कर्मचारी बता रहे है कि कर्मचारी आएंगे मगर ये नहीं पता कब। बच्ची बार-बार रो रही है।
बुजुर्ग महिला, गांव मांढी
हाथ में फ्रेक्चर आया हुआ है। यहां प्लास्टर करवाना है मगर ड्रेसिंग में कोई कर्मचारी नहीं। यहां बैठने के लिए भी जगह नहीं है।
परम लाल, विद्यानगर