{"_id":"57bdf80a4f1c1b8711d4f663","slug":"bhiwani-news-father-distance-medal","type":"story","status":"publish","title_hn":"पिता के अखाड़े से बनी दूरी ने पदक से किया वंचित ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पिता के अखाड़े से बनी दूरी ने पदक से किया वंचित
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 25 Aug 2016 01:09 AM IST
विज्ञापन
पहलवान बबीता
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अंतरराष्ट्रीय पहलवान बबीता फौगाट नेओलंपिक में पदक न आने का कारण अपने पिता और निजी कोच महावीर से दूरी को बताया है। यही नहीं बबीता ने राष्ट्रीय कैंपों में मिलने वाले खाने पर एतराज जताया है। उधर बबीता के पिता महावीर ने राष्ट्रीय कैंपों के लिए बनाई गई नीति में भी सरकार से बदलाव करने की मांग की है।
बबीता फौगाट मंगलवार देर रात अपने गांव बलाली पहुंची। उधर बबीता की चचेेरी बहन विनेश चोट के कारण घर की बजाय सीधी मुंबई इलाज करवाने चली गई। इस दौरान अमर उजाला से बातचीत में महावीर और बबीता ने कहा है कि राष्ट्रीय कैंपों में अगर खिलाड़ी के निजी कोच को भी शामिल करने का प्रावधान किया जाएं तो नतीजे सही मायनों में ही कुछ और होंगे। क्योंकि निजी कोच को खिलाड़ी की हर बारिक से बारिक कमजोरी पता होती है। जबकि राष्ट्रीय कैंपों में उन्हें नए गुर व दांव-पेंच तो सिखाएं जाते हैं मगर उनकी बारिक कमियों की तरफ ध्यान नहीं दिया जाता। यहीं कारण है कि नया सीखने के चक्कर में छोटी-छोटी कमियां भी बड़ी बन जाती है तो इसका नुकसान बाद में खिलाड़ी के साथ-साथ देश को उठाना पड़ता है। बबीता की हार का कारण भी ये ही रहा।
ना भैंस का दूध मिल्या, ना घर बरगी खुराक
महावीर पहलवान राष्ट्रीय कैंप की डाइट से भी नाखुश नजर आए। हरियाणवी लहजे में महावीर ने कहा कि एक पहलवान का थैलियां के दूध त्य के होवे है..जब तयी घी में आंगली तर ना हो ज्या रोटी खान का भी के मजा? बबीता ने पाछले एक साल त्य थैलियां का दूध ए पीया स्य..कैंप में ना घर बरगी डाइट मिल्यी। इस बात का भी अगर मेन कोच ध्यान रखें तो खिलाड़ियों की सेहत पर भी अच्छा प्रभाव पड़ेगा। महावीर फौगाट ने सरकार से अपने अखाड़े के लिए कुश्ती मैट मुहैया करवाने की मांग की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बबीता फौगाट मंगलवार देर रात अपने गांव बलाली पहुंची। उधर बबीता की चचेेरी बहन विनेश चोट के कारण घर की बजाय सीधी मुंबई इलाज करवाने चली गई। इस दौरान अमर उजाला से बातचीत में महावीर और बबीता ने कहा है कि राष्ट्रीय कैंपों में अगर खिलाड़ी के निजी कोच को भी शामिल करने का प्रावधान किया जाएं तो नतीजे सही मायनों में ही कुछ और होंगे। क्योंकि निजी कोच को खिलाड़ी की हर बारिक से बारिक कमजोरी पता होती है। जबकि राष्ट्रीय कैंपों में उन्हें नए गुर व दांव-पेंच तो सिखाएं जाते हैं मगर उनकी बारिक कमियों की तरफ ध्यान नहीं दिया जाता। यहीं कारण है कि नया सीखने के चक्कर में छोटी-छोटी कमियां भी बड़ी बन जाती है तो इसका नुकसान बाद में खिलाड़ी के साथ-साथ देश को उठाना पड़ता है। बबीता की हार का कारण भी ये ही रहा।
विज्ञापन
ना भैंस का दूध मिल्या, ना घर बरगी खुराक
महावीर पहलवान राष्ट्रीय कैंप की डाइट से भी नाखुश नजर आए। हरियाणवी लहजे में महावीर ने कहा कि एक पहलवान का थैलियां के दूध त्य के होवे है..जब तयी घी में आंगली तर ना हो ज्या रोटी खान का भी के मजा? बबीता ने पाछले एक साल त्य थैलियां का दूध ए पीया स्य..कैंप में ना घर बरगी डाइट मिल्यी। इस बात का भी अगर मेन कोच ध्यान रखें तो खिलाड़ियों की सेहत पर भी अच्छा प्रभाव पड़ेगा। महावीर फौगाट ने सरकार से अपने अखाड़े के लिए कुश्ती मैट मुहैया करवाने की मांग की है।
विज्ञापन