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सोए परिवार पर गिरी मुंडेर, मामी-भांजी की मौत

Wed, 25 May 2016 12:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 25 May 2016 12:16 AM IST
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मृत्‍यु - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
जेल के सामने देवनगर की वाल्मीकि बस्ती में सोए परिवार पर मुंडेर गिरने से महिला और उसकी 16 वर्षीय भांजी की मौत हो गई। हादसे में पांच साल की बच्ची घायल हो गई। गनीमत रही कि मुंडेर गिरने के कुछ क्षण पहले परिवार की एक अन्य महिला पिंकी अपने दोनों बच्चों को लेकर दूसरे कमरे में चली गई, अन्यथा हताहतों की संख्या बढ़ सकती थी। महिला का पति लापता है इस हादसे में वह भी चल बसी। अब उसके दो बेटों का परवरिश करने वाला कोई नहीं है।  
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सोमवार रात मौसम का बदला मिजाज एक परिवार के लिए कहर बन गया। रात नौ बजे के करीब आई अंधड़ की वजह से देवनगर में एक मकान की छत की मुंडेर आंगन में सोए परिवार पर गिर गई। मुंडेर के नीचे तीन चारपाइयों पर बाला देवी (35), उसकी भांजी ऋतु (16) और भतीजी आंचल (5) और एक अन्य चारपाई पर बाला देवी के भांजे की पत्नी पिंकी अपने दो बच्चों के साथ सोई थी। हादसा होने से चंद क्षण पहले पिंकी अपने दोनों बच्चों को लेकर कमरे के अंदर चली गई। घटना के समय बाला देवी के ससुर बलजीत सिंह कमरे के भीतर सोए थे। इसी दौरान तेज हवा के झोंके में 20-22 फुट लंबी मुंडेर नीचे गिर गई। मुंडेर का मलबा सीधा बाला देवी, ऋतु और आंचल पर गिरा। हादसे की आवाज सुनकर पड़ोसी घर पहुंचे। तीनों को बाहर निकाला। कुछ समय बाद ऋतु की सांसें थम गई। इसके बाद तीनों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। उपचार के दौरान बाला देवी की भी मौत हो गई। बच्ची आंचल के पांव में फ्रै क्चर बताया जा रहा है। उसकी हालत खतरे से बाहर है। हादसे के बाद वाल्मीकि बस्ती में मातम पसरा है।
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मुंडेर को नहीं थी सपोर्ट
मकान की छत की मुंडेर बिलकुल असुरक्षित थी। इसी वजह से दो को जान गंवानी पड़ी। वैसे तो मुंडेर में बीम डालकर मजबूत बनाया गया है। लेकिन, मुंडेर छत के अगले भाग में बनाई गई। तीन तरफ से मुंडेर बनाई नहीं गई। इसलिए, अगले हिस्से को सपोर्ट नहीं मिली और तेज हवा में गिर गई।
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बेटों को तीन घंटे पहले बहन के घर छोड़कर आई थी बाला
बाला देवी के दोनों बेटे अजय और सोनू की किस्मत अच्छी रही। हादसे से करीब तीन घंटे पहले यानी शाम पांच बजे बाला दोनों बेटों को अपनी बहन के घर तिगड़ाना गांव छोड़ आई कर आई थी। इस वजह से दोनों मासूमों की जान बच गई। अजय और सोनू की जान तो बच गई, लेकिन मां की मौत के बाद उनकी परवरिश करने वाला कोई नहीं बचा। बाला देवी का पति राममेहर 7-8 महीनों से लापता है। काफी तलाश के बावजूद राममेहर को परिजन ढूंढ नहीं पाए।


काश! मेरी बात मान ली होती
हादसे में मौत के मुंह में जाने से बची पिंकी का कहना है कि उसकी किस्मत अच्छी थी कि वह मुंडेर गिरने से तीन-चार मिनट पहले चारपाई छोड़कर कमरे में चली गई। लेकिन, बाला व ऋतु की किस्मत मेरे जैसी नहीं थी। पिंकी बताती हैं कि हादसा होने से चार-पांच मिनट पहले उन्होंने बाला देवी और ऋतु से कहा था कि अंदर आ जाओ। लेकिन, दोनों ने यह कहकर अंदर आने से इनकार कर दिया कि मौसम अच्छा है। ठंडी-ठंडी हवा चल रही है। कुछ देर बाद वे कमरे में आएंगी। इस बातचीत के कुछ क्षण बाद मुंडेर गिर गई और दोनों सदा के लिए छोड़कर चली गईं। ...काश! दोनों में मेरी बात मानी होती।

आंधी में मकान की मुंडेर गिरने से दो की मौत हो गई। पुलिस ने इत्तफाकिया मौत का मामला दर्ज किया है।
- उदमीराम प्रभारी, सदर थाना भिवानी
 
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