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Bhiwani: डाडम हादसे में पांच मजदूरों ने गंवाई थी जान, आठ माह बाद भी नहीं मिला जांच का नतीजा
Mon, 29 Aug 2022 02:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 29 Aug 2022 02:10 AM IST
सार
हादसे के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने भी मामले की जानकारी ली थी। रिटायर्ड आईएएस एसएस प्रसाद के नेतृत्व में कमेटी बनी थी, अभी रिपोर्ट का इंतजार है।
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डाडम खान।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी (फाइल फोटो)
विस्तार
इसी साल एक जनवरी को हुए डाडम हादसे के आठ माह बाद भी जांच का कोई नतीजा नहीं निकला। जबकि इस दर्दनाक पहाड़ हादसे में पांच मजदूरों ने अपनी जान गंवाई थी। हादसे के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने भी मामले की जानकारी ली थी। वहीं रिटायर्ड आईएएस के नेतृत्व मेें जांच के लिए कमेटी भी बनी थी। पूर्व मुख्यमंत्री सहित अनेक नेताओं ने डाडम पहाड़ हादसे में पहुंचकर घटनाक्रम पर चिंता भी जताई।
डाडम पहाड़ हादसा इसी साल एक जनवरी को हुआ था। जिसमें बागनवाला निवासी बिजेंद्र, जींद के मोरखी निवासी संजय, भालौठ निवासी धर्मबीर, बिहार निवासी तूफान सिंह व दिनेश की मौत हो गई थी। पहाड़ से पत्थर खिसकने से हुए हादसे की जांच के लिए रिटायर्ड आईएएस एसएस प्रसाद के नेतृत्व में कमेटी भी बनी। पुलिस विभाग की कमेटी, खान सुरक्षा विभाग की कमेटियां भी इसमें शामिल की गई। इसके अलावा एनजीटी की कमेटी ने भी मौके पर पहुुंचकर हालातों का जायजा लिया था।
विपक्षी नेताओं के लिए भी रहा था बड़ा मुद्दा
डाडम पहाड़ हादसे के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, डॉ. अशोक तंवर, पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान सहित विपक्ष के कई नेता पहाड़ की हादसे वाली जगह पर पहुंचे थे। विपक्ष ने भी इसको बड़ा मुद्दा बनाकर सरकार को खूब घेरा था। इसके अलावा कृषि मंत्री जयप्रकाश दलाल, सांसद धर्मबीर सिंह ने भी हालातों का जायजा लेकर पीड़ितों को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया था।
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मृतक के परिजनों को मिला था मुआवजा
पहाड़ हादसे में मृतक मजदूरों के परिजनों को भले ही कंपनी की तरफ से आर्थिक राहत दी गई थी, मगर अभी तक उनकी मौत का पूरा न्याय नहीं मिला है। हादसा खनन कंपनी की लापरवाही से हुआ था, इस पर भी अभी जांच कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार बना है। हालांकि एनजीटी कोर्ट के फैसले से कंपनी की लापरवाही उजागर हुई है और इस पर जुर्माना लगाने के लिए तीन माह की अवधि भी तय हो गई है।
गोवर्धन माइंस से पहले सुंदर मार्केटिंग के पास था पहाड़ लीज पर
डाडम पहाड़ में खनन के लिए गोवर्धन माइंस को 92 करोड़ सालाना लीज पर पहाड़ दिया गया है। जबकि इससे पहले 115 करोड़ की सालाना लीज पर डाडम पहाड़ में खनन सुंदर मार्केटिंग को दिया गया था। कंपनी को खनन के लिए सरकार व एनजीटी द्वारा तय किए गए सभी मापदंडों का पालन भी करना था। लेकिन खनन के दौरान ही पहाड़ में ये बड़ा हादसा हो गया। जिसके बाद खनन में अनियमितताओं की बातें उजागर हुई और मामला सुर्खियों में आ गया।
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डाडम पहाड़ हादसा इसी साल एक जनवरी को हुआ था। जिसमें बागनवाला निवासी बिजेंद्र, जींद के मोरखी निवासी संजय, भालौठ निवासी धर्मबीर, बिहार निवासी तूफान सिंह व दिनेश की मौत हो गई थी। पहाड़ से पत्थर खिसकने से हुए हादसे की जांच के लिए रिटायर्ड आईएएस एसएस प्रसाद के नेतृत्व में कमेटी भी बनी। पुलिस विभाग की कमेटी, खान सुरक्षा विभाग की कमेटियां भी इसमें शामिल की गई। इसके अलावा एनजीटी की कमेटी ने भी मौके पर पहुुंचकर हालातों का जायजा लिया था।
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विपक्षी नेताओं के लिए भी रहा था बड़ा मुद्दा
डाडम पहाड़ हादसे के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, डॉ. अशोक तंवर, पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान सहित विपक्ष के कई नेता पहाड़ की हादसे वाली जगह पर पहुंचे थे। विपक्ष ने भी इसको बड़ा मुद्दा बनाकर सरकार को खूब घेरा था। इसके अलावा कृषि मंत्री जयप्रकाश दलाल, सांसद धर्मबीर सिंह ने भी हालातों का जायजा लेकर पीड़ितों को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया था।
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मृतक के परिजनों को मिला था मुआवजा
पहाड़ हादसे में मृतक मजदूरों के परिजनों को भले ही कंपनी की तरफ से आर्थिक राहत दी गई थी, मगर अभी तक उनकी मौत का पूरा न्याय नहीं मिला है। हादसा खनन कंपनी की लापरवाही से हुआ था, इस पर भी अभी जांच कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार बना है। हालांकि एनजीटी कोर्ट के फैसले से कंपनी की लापरवाही उजागर हुई है और इस पर जुर्माना लगाने के लिए तीन माह की अवधि भी तय हो गई है।
गोवर्धन माइंस से पहले सुंदर मार्केटिंग के पास था पहाड़ लीज पर
डाडम पहाड़ में खनन के लिए गोवर्धन माइंस को 92 करोड़ सालाना लीज पर पहाड़ दिया गया है। जबकि इससे पहले 115 करोड़ की सालाना लीज पर डाडम पहाड़ में खनन सुंदर मार्केटिंग को दिया गया था। कंपनी को खनन के लिए सरकार व एनजीटी द्वारा तय किए गए सभी मापदंडों का पालन भी करना था। लेकिन खनन के दौरान ही पहाड़ में ये बड़ा हादसा हो गया। जिसके बाद खनन में अनियमितताओं की बातें उजागर हुई और मामला सुर्खियों में आ गया।