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राम नै इबकै तो कती मार दिये, महंगी खाद बीज ल्याकै बोई थी फसल, दाणा भी कोनी हौवे, न आग्ली बार की रसाई
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9 फोटो मुंढाल क्षेत्र के खेतों में जलभराव के दौरान पानी में डूबी धान की फसल। संवाद
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। राम नै इबकै तो कती मार दिये, महंगी खाद बीज ल्याकै फसल बोई थी, इबकै तो दाणा भी कौनी हौवै, आग्ली बार की भी कोए रसाई कौनी। ये दर्द उन किसानों की जुबां पर आ रहा है, जिनके खेतों में जुलाई माह से ही खड़ी फसल में बारिश का पानी जमा है। कई किसानों की फसल तो साढ़े तीन से चार फुट पानी के अंदर डूब चुकी है जो अब सड़ने लगी है।
किसानों का कहना है कि महंगा खाद बीज खरीदकर फसल बीजाई की थी। उनकी मेहनत पर फल लगता इससे पहले ही अरमानों पर पानी फिर गया और सपने चकनाचूर होकर बिखर गए। अगली फसल बीजाई की भी अब कोई आस नहीं है। कई किसानों की हालत तो ये है कि अगर 15 दिन और खेत में पानी रहा तो पूरी मेहनत पर ही पानी फिर जाएगा। वहीं सिंचाई विभाग भी बाढ़ नियंत्रण प्रबंधों के तहत पानी की निकासी में जुटा है, मगर ये प्रबंध भी नाकाफी है।
भिवानी जिले में कुछ इलाकों मेें बारिश के पानी का खेतों में जलभराव हुआ है। इनमें सबसे अधिक मुंढाल क्षेत्र प्रभावित हैं, जहां करीब 700 एकड़ में बारिश का पानी जमा है। यहां किसान धान की खेती करते हैं, जिनके खेतों में बारिश से पहले ही पानी था, बारिश के बाद यह जलभराव में बदल गया। इसी तरह खरक, कलिंगा, चांग, बवानीखेड़ा क्षेत्र के कुछ गांव भी जलभराव का दंश झेल रहे हैं। सिंचाई विभाग ने 150 से अधिक बिंदुओं पर बारिश के पानी की निकासी की व्यवस्था की है। मगर कई किसानों के खेतों में जलभराव इसलिए भी बना है, क्योंकि जहां पानी की निकासी हो रही है वे ड्रेन भी अब फुल हो गई हैं। जिनका पानी वापस खेतों की तरफ ही रुख कर रहा है। ऐसे में पानी निकासी की व्यवस्था के बावजूद किसानों के खेतों से इंच भर पानी भी नीचे नहीं उतरा है। अभी सितंबर तक बारिश की संभावना है। बारिश हुई तो जलभराव कम होने की बजाय बढ़ेगा। किसान इस बात से भी चिंतित हैं कि अब तो बीती सो बीती, अगली फसल भी नहीं ले पाएंगे, क्योंकि ये सेम का इलाका भी है, जहां जलभराव के बाद किसानों के खेतों पर काफी ऐसे दुष्प्रभाव रह जाते हैं, जिसकी वजह से खरीफ के बाद रबी की फसल ले पाना भी संभव नहीं होता है।
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मैंने करीब सात एकड़ में धान रोप रखी है। हर बार की तरह इस बार भी बारिश के पानी में मेरी फसल डूब गई। हर बार हमारा लाखों का नुकसान होता है। मैं अपने खेत में गेहूं बीजाई की सोच रहा था, मुझे नहीं लगता कि मैं अगली फसल बीजाई कर पाऊंगा, क्योंकि पानी अभी तीन फुट खेत में जमा है।
-रवींद्र कुमार, किसान।
हमने अपने खेतों में ही मकान बनाया हुआ है। जलभराव से धान की फसल तो डूब ही गई, साथ ही आने-जाने के रास्ते में भी पानी भरा है। पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है, ड्रेन पहले से ही फूल है। हमारी प्रशासन से गुहार है कि जल्द खेतों से पानी की निकासी हो।
-विनय कुमार, किसान।
मेरे खेत की धान की फसल खराब हो गई है। अगली बार ईख बोने की सोच रहा था, मगर अब कोई उम्मीद नहीं बची है। खेतों में पानी निकासी की व्यवस्था नहीं है। अधिकारी आते हैं और यहां हालात देखकर चले जाते हैं, कोई सुनने वाला नहीं।
-विनोद कुमार, किसान।
मैं खुद जलभराव से प्रभावित इलाकों का दौरा करने जा रहा हूं। जैसे भी हालात बने हैं, उनका निरीक्षण उपरांत संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जाएंगे। सभी संभावित इलाकों में बाढ़ नियंत्रण प्रबंधों के तहत तेजी से बारिश के पानी की निकासी का काम चल रहा है।
-जयप्रकाश दलाल, कृषि एवं पशुपालन राज्य मंत्री
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किसानों का कहना है कि महंगा खाद बीज खरीदकर फसल बीजाई की थी। उनकी मेहनत पर फल लगता इससे पहले ही अरमानों पर पानी फिर गया और सपने चकनाचूर होकर बिखर गए। अगली फसल बीजाई की भी अब कोई आस नहीं है। कई किसानों की हालत तो ये है कि अगर 15 दिन और खेत में पानी रहा तो पूरी मेहनत पर ही पानी फिर जाएगा। वहीं सिंचाई विभाग भी बाढ़ नियंत्रण प्रबंधों के तहत पानी की निकासी में जुटा है, मगर ये प्रबंध भी नाकाफी है।
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भिवानी जिले में कुछ इलाकों मेें बारिश के पानी का खेतों में जलभराव हुआ है। इनमें सबसे अधिक मुंढाल क्षेत्र प्रभावित हैं, जहां करीब 700 एकड़ में बारिश का पानी जमा है। यहां किसान धान की खेती करते हैं, जिनके खेतों में बारिश से पहले ही पानी था, बारिश के बाद यह जलभराव में बदल गया। इसी तरह खरक, कलिंगा, चांग, बवानीखेड़ा क्षेत्र के कुछ गांव भी जलभराव का दंश झेल रहे हैं। सिंचाई विभाग ने 150 से अधिक बिंदुओं पर बारिश के पानी की निकासी की व्यवस्था की है। मगर कई किसानों के खेतों में जलभराव इसलिए भी बना है, क्योंकि जहां पानी की निकासी हो रही है वे ड्रेन भी अब फुल हो गई हैं। जिनका पानी वापस खेतों की तरफ ही रुख कर रहा है। ऐसे में पानी निकासी की व्यवस्था के बावजूद किसानों के खेतों से इंच भर पानी भी नीचे नहीं उतरा है। अभी सितंबर तक बारिश की संभावना है। बारिश हुई तो जलभराव कम होने की बजाय बढ़ेगा। किसान इस बात से भी चिंतित हैं कि अब तो बीती सो बीती, अगली फसल भी नहीं ले पाएंगे, क्योंकि ये सेम का इलाका भी है, जहां जलभराव के बाद किसानों के खेतों पर काफी ऐसे दुष्प्रभाव रह जाते हैं, जिसकी वजह से खरीफ के बाद रबी की फसल ले पाना भी संभव नहीं होता है।
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मैंने करीब सात एकड़ में धान रोप रखी है। हर बार की तरह इस बार भी बारिश के पानी में मेरी फसल डूब गई। हर बार हमारा लाखों का नुकसान होता है। मैं अपने खेत में गेहूं बीजाई की सोच रहा था, मुझे नहीं लगता कि मैं अगली फसल बीजाई कर पाऊंगा, क्योंकि पानी अभी तीन फुट खेत में जमा है।
-रवींद्र कुमार, किसान।
हमने अपने खेतों में ही मकान बनाया हुआ है। जलभराव से धान की फसल तो डूब ही गई, साथ ही आने-जाने के रास्ते में भी पानी भरा है। पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है, ड्रेन पहले से ही फूल है। हमारी प्रशासन से गुहार है कि जल्द खेतों से पानी की निकासी हो।
-विनय कुमार, किसान।
मेरे खेत की धान की फसल खराब हो गई है। अगली बार ईख बोने की सोच रहा था, मगर अब कोई उम्मीद नहीं बची है। खेतों में पानी निकासी की व्यवस्था नहीं है। अधिकारी आते हैं और यहां हालात देखकर चले जाते हैं, कोई सुनने वाला नहीं।
-विनोद कुमार, किसान।
मैं खुद जलभराव से प्रभावित इलाकों का दौरा करने जा रहा हूं। जैसे भी हालात बने हैं, उनका निरीक्षण उपरांत संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जाएंगे। सभी संभावित इलाकों में बाढ़ नियंत्रण प्रबंधों के तहत तेजी से बारिश के पानी की निकासी का काम चल रहा है।
-जयप्रकाश दलाल, कृषि एवं पशुपालन राज्य मंत्री