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निजी स्कूल पर आई जांच की आंच

Fri, 23 Aug 2019 01:06 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 23 Aug 2019 01:06 AM IST
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Besit fasilities are not ablable in schoole
दिनोद गेट स्थित एक निजी स्कूल में उप जिला शिक्षा अधिकारी ने निरीक्षण कर तैयार की जांच रिपोर्ट में इस स्कूल को बच्चों के लिए असुरक्षित बताया। स्कूल के पास बने पेट्रोल पंप को भी जांच रिपोर्ट में बच्चों के लिए खतरनाक बताया गया है। इतना ही नहीं अब राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी इस मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए जिला उपायुक्त को जांच के आदेश दिए हैं। उपायुक्त को स्कूल के अंदर बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मसलों की जांच कराकर एक माह के अंदर रिपोर्ट आयोग के समक्ष देनी होगी।
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स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार ने दिनोद गेट स्थित निजी स्कूल में बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ किए जाने के मामले में मुख्यमंत्री, शिक्षा निदेशक, सीबीएसई व राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के समक्ष 22 जुलाई को शिकायत की थी। सीएम को भेजी गई शिकायत पर जिला उपायुक्त ने मामले की जांच जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपी। इस पर 19 अगस्त को उप जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल के अंदर पहुंचकर बच्चों की सुरक्षा के मसले की जांच की। उप जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल के अंदर चार बिंदुओं पर अपनी जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपी। इसमें हवाला दिया गया कि इस स्कूल के पास विद्यालय का नक्शा ही नहीं मिला। स्कूल प्राचार्या ने दलील दी थी कि 1995 में आई बाढ़ के दौरान स्कूल का नक्शा व अन्य दस्तावेज नष्ट हो गए। इस संबंध में स्कूल की तरफ से 13 साल बाद 2008 में एफआईआर दर्ज कराई गई है। जांच रिपोर्ट में इसे भी संदेहास्पद बताया गया है। इसी तरह वर्ष 2015 से 2019 तक स्कूल द्वारा फायर सेफ्टी नियमों के तहत दमकल विभाग से कोई एनओसी नहीं ली गई है। जबकि स्कूल ने 2014 में एक बार फायर एनओसी ली थी। स्कूल निरीक्षण के दौरान स्कूल से सटी दीवार के साथ ही पेट्रोल पंप भी बना हुआ था। जिसे भी जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में बच्चों के लिए खतरनाक व स्कूल को असुरक्षित करार दिया है। इतना ही नहीं स्कूल के सामने 20 से 25 मीटर दूरी पर बैंक्वेट हाल भी बना हुआ है। जांच के दौरान स्कूल में फिलहाल 4367 बच्चे विभिन्न कक्षाओं में पढ़ाई करते हुए पाए गए। जबकि सीबीएसई नियम के अनुसार स्कूल के अंदर दो एकड़ जमीन तक 2500 बच्चे व चार से अधिक एक कक्षा में सेक्शन नहीं बना सकते। मगर स्कूल में एक ही कक्षा में आठ से नौ सेक्शन तक बने हुए हैं। बच्चों की संख्या भी लगभग दो गुना तक पहुंच चुकी है, जो नियमों के खिलाफ हैं। स्कूल के दो मुख्य द्वार भी व्यस्त मार्ग पर स्थित हैं, जहां विद्यार्थियों का आवागमन भी जांच रिपोर्ट में असुरक्षित बताया गया है। शिकायतकर्ता स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार ने बताया कि उप जिला शिक्षा अधिकारी की सख्त रिपोर्ट के बावजूद भी जिला शिक्षा अधिकारी इस स्कूल को बचाने के प्रयासों में जुटे हैं। जबकि यह मामला हजारों बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा हैं, मगर फिर भी स्कूल प्रबंधक समिति भारी लापरवाही एवं चूक कर रही है।
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