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रजिस्ट्रेशन साढ़े 13 क्विंटल का, ट्रैक्टर ट्रॉली में लेकर पहुंचे 45 क्विंटल बाजरा, नहीं मिला गेट पास
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नई अनाज मंडी में गेट पास बनवाने के लिए लाइनों में लगी बाजरे से भरी ट्रैक्टर-ट्रालियां। संवाद न्यू
- फोटो : Bhiwani
संजय वर्मा
भिवानी। रजिस्ट्रेशन तो साढ़े 13 क्विंटल का मंजूर हुआ, मगर ट्रैक्टर ट्रॉली के अंदर 45 क्विंटल बाजरा भरा देख अधिकारियों का दिमाग भी चकरा गया। मंडी में सुबह की पहली किरण के साथ ही किसान फसल को ट्रैक्टर ट्रॉली में डालकर मंडी का रुख कर चुके थे। यही वजह थी कि सुबह आठ बजे ही मंडी के गेट पर ट्रैक्टर ट्रॉलियों की लंबी लाइन लग गई। किसान चार घंटे तक मार्केटिंग बोर्ड अधिकारियों के इंतजार में खड़े रहे, मगर जब मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारी दफ्तर पहुंचे तो पोर्टल नहीं चला। वीरवार दोपहर साढ़े 12 बजे पोर्टल की तकनीकी खामी दूर हुई तो उसके बाद गेट पास काटने का काम शुरू हुआ। गेट पास लेकर किसान मंडी के अंदर पहुंचे और खुले में ही बाजरे की फसल की ढेरी लगाई, लेकिन दिनभर खरीदार का इंतजार खत्म नहीं हुआ।
अमर उजाला की टीम ने नई अनाज मंडी में किसानों की बाजरा फसल खरीद का हाल जाना तो किसान का दर्द भी जुबां पर आ गया। किसानों का कहना था कि देर रात साढ़े 11 बजे फोन पर मंडी पहुंचने का एसएमएस आया था, सुबह उठे तो फोन में मैसेज पढ़ा, जैसे-तैसे ट्रैक्टर का इंतजाम किया और फिर फसल लेकर मंडी पहुंचे। मगर यहां आए तो खरीद का कोई प्रबंध नहीं मिला। मंडी के चारों तरफ के रास्तों को सील किया गया था। केवल एक ही गेट से एंट्री कराई गई।
नहीं मिला गेट पास
कई किसान मेरी फसल मेरा ब्योरा पर अपनी फसल के रजिस्ट्रेशन से अधिक बाजरा लेकर पहुंच गए। एक किसान की ट्राली में 45 क्विंटल बाजरा लदा हुआ था, जब उसके फोन पर मैसेज देखा तो मात्र साढ़े 13 क्विंटल बाजरा ही सरकारी खरीद करने का रजिस्ट्रेशन दर्ज किया हुआ था। इस पर ज्यादा बाजरे के बारे में किसान भी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। जिस पर उसे गेट पास नहीं मिला।
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पहले से मंडी पहुंची कपास ने भी बाजरा बिक्री किसानों की बढ़ाई मुश्किलें
नई अनाज मंडी के अधिकांश दायरे में पहले से ही किसानों की कपास की फसल रखी हुई है। ऐसे में वीरवार को बाजरा की सरकारी खरीद शुरू होने पर किसान मंडी आए तो उन्हें अपनी फसल रखने के लिए भी जगह नसीब नहीं हुई। कई किसानों ने तो कपास के बीच थोड़ी बहुत जगह देख वहीं पर ट्राली खाली कर दी। जबकि अधिकांश किसानों ने खुले में ही अपना बाजरा नीचे उतारा।
प्याऊ में बना किसान सुविधा केंद्र, प्यासे भटक रहे किसान
नई अनाज मंडी मार्केटिंग बोर्ड कार्यालय के कोने पर बनी प्याऊ को किसान सुविधा केंद्र बना दिया। यहां पर कंप्यूटर के जरिए किसानों को गेट पास दिए गए, मगर मंडी में आने वाले किसान चिलचिलाती धूप में पानी के लिए भटकते रहे। कई शौचालयों का भी बुरा हाल दिखा। वहीं मंडी में धर्मशाला के पास ही प्याऊ चालू थी, मगर उसके लिए भी किसानों को काफी दूर तक जाना पड़ा।
वर्जन-
दोपहर तक पोर्टल की दिक्कत दूर हो गई थी। करीब 35 किसानों को गेट पास जारी किए गए हैं, जबकि शाम छह बजे तक मंडी में किसानों को गेट पास जारी किए गए। वेयर हाउस के अधिकारियों द्वारा बाजरा खरीद किया जा रहा है। वेरिफाई बाजरा की फसल ही बिक्री होगी, उसी का गेट पास मिलेगा।
- ज्योति धनखड़ कार्यकारी अधिकारी एवं सचिव मार्केटिंग बोर्ड भिवानी।
परेशानी किसानों की जुबानी
मेरे फोन पर रात साढ़े 11 बजे एसएमएस आया था, सुबह देखा तो फटाफट भाई नवीन और मेरे हिस्से का 37 क्विंटल बाजरा ट्रैक्टर में डालकर सुबह आठ बजे मंडी पहुंचा, मगर मुश्किल से साढ़े 12 बजे गेट पास मिला। सुबह से कुछ नहीं खाया था, चाय भी मंडी आकर ही पी थी। ढेरी के पास कोई भी अधिकारी नहीं फटका और किसी ने खरीद के बारे में कोई संतोषजनक जवाब भी नहीं दिया। सुबह से शाम हो गई है, मगर फसल बिक्री नहीं हुई है।
- निर्भय सिंह, किसान देवसर।
मंडी में सुबह से बाजरा की फसल के साथ डेरा डाले हुए हैं। दोपहर को काफी धक्के खाने के बाद गेट पास मिला, मगर मंडी में ठीक से बैठने तक की जगह नहीं हैं, न ही कोई पीने के पानी का प्रबंध है। फसल खरीद कौन सी एजेंसी करेगी, इसके बारे में अभी आढ़ति को भी पता नहीं है। मैसेज के अनुसार फसल मंडी में लेकर आया हूं। अब न जाने कब बाजरा बिकेगा।
- महेंद्र सिंह भिवानी जोनपाल क्षेत्र।
फोन पर एसएमएस आने के बाद रजिस्टर्ड हुई बाजरा की फसल लेकर मंडी पहुंचा हूं, लेकिन खुले प्लेटफार्म पर जगह नहीं मिली तो सड़क किनारे ढेरी लगानी पड़ी। सुबह से भूखे-प्यासे मंडी में पड़े हैं, कोई सुध लेने वाला नहीं आया है। गेट पास के लिए भी काफी पापड़ बेलने पड़े, फिर कहीं जाकर गेट पास कटा है। फसल बिक्री की कोई जानकारी नहीं है।
- सुनील कुमार, भिवानी जोनपाल का किसान।
जब मंडी पहुंचा तो ट्रैक्टरों की लंबी लाइन लगी थी, फोन पर मैसेज दिखाया, मगर फिर भी उससे फसल बिक्री के लिए आईडी मांगी। उसने वो भी दे दी, लेकिन पोर्टल में तकनीकी वजह बताई गई और उसे तीन घंटे तक गेट पास मिलने का इंतजार करना पड़ा। गेट पास मिल गया तो मंडी में फसल उतारने के लिए अच्छी जगह नहीं मिली।
- अजीत कुमार, भिवानी जोनपाल का किसान।
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भिवानी। रजिस्ट्रेशन तो साढ़े 13 क्विंटल का मंजूर हुआ, मगर ट्रैक्टर ट्रॉली के अंदर 45 क्विंटल बाजरा भरा देख अधिकारियों का दिमाग भी चकरा गया। मंडी में सुबह की पहली किरण के साथ ही किसान फसल को ट्रैक्टर ट्रॉली में डालकर मंडी का रुख कर चुके थे। यही वजह थी कि सुबह आठ बजे ही मंडी के गेट पर ट्रैक्टर ट्रॉलियों की लंबी लाइन लग गई। किसान चार घंटे तक मार्केटिंग बोर्ड अधिकारियों के इंतजार में खड़े रहे, मगर जब मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारी दफ्तर पहुंचे तो पोर्टल नहीं चला। वीरवार दोपहर साढ़े 12 बजे पोर्टल की तकनीकी खामी दूर हुई तो उसके बाद गेट पास काटने का काम शुरू हुआ। गेट पास लेकर किसान मंडी के अंदर पहुंचे और खुले में ही बाजरे की फसल की ढेरी लगाई, लेकिन दिनभर खरीदार का इंतजार खत्म नहीं हुआ।
अमर उजाला की टीम ने नई अनाज मंडी में किसानों की बाजरा फसल खरीद का हाल जाना तो किसान का दर्द भी जुबां पर आ गया। किसानों का कहना था कि देर रात साढ़े 11 बजे फोन पर मंडी पहुंचने का एसएमएस आया था, सुबह उठे तो फोन में मैसेज पढ़ा, जैसे-तैसे ट्रैक्टर का इंतजाम किया और फिर फसल लेकर मंडी पहुंचे। मगर यहां आए तो खरीद का कोई प्रबंध नहीं मिला। मंडी के चारों तरफ के रास्तों को सील किया गया था। केवल एक ही गेट से एंट्री कराई गई।
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नहीं मिला गेट पास
कई किसान मेरी फसल मेरा ब्योरा पर अपनी फसल के रजिस्ट्रेशन से अधिक बाजरा लेकर पहुंच गए। एक किसान की ट्राली में 45 क्विंटल बाजरा लदा हुआ था, जब उसके फोन पर मैसेज देखा तो मात्र साढ़े 13 क्विंटल बाजरा ही सरकारी खरीद करने का रजिस्ट्रेशन दर्ज किया हुआ था। इस पर ज्यादा बाजरे के बारे में किसान भी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। जिस पर उसे गेट पास नहीं मिला।
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पहले से मंडी पहुंची कपास ने भी बाजरा बिक्री किसानों की बढ़ाई मुश्किलें
नई अनाज मंडी के अधिकांश दायरे में पहले से ही किसानों की कपास की फसल रखी हुई है। ऐसे में वीरवार को बाजरा की सरकारी खरीद शुरू होने पर किसान मंडी आए तो उन्हें अपनी फसल रखने के लिए भी जगह नसीब नहीं हुई। कई किसानों ने तो कपास के बीच थोड़ी बहुत जगह देख वहीं पर ट्राली खाली कर दी। जबकि अधिकांश किसानों ने खुले में ही अपना बाजरा नीचे उतारा।
प्याऊ में बना किसान सुविधा केंद्र, प्यासे भटक रहे किसान
नई अनाज मंडी मार्केटिंग बोर्ड कार्यालय के कोने पर बनी प्याऊ को किसान सुविधा केंद्र बना दिया। यहां पर कंप्यूटर के जरिए किसानों को गेट पास दिए गए, मगर मंडी में आने वाले किसान चिलचिलाती धूप में पानी के लिए भटकते रहे। कई शौचालयों का भी बुरा हाल दिखा। वहीं मंडी में धर्मशाला के पास ही प्याऊ चालू थी, मगर उसके लिए भी किसानों को काफी दूर तक जाना पड़ा।
वर्जन-
दोपहर तक पोर्टल की दिक्कत दूर हो गई थी। करीब 35 किसानों को गेट पास जारी किए गए हैं, जबकि शाम छह बजे तक मंडी में किसानों को गेट पास जारी किए गए। वेयर हाउस के अधिकारियों द्वारा बाजरा खरीद किया जा रहा है। वेरिफाई बाजरा की फसल ही बिक्री होगी, उसी का गेट पास मिलेगा।
- ज्योति धनखड़ कार्यकारी अधिकारी एवं सचिव मार्केटिंग बोर्ड भिवानी।
परेशानी किसानों की जुबानी
मेरे फोन पर रात साढ़े 11 बजे एसएमएस आया था, सुबह देखा तो फटाफट भाई नवीन और मेरे हिस्से का 37 क्विंटल बाजरा ट्रैक्टर में डालकर सुबह आठ बजे मंडी पहुंचा, मगर मुश्किल से साढ़े 12 बजे गेट पास मिला। सुबह से कुछ नहीं खाया था, चाय भी मंडी आकर ही पी थी। ढेरी के पास कोई भी अधिकारी नहीं फटका और किसी ने खरीद के बारे में कोई संतोषजनक जवाब भी नहीं दिया। सुबह से शाम हो गई है, मगर फसल बिक्री नहीं हुई है।
- निर्भय सिंह, किसान देवसर।
मंडी में सुबह से बाजरा की फसल के साथ डेरा डाले हुए हैं। दोपहर को काफी धक्के खाने के बाद गेट पास मिला, मगर मंडी में ठीक से बैठने तक की जगह नहीं हैं, न ही कोई पीने के पानी का प्रबंध है। फसल खरीद कौन सी एजेंसी करेगी, इसके बारे में अभी आढ़ति को भी पता नहीं है। मैसेज के अनुसार फसल मंडी में लेकर आया हूं। अब न जाने कब बाजरा बिकेगा।
- महेंद्र सिंह भिवानी जोनपाल क्षेत्र।
फोन पर एसएमएस आने के बाद रजिस्टर्ड हुई बाजरा की फसल लेकर मंडी पहुंचा हूं, लेकिन खुले प्लेटफार्म पर जगह नहीं मिली तो सड़क किनारे ढेरी लगानी पड़ी। सुबह से भूखे-प्यासे मंडी में पड़े हैं, कोई सुध लेने वाला नहीं आया है। गेट पास के लिए भी काफी पापड़ बेलने पड़े, फिर कहीं जाकर गेट पास कटा है। फसल बिक्री की कोई जानकारी नहीं है।
- सुनील कुमार, भिवानी जोनपाल का किसान।
जब मंडी पहुंचा तो ट्रैक्टरों की लंबी लाइन लगी थी, फोन पर मैसेज दिखाया, मगर फिर भी उससे फसल बिक्री के लिए आईडी मांगी। उसने वो भी दे दी, लेकिन पोर्टल में तकनीकी वजह बताई गई और उसे तीन घंटे तक गेट पास मिलने का इंतजार करना पड़ा। गेट पास मिल गया तो मंडी में फसल उतारने के लिए अच्छी जगह नहीं मिली।
- अजीत कुमार, भिवानी जोनपाल का किसान।