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Bhiwani News: आश्रम ने दिया आधार, 6 लोगाें ने भरी कामयाबी की उड़ान

Sun, 28 Jan 2024 03:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Sun, 28 Jan 2024 03:44 AM IST
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Ashram provided support, 6 people flew to success
भिवानी। भिवानी के बाल सेवा आश्रम की करीब सवा सौ साल पहले पंजाब केसरी लाला लाजपत राय के हाथों नींव रखी गई थी। लाला लाजपत राय ने 1898 में भिवानी में बाल सेवा आश्रम स्थापित किया था। जिसमें फिलहाल 23 बच्चे हैं। बाल सेवा आश्रम से अब तक छह लोगों ने संघर्ष का जीवन जीने के बावजूद कामयाबी की उड़ान भरी है। जिसमें दो प्रोफेसर, दो शास्त्री और एक डॉक्टर व एक इंजीनियर भी बने हैं। बाल सेवा आश्रम की ही एक बेटी आदमपुर के पॉलिटेक्निक कॉलेज से इंजीनियरिंग का डिप्लोमा कर रही है।
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लाला लाजपत राय द्वारा स्थापित बाल सेवा आश्रम की करीब 16 एकड़ भूमि में है। इसमें आठ एकड़ में आश्रम का आवास बना है। इसमें बच्चों के लिए शिक्षा, आवास, भोजन, यज्ञशाला, गोशाला और प्राथमिक विद्यालय बना है। इसके अलावा लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग छात्रावास है। बाल सेवा आश्रम के अध्यक्ष वेदप्रिय आर्य ने बताया कि विक्रमी संवत 1956 में भयंकर अकाल पड़ा था। यह अकाल छप्पने का काल के नाम से भी जाना जाता है। 1899 में इंसान तो क्या पशु-पक्षियों के लिए भी भोजन के लाले पड़ गए थे। अकाल के समय ईसाई मिशनरीज भिवानी इलाके में सक्रिय हो गई थी और आरंभ में उन्होंने 82 बच्चे एकत्रित कर लिए थे। इस षडयंत्र का लाला लाजपत राय को पता चला। उस समय वे हिसार में वकालत करते थे। उन्होंने अपने सहयोगियों लाला चूड़ामणि, पंडित लखपतराय से विचार कर गार्डियनशिप की दरख्वास्त सेशन जज फिरोजपुर की अदालत में दी। उस समय अदालत ने फैसला दिया था कि हिंदू बच्चों को लालाजी को सौंप दिया जाए। इसके विरोध में ईसाई प्रचारकों ने लाहौर हाईकोर्ट में अपील कर दी जो खारिज हो गई। निर्णय दिया गया कि हिंदू बच्चों के वैधानिक वारिस लाला लाजपराय होंगे और बच्चे उनको सौंप दिए गए। उस समय लाला लाजपत राय ने पंजाब के चीफ इंजीनियर गंगाराम के सहयोग से भवन किराये पर लिया।
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लावारिस बच्चों को किराये के भवन में रखा गया। इसके बाद भिवानी के दानवीरों ने पूरा सहयोग किया और आश्रम के नए भवन के लिए 30 मई 1909 को लालाजी ने आधारशिला रखी। वेदप्रिय आर्य ने बताया कि उनकी जानकारी में आश्रम के छह बच्चों ने अपना जीवन सार्थक किया है। जिसमें दो प्रोफेसर बने हैं, दो ने शास्त्री बन जीवन में कामयाबी पाई है। इसी तरह एक डॉक्टर और एक इंजीनियर भी बने हैं। आश्रम की एक बेटी फिलहाल पॉलिटेक्निक कॉलेज से इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कर रही है।
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