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Bhiwani News: अमृत प्रथम चरण के विकास के काम अटके, दूसरे चरण पर लगा विराम
Mon, 29 Jan 2024 03:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Mon, 29 Jan 2024 03:10 AM IST
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भिवानी। अमृत प्रथम फेज में अभी विकास के काम अटके हैं, जिसकी वजह से दूसरे फेज के कामों पर विराम लगा है। शहर में अमृत प्रथम चरण में 93 करोड़ की लागत से इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन, वाटर टैंक, सीवरेज व पेयजल लाइनें डालने का काम शुरू हुआ था। जिसमें अब भी काम बाकी हैं, जिसकी वजह से दूसरे फेज का काम भी शुरू नहीं हो पा रहा है।
अब चुनाव आयोग की चुनावी आचार संहिता मध्य फरवरी के बाद लागू हो जाएगी। जिसमें मामला अटक सकता है। हालांकि प्रथम चरण के अधूरे कार्यों की वजह से द्वितीय चरण में पुरानी लाइनों का सर्वेक्षण भी अभी तक नहीं हुआ है। इतना ही नहीं प्रथम चरण में बनकर तैयार हो चुके इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन यानी आईपीएस का बिजली कनेक्शन भी नहीं मिला है। डाली गई सीवरेज लाइन भी चालू नहीं हैं।
नगर परिषद ने अमृत प्रथम चरण में करीब 93 करोड़ के बजट से शहर के पुराने जलघर में दो नए वाटर टैंकों का निर्माण कराया है। ये टैंक तो चालू हो गए हैं, मगर निनान जलघर में बनाया आईपीएस (इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन) अभी चालू नहीं हुआ है। इसे चालू कराने के लिए नया बिजली कनेक्शन लिया जाना है। इसी तरह काफी हिस्से में नई सीवरेज लाइन भी डाली गई थी जो अभी तक चालू नहीं हुई है। ये लाइन चालू होने से पहले ही क्षतिग्रस्त होने या फिर इसमें रुकावट की आशंका है। लंबे अर्से से इस्तेमाल नहीं होना भी कार्य की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। हालांकि बालाजी बिल्डर्स एजेंसी को अमृत प्रथम चरण का काम पूरा कराने के लिए 31 मार्च 2024 तक की मोहलत मिली है। अब एक पेंच ये भी फंसा है कि मार्च तक अगर प्रथम चरण का काम पूरा भी हो जाता है तो भी शहर के सीवरेज और पेयजल लाइनों के बड़े मसौदों आचार संहिता से ब्रेक लगना तय है। क्योंकि मध्य फरवरी में ही आचार संहिता घोषित होने की संभावना है। द्वितीय चरण में शहर के अंदर नए बूस्टिंग स्टेशन, वाटर डिस्पोजल निर्माण किए जाने हैं, जबकि शहर के अंदर करीब 30 किलोमीटर दायरे में 42 साल पुरानी पेयजल लाइनों को बदला जाना है। इसी तरह करीब 15 किलोमीटर दायरे में जर्जर हाल हो चुकी सीवरलाइन भी बदली होनी है। मगर ये मसौदे सिरे चढ़ पाएं इससे पहले ही अड़चने आगे तैयार खड़ी हैं। शहरवासियों के लिए अमृत द्वितीय चरण में सीवरेज और पेयजल की बड़ी परियोजनाओं पर काम होना है। इसके बाद ही शहरी दायरे में पानी की लाइनों की लीकेज और ठप सीवर से निजात मिलेगी।
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सर्वेक्षण की भी नहीं मिली मंजूरी, फाइलों में उलझा मामला
द्वितीय चरण के तहत होने वाले कार्यों के अभी तक शहर के अंदर सर्वेक्षण भी नहीं हुआ है। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने द्वितीय चरण के कार्यों की फाइल मुख्यालय को भेजी है, मगर मामला अभी तक फाइलों में ही अटका है। थर्ड एजेंसी लाइनों के सर्वे का काम करेगी, इसके बाद ही अधिकारी लाइनों का बदलने का खाका तैयार कर अनुमानित लागत का मसौदा तैयार करेंगे, जिस पर बजट मंजूरी के लिए मुख्यालय को भेजा जाएगा। लेकिन अभी तक पहले चरण का काम ही लटका है तो अधिकारियों को दूसरे चरण की अभी कोई सुगबुगाहट तक नहीं है।
एजेंसी अधिकारियों का दावा समाप्ति की ओर काम
बालाजी बिल्डर्स कंपनी को अमृत प्रथम चरण का काम नगर परिषद द्वारा सौंपा गया है। कंपनी अधिकारियों का दावा है कि उनका कार्य समाप्ति की ओर है। जिसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। हालांकि अमृत प्रथम चरण के सभी काम पूरे हो चुके हैं। इनमें आईपीएस में बिजली कनेक्शन तो कहीं रंग रोगन कराने का काम ही बाकी बचा है। नई सीवरेज लाइन भी तैयार है, बस इसे चालू करना है।
आधे शहर में बरसाती पानी निकासी की भी नहीं है व्यवस्था
अमृत प्रथम चरण में करीब आधे शहर में बरसाती पानी की निकासी के लिए लाइनें डाली जा चुकी हैं। दो साल से ये लाइन चालू हैं और इसके लिए अलग से सिस्टम बना है। मगर आधा शहर अब भी बरसाती पानी की निकासी के लिए पुराने सीवरेज और खुले नालों पर ही निर्भर है। आधे शहर में भूमिगत नई पाइप लाइन डालकर उसका एसटीपी तक निकासी का प्रबंध भी बाकी है। ये काम भी अमृत द्वितीय फेज में होना है।
विभाग करा रहा सिर्फ छोटे काम
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग शहर में फिलहाल छोटे काम ही करा रहा है। इसमें कहीं कोई सीवर मैनहोल ठप है तो उसकी रिपेयरिंग कराना। कहीं लाइन बंद है तो उसकी जगह नई पाइप डलवाना। इस तरह के काम केवल मरम्मत पर ही निर्भर है, जबकि शहर के पुराने सीवरेज और पेयजल सिस्टम को नए सिरे से बदलने का कोई भी मसौदा अभी सिरे नहीं चढ़ा है। इसी वजह से शहरवासी पेयजल और सीवरेज संबंधी समस्याएं झेल रहे हैं।
अभी अमृत प्रथम चरण का काम पूरा नहीं हुआ है। द्वितीय चरण का काम का मामला तब तक आगे नहीं बढ़ सकता जब तक पहले चरण का काम पूरा नहीं हो जाता। 31 मार्च तक ये काम पूरा किया जाना है। फिलहाल विभाग लीकेज लाइनों की मरम्मत भर करा रहा है। नई सीवरेज और पेयजल लाइन डालने और नए बूस्टिंग व डिस्पोजल स्टेशनों के निर्माण के काम अमृत द्वितीय चरण में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग कराएगा।
-सुनील कुमार रंगा, कार्यकारी अभियंता, शहरी सीवरेज शाखा, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग भिवानी।
गड्ढा
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अब चुनाव आयोग की चुनावी आचार संहिता मध्य फरवरी के बाद लागू हो जाएगी। जिसमें मामला अटक सकता है। हालांकि प्रथम चरण के अधूरे कार्यों की वजह से द्वितीय चरण में पुरानी लाइनों का सर्वेक्षण भी अभी तक नहीं हुआ है। इतना ही नहीं प्रथम चरण में बनकर तैयार हो चुके इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन यानी आईपीएस का बिजली कनेक्शन भी नहीं मिला है। डाली गई सीवरेज लाइन भी चालू नहीं हैं।
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नगर परिषद ने अमृत प्रथम चरण में करीब 93 करोड़ के बजट से शहर के पुराने जलघर में दो नए वाटर टैंकों का निर्माण कराया है। ये टैंक तो चालू हो गए हैं, मगर निनान जलघर में बनाया आईपीएस (इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन) अभी चालू नहीं हुआ है। इसे चालू कराने के लिए नया बिजली कनेक्शन लिया जाना है। इसी तरह काफी हिस्से में नई सीवरेज लाइन भी डाली गई थी जो अभी तक चालू नहीं हुई है। ये लाइन चालू होने से पहले ही क्षतिग्रस्त होने या फिर इसमें रुकावट की आशंका है। लंबे अर्से से इस्तेमाल नहीं होना भी कार्य की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। हालांकि बालाजी बिल्डर्स एजेंसी को अमृत प्रथम चरण का काम पूरा कराने के लिए 31 मार्च 2024 तक की मोहलत मिली है। अब एक पेंच ये भी फंसा है कि मार्च तक अगर प्रथम चरण का काम पूरा भी हो जाता है तो भी शहर के सीवरेज और पेयजल लाइनों के बड़े मसौदों आचार संहिता से ब्रेक लगना तय है। क्योंकि मध्य फरवरी में ही आचार संहिता घोषित होने की संभावना है। द्वितीय चरण में शहर के अंदर नए बूस्टिंग स्टेशन, वाटर डिस्पोजल निर्माण किए जाने हैं, जबकि शहर के अंदर करीब 30 किलोमीटर दायरे में 42 साल पुरानी पेयजल लाइनों को बदला जाना है। इसी तरह करीब 15 किलोमीटर दायरे में जर्जर हाल हो चुकी सीवरलाइन भी बदली होनी है। मगर ये मसौदे सिरे चढ़ पाएं इससे पहले ही अड़चने आगे तैयार खड़ी हैं। शहरवासियों के लिए अमृत द्वितीय चरण में सीवरेज और पेयजल की बड़ी परियोजनाओं पर काम होना है। इसके बाद ही शहरी दायरे में पानी की लाइनों की लीकेज और ठप सीवर से निजात मिलेगी।
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सर्वेक्षण की भी नहीं मिली मंजूरी, फाइलों में उलझा मामला
द्वितीय चरण के तहत होने वाले कार्यों के अभी तक शहर के अंदर सर्वेक्षण भी नहीं हुआ है। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने द्वितीय चरण के कार्यों की फाइल मुख्यालय को भेजी है, मगर मामला अभी तक फाइलों में ही अटका है। थर्ड एजेंसी लाइनों के सर्वे का काम करेगी, इसके बाद ही अधिकारी लाइनों का बदलने का खाका तैयार कर अनुमानित लागत का मसौदा तैयार करेंगे, जिस पर बजट मंजूरी के लिए मुख्यालय को भेजा जाएगा। लेकिन अभी तक पहले चरण का काम ही लटका है तो अधिकारियों को दूसरे चरण की अभी कोई सुगबुगाहट तक नहीं है।
एजेंसी अधिकारियों का दावा समाप्ति की ओर काम
बालाजी बिल्डर्स कंपनी को अमृत प्रथम चरण का काम नगर परिषद द्वारा सौंपा गया है। कंपनी अधिकारियों का दावा है कि उनका कार्य समाप्ति की ओर है। जिसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। हालांकि अमृत प्रथम चरण के सभी काम पूरे हो चुके हैं। इनमें आईपीएस में बिजली कनेक्शन तो कहीं रंग रोगन कराने का काम ही बाकी बचा है। नई सीवरेज लाइन भी तैयार है, बस इसे चालू करना है।
आधे शहर में बरसाती पानी निकासी की भी नहीं है व्यवस्था
अमृत प्रथम चरण में करीब आधे शहर में बरसाती पानी की निकासी के लिए लाइनें डाली जा चुकी हैं। दो साल से ये लाइन चालू हैं और इसके लिए अलग से सिस्टम बना है। मगर आधा शहर अब भी बरसाती पानी की निकासी के लिए पुराने सीवरेज और खुले नालों पर ही निर्भर है। आधे शहर में भूमिगत नई पाइप लाइन डालकर उसका एसटीपी तक निकासी का प्रबंध भी बाकी है। ये काम भी अमृत द्वितीय फेज में होना है।
विभाग करा रहा सिर्फ छोटे काम
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग शहर में फिलहाल छोटे काम ही करा रहा है। इसमें कहीं कोई सीवर मैनहोल ठप है तो उसकी रिपेयरिंग कराना। कहीं लाइन बंद है तो उसकी जगह नई पाइप डलवाना। इस तरह के काम केवल मरम्मत पर ही निर्भर है, जबकि शहर के पुराने सीवरेज और पेयजल सिस्टम को नए सिरे से बदलने का कोई भी मसौदा अभी सिरे नहीं चढ़ा है। इसी वजह से शहरवासी पेयजल और सीवरेज संबंधी समस्याएं झेल रहे हैं।
अभी अमृत प्रथम चरण का काम पूरा नहीं हुआ है। द्वितीय चरण का काम का मामला तब तक आगे नहीं बढ़ सकता जब तक पहले चरण का काम पूरा नहीं हो जाता। 31 मार्च तक ये काम पूरा किया जाना है। फिलहाल विभाग लीकेज लाइनों की मरम्मत भर करा रहा है। नई सीवरेज और पेयजल लाइन डालने और नए बूस्टिंग व डिस्पोजल स्टेशनों के निर्माण के काम अमृत द्वितीय चरण में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग कराएगा।
-सुनील कुमार रंगा, कार्यकारी अभियंता, शहरी सीवरेज शाखा, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग भिवानी।
गड्ढा