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Bhiwani News: 100 करोड़ के फिशरीज सेंटर की निर्माण सामग्री में अनियमितता के आरोप, निम्न स्तर की ईंट, सीमेंट की जांच की मांग
Fri, 28 Aug 2026 12:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Fri, 28 Aug 2026 12:49 AM IST
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फिशरीज एक्वा एक्सीलेंस सेंटर के निर्माण के लिए पहुंची सीमेंट।
बहल। किसानों की आय बढ़ाने और मछली पालन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए गरवा गांव में बन रहा करीब 100 करोड़ रुपये का फिशरीज एक्वा एक्सीलेंस सेंटर निर्माण शुरू होते ही सवालों के घेरे में आ गया है। ग्रामीणों ने निर्माण में कथित तौर पर निम्न स्तर की सामग्री इस्तेमाल करने और अनियमितताएं बरतने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने मामले की जांच उच्चस्तरीय कमेटी से कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने केंद्र की मंजूरी में अहम भूमिका निभाने वाले पूर्व कृषि मंत्री जेपी दलाल के समक्ष भी शिकायत रखी है। उन्होंने जिला उपायुक्त और लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन को भी मामले से अवगत कराया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण स्थल पर इस्तेमाल हो रही कुछ ईंटें जमीन पर रखते ही टूट रही हैं। उनका कहना है कि पुराना और कठोर हो चुका सीमेंट भी कूटकर निर्माण में इस्तेमाल किया जा रहा है। फ्लाई ऐश ईंटों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए हैं।
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खारे पानी से चिनाई का आरोप
ग्रामीण रजनीश, राजकुमार और प्रकाश ने आरोप लगाया कि निर्माण स्थल पर पानी को शुद्ध करने के लिए आरओ मशीन लगी है। इसके बावजूद बोरवेल के पानी से चिनाई की जा रही है। उनका दावा है कि अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान ही आरओ मशीन चालू की जाती है।
जंग लगे सरियों के इस्तेमाल पर सवाल
ग्रामीणों ने निर्माण में जंग लगे सरियों के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया। उन्होंने उच्चस्तरीय जांच कराकर गुणवत्ता की वास्तविकता सामने लाने की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार पूर्व मंत्री जेपी दलाल ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों से जांच कराने का आश्वासन दिया है।
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केंद्र के निर्माण में मानकों के अनुरूप सामग्री इस्तेमाल की जा रही है। जिन ईंटों को निम्न स्तर का बताया जा रहा है, वे केंद्र के निर्माण के लिए नहीं बल्कि मजदूरों के आवास के लिए लाई गई हैं। निर्माण में आरओ पानी का प्रयोग किया जा रहा है। किसी तरह की अनियमितता नहीं होने दी जाएगी। - प्रमोद कुमार, जेई, पीडब्ल्यूडी।
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ग्रामीणों ने केंद्र की मंजूरी में अहम भूमिका निभाने वाले पूर्व कृषि मंत्री जेपी दलाल के समक्ष भी शिकायत रखी है। उन्होंने जिला उपायुक्त और लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन को भी मामले से अवगत कराया है।
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ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण स्थल पर इस्तेमाल हो रही कुछ ईंटें जमीन पर रखते ही टूट रही हैं। उनका कहना है कि पुराना और कठोर हो चुका सीमेंट भी कूटकर निर्माण में इस्तेमाल किया जा रहा है। फ्लाई ऐश ईंटों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए हैं।
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खारे पानी से चिनाई का आरोप
ग्रामीण रजनीश, राजकुमार और प्रकाश ने आरोप लगाया कि निर्माण स्थल पर पानी को शुद्ध करने के लिए आरओ मशीन लगी है। इसके बावजूद बोरवेल के पानी से चिनाई की जा रही है। उनका दावा है कि अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान ही आरओ मशीन चालू की जाती है।
जंग लगे सरियों के इस्तेमाल पर सवाल
ग्रामीणों ने निर्माण में जंग लगे सरियों के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया। उन्होंने उच्चस्तरीय जांच कराकर गुणवत्ता की वास्तविकता सामने लाने की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार पूर्व मंत्री जेपी दलाल ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों से जांच कराने का आश्वासन दिया है।
केंद्र के निर्माण में मानकों के अनुरूप सामग्री इस्तेमाल की जा रही है। जिन ईंटों को निम्न स्तर का बताया जा रहा है, वे केंद्र के निर्माण के लिए नहीं बल्कि मजदूरों के आवास के लिए लाई गई हैं। निर्माण में आरओ पानी का प्रयोग किया जा रहा है। किसी तरह की अनियमितता नहीं होने दी जाएगी। - प्रमोद कुमार, जेई, पीडब्ल्यूडी।