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पारदेश्वर शिवलिंग की पूजा से पूरे होंगे भक्तों के सभी मनोरथ : डॉ अशोक गिरि महाराज

Mon, 22 Jul 2024 11:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Mon, 22 Jul 2024 11:39 PM IST
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All the wishes of the devotees will be fulfilled by worshiping Pardeshwar Shivling: Dr. Ashok Giri Maharaj
 बाबा जहरगिरी आश्रम  में पारदेश्वर शिवलिंग की पूजा करते महंत डॉ.अशोक गिरी महाराज।
भिवानी। बाबा जहरगिरि आश्रम में पारे से बना हरियाणा का एकमात्र स्थापित पारदेश्वर शिवलिंग है। सिद्धपीठ बाबा जहर गिरि आश्रम के पीठाधीश्वर महंत डॉ. अशोक गिरि महाराज ने सोमवार को पारदेश्वर शिवलिंग की पूजा की। उन्होंने बताया कि पारदेश्वर शिवलिंग की पूजा से भक्तों के सभी मनोरथ पूरे होंगे।
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उन्होंने कहा कि पारे से बने शिवलिंग को समस्त प्रकार की वस्तुओं से बने शिवलिंगों में सर्वश्रेष्ठ कहा गया है और इसकी पूजा सर्वमनोकामना पूर्ण करने वाली कही गई है। भोले नाथ को सावन का महीना अत्यंत प्रिय है। भगत भगवान को मनाने के लिए जप उपवास अभिषेक करते हैं।
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उन्होंने बताया कि पारा से बना हुआ धातु रस शिवलिंग का महत्व स्वयं भगवान शंकर ने माता पार्वती से कहा था, कि जो भी उपासक इस पारद शिवलिंग की पूजा-अर्चना करेगा। उस पर मेरी कृपा सदा बनी रहेगी। उसे अकाल मृत्यु, रोग, दरिद्रता जैसे समस्त दुखों से मुक्ति मिल जाएगी, और उसके मान-सम्मान, यश ,धन एवं एश्वर्य में वृद्धि होगी। अंत में वह सब सुखों को भोग कर वह मोक्ष को प्राप्त करेगा।
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उन्होंने बताया कि देवताओं ने भी हनुमानजी को पारद शिवलिंग उपहार में दिया और कहा की शिवलिंग की पूजा-अर्चना करने से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। भगवान विष्णु ने भी पारद शिवलिंग की उपासना करके भगवान शिव से अनेक शक्तियां प्राप्त की और राक्षसों का अंत किया था। यह शिवलिंग समस्त पापों का नाश करने वाला तथा रोगों से मुक्ति प्रदान करने वाला शिवलिंग है। पारद शिवलिंग के दर्शन करके स्पर्श करने मात्र से महादेव प्रसन्न हो जाते है। सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है।
पारद कहते हैं पारा यानी मरकरी को जो आपको थर्मामीटर के अंदर चमकता हुआ दिखता है। उन्होंने बताया कि ईश्वर सरकार पारे, चांदी और जड़ी बूटी को मिलाकर के जो शिवलिंग बनता है, वह पारद शिवलिंग कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव को पारा बहुत प्रिय है और उनके इस शिवलिंग की पूजा करने का विशेष महत्व है। पारद के शिवलिंग यानी पारदेश्वर महादेव की पूजा की इतनी महान महिमा पुराणों और उपनिषदों में बताई गई है। पारद शिवलिंग की पूजा आपको 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के बराबर पुण्य फल देती है। पारद का मतलब पारा से है। जब इसमें चांदी मिला दी जाती है तो यह पारद कहलाता है। पारा आपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण तत्व है। इस समूचे ब्रह्मांड में पारा ही एक ऐसा तत्व है जो धातु है लेकिन तरल रूप में पाया जाता है। वहीं जब इसे चांदी के मिला दिया जाता है तो यह ठोस रूप ले लेता है।

कहा गया है कि चांदी और पारा से बने पारद शिवलिंग में कई तरह की शक्ति आ जाती है। उदाहरण के तौर पर कहा गया है कि अगर पारद शिवलिंग को बर्फ पर रख दिया जाय तो वह अपने आकार के बराबर बर्फ को सोख लेता है। पारद शिवलिंग समस्त दुखों का नाश करने वाला मानसिक व शारीरिक चिंताओं का अंत करने और शांति प्रदान करने वाला बताया गया है। इस अवसर पर बाबा कैलाश गिरि, महामंडलेश्वर संगम गिरि, घनश्याम यति, दशरथ गिरि, शिवगिरि, गणेश गिरी, कामाख्या गिरी उपस्थित थे।
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