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शहर की हवा हुई खराब, एक्यूआई पहुंचा 222

Thu, 22 Oct 2020 12:51 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 22 Oct 2020 12:51 AM IST
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air pollution, aqi 222, garbage burned
मंगलवार देर रात कूड़े में लगी आग से उठता धुआं। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : Bhiwani
भिवानी। शहर की हवा खराब हो गई है और भिवानी प्रदेश के प्रदूषित शहरों में शुमार हो गया है। बुधवार को भिवानी में प्रदूषण का स्तर 222 एक्यूआई दर्ज किया गया, जिसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है। बुधवार को कुछ लोगों ने आंखों में जलन की भी शिकायत की। सांस, दमा के रोगियों के लिए प्रदूषण का यह स्तर घातक है।
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विशेषज्ञ प्रदूषण का स्तर बढ़ने के अनेक कारण बता रहे हैं, जिसमें सबसे प्रमुख आसपास के जिलों में पराली का जलाना, शहर में कचरों में आग लगाना आदि शामिल है। साथ ही शादी सीजन शुरू हो चुका है तो पटाखों का प्रयोग भी खूब हो रहा है।
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बता दें कि पिछले वर्ष दीवाली के नजदीक प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ गया था और जिला प्रशासन को शहर के सभी प्रमुख मार्गों, स्थानों पर पानी का छिड़काव करवाना पड़ा था। अब भी सर्दियों का सीजन शुरू होने के साथ ही प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। लॉकडाउन के दौरान भिवानी में प्रदूषण का स्तर 50 एक्यूआई से भी नीचे रहा। मगर अब फिर से तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञ लोगों को अभी से सतर्क रहने का संदेश दे रहे हैं।
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ये रहा प्रदूषण का स्तर
प्रदूषण का स्तर एक्यूआई में मापा जाता है। जिसमें मापने में पीएम 2.5 और पीएम 10 की अहम भूमिका होती है। बुधवार को भिवानी के पीएम 2.5 की मात्रा 56 और पीएम 10 की मात्रा 190 आंकी गई। इसके अलावा ओजोन 222 रही। दोपहर 12 से शाम चार बजे तक प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक रहा।
जल रहा कचरा, फैल रहा प्रदूषण
शहर में कचरा नगर परिषद और आमजन के लिए आफत बना है। नप के पास सफाई कर्मचारियों की कमी होने और सफाई का ठेका न होने के कारण सफाई कर्मचारी अक्सर कचरे के ढेर में आग लगा देते हैं। शहर के अंदरूनी बाजारों, कॉलोनियों में यह ज्यादा चल रहा है। रोहतक गेट से नया बाजार, सराय चौपटा, बिचला बाजार, जालान अस्पताल के पास तो रात को और सुबह-सवेरे कचरा जलते देखा जा सकता है। सोमवार को हांसी गेट पर कचरे में लगी आग से फैले धुएं के कारण राहगीरों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी थी और मार्ग तक वन-वे रहा था। दादरी रोड स्थित ऑटो मार्केट के पास भी खूब कचरा जल रहा है। यहां तो ट्रक आदि के बड़े-बड़े टायरों को भी जला दिया जाता है।
चिकित्सक की सलाह, सुरक्षा में ही बचाव
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि प्रदूषण से बचाव जरूरी है। प्रदूषण से सांस, फेफड़ों से संबंधित बीमारियों का खतरा है। सांस, दमा के मरीजों के लिए तो प्रदूषण का बढ़ता स्तर जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे में जरूरी है कि लोग कचरा न जलाएं और पटाखों से बचें। शादी हो या त्योहार खुशियों के साथ मनाए, पटाखों के साथ नहीं।

प्रदूषण का स्तर प्रभाव
0 से 50 अच्छा
51 से 100 संतोषजनक, सिर्फ संवेदनशील लोगों को ही सांस लेने में तकलीफ का खतरा
101 से 200 मध्यम, फेफड़ों, अस्थमा, हृदय रोगों का खतरा, सांस लेने में तकलीफ
201 से 300 खराब, ज्यादा समय रहने पर सांस लेने में तकलीफ, मरीजों को खतरा
301 से 400 बहुत खराब, लंबे समय तक रहने पर सांस की बीमारियों का खतरा
400 से 500 गंभीर, स्वस्थ लोगों को भी बीमार बना सकता है और बीमार के लिए घातक है।
वर्जन-
जिले में बासमती का एरिया है, अभी तक जिले में कोई भी पराली जलाने का मामला सामने नहीं आया है। मैंने सरपंचों की बैठक लेकर खास तौर पर निगरानी के निर्देश दिए हैं, क्योंकि कृषि विभाग ने गांव स्तर पर पराली जलाने की रोकथाम के लिए निगरानी कमेटी बनाई हुई है, इसमें सरपंच, ग्राम सचिव, पटवारी और एडीओ शामिल हैं।
- आत्माराम गोदारा, कृषि उपनिदेशक भिवानी।
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