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पर्दा प्रथा को दूर करने का प्रण: घूंघट की ओट से निकला ढाणी बीरन, गूंजी बदलाव की कविता

Sat, 26 Apr 2025 09:13 PM IST
शाहिल शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Published by: शाहिल शर्मा Updated Sat, 26 Apr 2025 09:13 PM IST
सार

पर्दा प्रथा को दूर करने का ढाणी बीरन गांव के चौपाल में ग्रामीणों ने प्रण लिया और बहुओं और बेटियों को पर्दा प्रथा से मुक्ति दिलवाई। डिटेल में पढ़ें खबर...

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A pledge was taken in Bhiwani to eliminate the practice of purdah
घूंघट की ओट से निकला ढाणी बीरन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

"बेटी तो वह है जो हमारे घर पर आती है, हमारे घर को बढ़ाती है, हमने बेटी जन्मी है वह अगलों का घर बढ़ाएगी। आज से हम यह प्रण लेते हैं कि किसी बहू-बेटी को यह नहीं कहेंगे कि घूंघट क्यों उतार रखा है...अगर कोई इसका विरोध करेगा तो उसके खिलाफ पंचायत कर उचित निर्णय लिया जाएगा।"
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ढाणी बीरन गांव की चौपाल पर रात के करीब आठ बजे बुजुर्ग धर्मपाल जब यह कहते हैं तो बाकी लोग दोनों हाथ उठाकर उनका समर्थन करते हैं। साथ ही खड़ीं गांव की सरपंच कविता देवी घूंघट की ओट से बाहर आने की पहल करती हैं और इस तरह हरियाणा का एक गांव पर्दा प्रथा से बेटियों-बहुओं को मुक्ति दिलाता है।
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तोशाम उपमंडल के इस गांव में शुक्रवार को उपायुक्त महावीर सिंह कौशिक के रात्रि ठहराव कार्यक्रम में यह नई इबारत लिखी गई। उपायुक्त ने कुप्रथा पर चोट की तो सरपंच ने आगे आकर खुद से पहल की। उपायुक्त ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनना चाहीं। सरपंच के पति राजबीर ने समस्याएं रखने लगे। उपायुक्त ने उन्हें टोकते हुए कहा, सरपंच कविता देवी ही समस्याएं रखें। कुछ लोगों ने कहा कि यह महिला सरपंच जेबीटी पास हैं। घूंघट करती हैं और आगे आने में झिझक महसूस करती हैं।
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इस पर उपायुक्त ने कहा कि यदि सभी ग्रामीण पर्दा प्रथा को मिटाने का प्रण लेते हैं और सरपंच घूंघट से बाहर आकर समस्याएं रखती हैं तो यह प्रदेश के लिए एक मिसाल बनेगा। उपायुक्त की इस बात का ग्रामीणों ने समर्थन किया। कविता देवी उठकर आगे आईं और घूंघट उठाकर पूरे गांव में भी पर्दा प्रथा को समाप्त करने में अपना भरपूर सहयोग देने की बात कही। वहां मौजूद गणमान्य लोगों, बुजुर्गों ने भी इस पहल के हक में हां भरी। बुजुर्गों ने कहा कि बदलते दौर के साथ कुछ बदलाव समाज में लाना बेहद जरूरी है। ग्रामीणों ने उपायुक्त को आश्वासन दिया कि वे पर्दा प्रथा को खत्म करने में पूरा सहयोग करेंगे। उपायुक्त ने कहा कि गांव ढाणी बीरन का यह संदेश देशभर की अन्य महिला पंचायत प्रतिनिधियों के लिए मिसाल बनेगा।

मैंने जेबीटी तक पढ़ाई की हुई है। इसके बाद मेरी शादी हो गई। मैं अपनी ससुराल में आने के बाद से ही यहां घूंघट में रही हूं। चुनाव के दौरान भी मैंने गांव के बड़े-बुजुर्गों के सामने घूंघट नहीं खोला। रात्रि ठहराव कार्यक्रम में डीसी साहब की प्रेरणा और बड़े-बुजुर्गों के आह्वान के बाद मैंने घूंघट हटाया है। अब मैं इस प्रथा के खिलाफ अन्य महिलाओं को भी जागरूक करूंगी। गांव की महिला पंच भी घूंघट नहीं करेंगी।

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