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यातायात नियम मानने को तैयार नहीं लोग, रोज होता है 200 का चालान
Updated Sat, 02 Sep 2017 01:16 AM IST
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भिवानी। यातायात नियमों का पालन शायद लोगों की आदत में शुमार नहीं है। लोग धड़ाधड़ नियम तोड़ रहे हैं और चालान करा रहे हैं। नियम तोड़ने पर हर रोज औसतन 200 राहगीरों पर पुलिस जुर्माना लगा रही है। चालान-जुर्माने के बावजूद वाहन चालक न हेलमेेट पहनने को तैयार हैं और न ही ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) या रजिस्ट्रेशन (आरसी) रखने के लिए। रोज होने वाले दो सौ चालानों में से सौ के लगभग केवल हेलमेट और डीएल-आरसी के हैं।
ट्रैफिक पुलिस के पिछले ढाई साल के चालान के आंकड़े बताते हैं कि जिले के लोग यातायात नियमों का कितनी ईमानदारी से पालन करते हैं। वर्ष 2015, 2016 और इस साल 31 जुलाई तक के आंकड़े बताते हैं कि जिले में यातायात नियम तोड़ने पर एक लाख 87 हजार 583 लोगों का चालान हुआ है। महीने का औसत 6051 बनता है। यानी, हर रोज औसतन 201 वाहन चालकों का चालान कटा और जुर्माना किया जाता है।
एक और चौंकाने वाली बात यह है कि एक लाख 87 हजार 583 चालान कटवाने वाले लोगों में में सबसे ज्यादा (88,322) बिना हेलमेट वाहन चलाने वाले हैं। दूसरे नंबर वे लोग हैं, जिनके पास जांच के दौरान ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन का रजिस्ट्रेशन तक नहीं मिला। ऐसे लोगों की संख्या तीन साल में 45 हजार 320 रही। इसका मतलब, 2849 हर महीने और 95 चालान प्रतिदिन हुए।
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ट्रिपल राइडिंग (दोपहिया वाहन पर तीन सवारी) के मामले भी कम नहीं हैं। पुलिस की तमाम सख्ती के बावजूद ट्रिपल सवारी करने से लोग बाज नहीं आ रहे। बीते तीन साल के दौरान हर रोज औसतन 21 दोपहिया वाहन चालकों को तीन सवारियों के साथ पुलिस ने पकड़ा और चालान किया।
चालान के आंकड़े इस बात को तस्दीक करते हैं कि यातायात नियमों को लोग अब भी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। चौक-चौराहों पर पुलिस की नाकेबंदी से चालान की संख्या और राशि तो बढ़ती जा रही है, लेकिन उस अनुपात में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता नहीं बढ़ रही। पुलिस महकमे को लोगों में जागरूकता बढ़ानी होगी।
चालान मंजूर....हेलमेट पहनना नहीं
चालान के आंकड़े बताते हैं कि पिछले ढाई साल में सर्वाधिक चालान हेलमेट न पहनने वालों के हुए हैं। इस दौरान 88 हजार 332 चालान हुए। यानी, हर महीने औसतन 2850 और प्रतिदिन 95 दोपहिया वाहन चालकों को पुलिस ने बिना हेलमेट पकड़ा और चालान किया।
पुलिस का खजाना फुल, चालान से साल में दो करोड़ रुपये की कमाई
यातायात नियमों के प्रति लापरवाह राहगीर पुलिस महकमे के कमाऊ पुत हैं। जनवरी 2015 से लेकर 31 जुलाई 2017 के बीच नियम तोडने वाले राहगीरों ने जुर्माना राशि के तौर पर 6.24 करोड़ रुपये पुलिस के खजाने में जमा कराए। प्रति माह का औसत निकालें तो यह 20 लाख रुपये अधिक बनते हैं। साल दर साल जुर्माना राशि देखें तो 2015 में दो करोड़ 72 लाख 51 हजार 600 रुपये, अगले साल दो करोड़ छह लाख 97 हजार 500 रुपये है। इस साल के पहले सात महीनों में एक करोड़ 44 लाख 70 हजार 200 रुपये जमा हुए।
लोग अपनी सेफ्टी को तरजीह दें
बिना हेलमेट के चालान के आंकड़े जाहिर करते हैं कि अभी लोगों को अधिक जागरूक करने की जरूरत है। लोग अब भी अपनी सेफ्टी को तरजीह नहीं देते। खासकर युवा वर्ग। युवाओं को यह समझना होगा कि फैशन हेयर स्टाइल आदि से ज्यादा कीमती उनकी अपनी जान है। सड़क हादसे में 90 प्रतिशत लोगों की जान हेड इंजरी से जाती है। दोपहिया वाहन चालकों की मानसिकता बदलने की जरूरत है। दूसरा, लोगों की धारणा है कि गाड़ी में ओरिजनल कागजात रखोगे तो चोरी हो जाएंगे। जबकि, ओरिजनल कागज गाड़ी के साथ रखने अनिवार्य हैं। यातायात नियमों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए पुलिस और मेहतन करेगी।
इंस्पेक्टर पवन
एसएचओ, ट्रैफिक पुलिस
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ट्रैफिक पुलिस के पिछले ढाई साल के चालान के आंकड़े बताते हैं कि जिले के लोग यातायात नियमों का कितनी ईमानदारी से पालन करते हैं। वर्ष 2015, 2016 और इस साल 31 जुलाई तक के आंकड़े बताते हैं कि जिले में यातायात नियम तोड़ने पर एक लाख 87 हजार 583 लोगों का चालान हुआ है। महीने का औसत 6051 बनता है। यानी, हर रोज औसतन 201 वाहन चालकों का चालान कटा और जुर्माना किया जाता है।
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एक और चौंकाने वाली बात यह है कि एक लाख 87 हजार 583 चालान कटवाने वाले लोगों में में सबसे ज्यादा (88,322) बिना हेलमेट वाहन चलाने वाले हैं। दूसरे नंबर वे लोग हैं, जिनके पास जांच के दौरान ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन का रजिस्ट्रेशन तक नहीं मिला। ऐसे लोगों की संख्या तीन साल में 45 हजार 320 रही। इसका मतलब, 2849 हर महीने और 95 चालान प्रतिदिन हुए।
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ट्रिपल राइडिंग (दोपहिया वाहन पर तीन सवारी) के मामले भी कम नहीं हैं। पुलिस की तमाम सख्ती के बावजूद ट्रिपल सवारी करने से लोग बाज नहीं आ रहे। बीते तीन साल के दौरान हर रोज औसतन 21 दोपहिया वाहन चालकों को तीन सवारियों के साथ पुलिस ने पकड़ा और चालान किया।
चालान के आंकड़े इस बात को तस्दीक करते हैं कि यातायात नियमों को लोग अब भी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। चौक-चौराहों पर पुलिस की नाकेबंदी से चालान की संख्या और राशि तो बढ़ती जा रही है, लेकिन उस अनुपात में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता नहीं बढ़ रही। पुलिस महकमे को लोगों में जागरूकता बढ़ानी होगी।
चालान मंजूर....हेलमेट पहनना नहीं
चालान के आंकड़े बताते हैं कि पिछले ढाई साल में सर्वाधिक चालान हेलमेट न पहनने वालों के हुए हैं। इस दौरान 88 हजार 332 चालान हुए। यानी, हर महीने औसतन 2850 और प्रतिदिन 95 दोपहिया वाहन चालकों को पुलिस ने बिना हेलमेट पकड़ा और चालान किया।
पुलिस का खजाना फुल, चालान से साल में दो करोड़ रुपये की कमाई
यातायात नियमों के प्रति लापरवाह राहगीर पुलिस महकमे के कमाऊ पुत हैं। जनवरी 2015 से लेकर 31 जुलाई 2017 के बीच नियम तोडने वाले राहगीरों ने जुर्माना राशि के तौर पर 6.24 करोड़ रुपये पुलिस के खजाने में जमा कराए। प्रति माह का औसत निकालें तो यह 20 लाख रुपये अधिक बनते हैं। साल दर साल जुर्माना राशि देखें तो 2015 में दो करोड़ 72 लाख 51 हजार 600 रुपये, अगले साल दो करोड़ छह लाख 97 हजार 500 रुपये है। इस साल के पहले सात महीनों में एक करोड़ 44 लाख 70 हजार 200 रुपये जमा हुए।
लोग अपनी सेफ्टी को तरजीह दें
बिना हेलमेट के चालान के आंकड़े जाहिर करते हैं कि अभी लोगों को अधिक जागरूक करने की जरूरत है। लोग अब भी अपनी सेफ्टी को तरजीह नहीं देते। खासकर युवा वर्ग। युवाओं को यह समझना होगा कि फैशन हेयर स्टाइल आदि से ज्यादा कीमती उनकी अपनी जान है। सड़क हादसे में 90 प्रतिशत लोगों की जान हेड इंजरी से जाती है। दोपहिया वाहन चालकों की मानसिकता बदलने की जरूरत है। दूसरा, लोगों की धारणा है कि गाड़ी में ओरिजनल कागजात रखोगे तो चोरी हो जाएंगे। जबकि, ओरिजनल कागज गाड़ी के साथ रखने अनिवार्य हैं। यातायात नियमों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए पुलिस और मेहतन करेगी।
इंस्पेक्टर पवन
एसएचओ, ट्रैफिक पुलिस