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ऑन लाइन के फेर में फंसे किसान, तीन-तीन दिन बाद भी नहीं हो रही खरीद
Updated Fri, 12 Oct 2018 12:45 AM IST
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भिवानी। जिले में ऑनलाइन के फेर में फंसे किसान बाजरे की फसल बेचने के लिए परेशान हैं। अनेक किसानों के बाजरे की तीन-तीन दिन तक खरीद नहीं हो रही। फरद में नाम नहीं होने के चलते भी किसान अपनी फसल नहीं बेच पा रहे है। अब तक पांच हजार क्विंटल बाजरे की ही खरीद हो पाई है। कागजी कार्रवाई और अधिकारियों के बीच फंसे किसान औने-पाने दामों पर आढ़तियों को बाजरा बेचने को मजबूर हैं। अधिकतर किसानों ने बातचीत में विभाग की लचर कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
बता दें कि एक अक्तूबर से अनाज मंडी में बाजरा फसल की खरीद शुरू हुई थी। इस बार खरीद ऑनलाइन है यानी किसान को पहले अपनी फसल की ऑनलाइन कितनी जमीन में बाजरे की बिजाई कर रखी है, इससे संबंधित जानकारी दर्ज करानी थी। मगर ऑनलाइन प्रक्रिया किसानों पर भारी पड़ रही है। कहीं फरद में नाम नहीं होना परेशानी बना हुआ है तो कहीं पोर्टल पर एकड़ की जगह कनाल भरा जाना, अकाउंट नंबर की जगह आधार कार्ड नंबर दर्ज होने, पटवारी से वेरिफाई नहीं होना आदि समस्याएं बनी हुई हैं।
1350 रुपये के हिसाब से बेचों तो रख जाओ
खरीद में सबसे गंभीर समस्या है कि फरद में अगर नाम नहीं है तो किसान के बाजरे की खरीद नहीं होगी। ऐसे में किसान बाजरा आढ़तियों को औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर है। किसान बलवान सिंह ने बताया कि उसने तीन एकड़ जमीन में बाजरे की बिजाई करने की जानकारी पोर्टल पर दी और मंडी में बाजरा बेचने के लिए लाया, मगर यहां एक एकड़ की फरद में उसका नाम नहीं बताकर करीब एक एकड़ की फसल की खरीद नहीं कर रहे। आढ़ती कह रहे हैं कि 1350 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बाजरा हम रख लेंगे।
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समस्या किसानों की जुबानी
मालवास कोहाड़ वासी बलवान सिंह ने बताया कि पांच एकड़ बाजरे की फसल के अनुसार करीब 50 क्विंटल का रजिस्ट्रेशन करवाया था। सारे कागजात भी उपलब्ध करवा दिए और ओटीपी नंबर भी आ गया। मोबाइल पर मैसेज आया कि वेरिफाइड बाय पटवारी। यहां जो प्रिंट आउट निकालकर दिया है, उस पर लिख दिया नोट वेरिफाई बाय पटवारी। अब किसानों को चक्कर काटने पड़ रहे है। 10 को सुबह आठ बजे आया था और अभी तक बाजरा की बिक्री नहीं हुई। कभी छुट्टी बताते है तो कभी नेटवर्क फेल बता देते है।
ढाणा नरसान निवासी भानी सिंह ने बताया कि पोर्टल पर ऑनलाइन बुकिंग कराते समय तीन एकड़ में करीब 40 क्विंटल बाजरा बताया था। लेकिन ऑनलाइन में उसकी तीन एकड़ की जगह तीन कनाल कर दिया। जिस कारण तीन दिन से उसकी खरीद नहीं हो रही। नोडल अधिकारी मंडी में हर समय उपलब्ध नहीं होने के कारण ज्यादा समय लगा। अब यह जानकारी तो ठीक करवा दी मगर खरीद अभी भी नहीं हुई है।
नंदगांव वासी मुकेश कुमार ने बताया कि पोर्टल पर जानकारी भरते समय कर्मचारी ने अकाउंट नंबर की जगह आधार कार्ड नंबर फिड कर दिया। जिस कारण उसकी खरीद भी लटक गई। इसके अलावा बड़ी समस्या ये भी है कि ठेके पर जमीन लेकर खेती करने वालों को जमीन मालिक, सरपंच से लिखवाकर लाना होगा। नहीं तो वह अपनी फसल नहीं बेच सकता।
नंदगांव वासी अजीत सिंह ने बताया कि उसके पिता की मृत्यु तीन वर्ष पूर्व हुई थी। जिस कारण कच्चे इंतकाल में उसका नाम दर्ज है। पक्का इंतकाल चार वर्ष के बाद ही दर्ज होगा। पक्का इंतकाल नहीं होने के कारण उसकी फसल नहीं खरीदी जा रही। अधिकारियों के चक्कर लगाकर किसी तरह इंतकाल की समस्या का समाधान करवाया है। मगर फसल अभी भी नहीं खरीदी गई है।
बता दें कि एक अक्तूबर से अनाज मंडी में बाजरा फसल की खरीद शुरू हुई थी। इस बार खरीद ऑनलाइन है यानी किसान को पहले अपनी फसल की ऑनलाइन कितनी जमीन में बाजरे की बिजाई कर रखी है, इससे संबंधित जानकारी दर्ज करानी थी। मगर ऑनलाइन प्रक्रिया किसानों पर भारी पड़ रही है। कहीं फरद में नाम नहीं होना परेशानी बना हुआ है तो कहीं पोर्टल पर एकड़ की जगह कनाल भरा जाना, अकाउंट नंबर की जगह आधार कार्ड नंबर दर्ज होने, पटवारी से वेरिफाई नहीं होना आदि समस्याएं बनी हुई हैं।
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1350 रुपये के हिसाब से बेचों तो रख जाओ
खरीद में सबसे गंभीर समस्या है कि फरद में अगर नाम नहीं है तो किसान के बाजरे की खरीद नहीं होगी। ऐसे में किसान बाजरा आढ़तियों को औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर है। किसान बलवान सिंह ने बताया कि उसने तीन एकड़ जमीन में बाजरे की बिजाई करने की जानकारी पोर्टल पर दी और मंडी में बाजरा बेचने के लिए लाया, मगर यहां एक एकड़ की फरद में उसका नाम नहीं बताकर करीब एक एकड़ की फसल की खरीद नहीं कर रहे। आढ़ती कह रहे हैं कि 1350 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बाजरा हम रख लेंगे।
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समस्या किसानों की जुबानी
मालवास कोहाड़ वासी बलवान सिंह ने बताया कि पांच एकड़ बाजरे की फसल के अनुसार करीब 50 क्विंटल का रजिस्ट्रेशन करवाया था। सारे कागजात भी उपलब्ध करवा दिए और ओटीपी नंबर भी आ गया। मोबाइल पर मैसेज आया कि वेरिफाइड बाय पटवारी। यहां जो प्रिंट आउट निकालकर दिया है, उस पर लिख दिया नोट वेरिफाई बाय पटवारी। अब किसानों को चक्कर काटने पड़ रहे है। 10 को सुबह आठ बजे आया था और अभी तक बाजरा की बिक्री नहीं हुई। कभी छुट्टी बताते है तो कभी नेटवर्क फेल बता देते है।
ढाणा नरसान निवासी भानी सिंह ने बताया कि पोर्टल पर ऑनलाइन बुकिंग कराते समय तीन एकड़ में करीब 40 क्विंटल बाजरा बताया था। लेकिन ऑनलाइन में उसकी तीन एकड़ की जगह तीन कनाल कर दिया। जिस कारण तीन दिन से उसकी खरीद नहीं हो रही। नोडल अधिकारी मंडी में हर समय उपलब्ध नहीं होने के कारण ज्यादा समय लगा। अब यह जानकारी तो ठीक करवा दी मगर खरीद अभी भी नहीं हुई है।
नंदगांव वासी मुकेश कुमार ने बताया कि पोर्टल पर जानकारी भरते समय कर्मचारी ने अकाउंट नंबर की जगह आधार कार्ड नंबर फिड कर दिया। जिस कारण उसकी खरीद भी लटक गई। इसके अलावा बड़ी समस्या ये भी है कि ठेके पर जमीन लेकर खेती करने वालों को जमीन मालिक, सरपंच से लिखवाकर लाना होगा। नहीं तो वह अपनी फसल नहीं बेच सकता।
नंदगांव वासी अजीत सिंह ने बताया कि उसके पिता की मृत्यु तीन वर्ष पूर्व हुई थी। जिस कारण कच्चे इंतकाल में उसका नाम दर्ज है। पक्का इंतकाल चार वर्ष के बाद ही दर्ज होगा। पक्का इंतकाल नहीं होने के कारण उसकी फसल नहीं खरीदी जा रही। अधिकारियों के चक्कर लगाकर किसी तरह इंतकाल की समस्या का समाधान करवाया है। मगर फसल अभी भी नहीं खरीदी गई है।