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गीता ग्रंथ नहीं, देश की विचाराधारा है : शिक्षामंत्री

Thu, 30 Nov 2017 12:58 AM IST
Updated Thu, 30 Nov 2017 12:58 AM IST
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गीता ग्रंथ नहीं, देश की विचाराधारा है : शिक्षामंत्री
गीता ग्रंथ नहीं, देश की विचाराधारा है : शिक्षामंत्री
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भिवानी। प्रदेश के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने कहा कि गीता भारत का विश्वास है। गीता ज्ञान और विज्ञान है। गीता में सभी समस्याओं का समाधान है। गीता ग्रंथ नहीं, देश की विचाराधारा है।
किरोड़ीमल पार्क में बुधवार को शिक्षा मंत्री ने श्रीमद्भगवत गीता के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर जिला स्तरीय अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के दूसरे दिन का शुभारंभ किया। लोगों को संबोधित करते हुए शिक्षामंत्री ने कहा कि गीता हर शंका का समाधान है। गीता सभी धर्मों का सार है। गीता एक जीवन दर्शन है, जो संपूर्ण मानव जाति को सही रास्ता दिखाती है।
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उन्होंने कहा कि गीता एक ऐसा ग्रंथ है जो कुरुक्षेत्र की युद्ध भूमि से लिखा गया है, इसलिए गीता एक ग्रंथ ही नहीं बल्कि एक शास्त्र है। युद्ध की भूमि में मोहग्रस्त अर्जुन को भगवान के श्रीमुख से जो अमृत ज्ञान मिला, वह विश्व के प्रत्येक व्यक्ति के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने यहां पर लगी प्रदर्शनी का अवलोकन किया और स्कूली बच्चों का हौसला अफजाई किया। उपायुक्त अंशज सिंह ने शिक्षा मंत्री को पवित्र गीता भेंट की। इस मौके पर एडीसी संगीता तेतरवाल, एसडीएम उत्तम सिंह, अजय चौपड़ा व राजेश कुमार के अलावा नगराधीश महेश कुमार, भाजपा जिला अध्यक्ष नंदराम धानिया, पूर्व विधायक शशी रंजन परमार, डीईओ सुरेश शर्मा, ऋतिक वधवा, सीएमओ रणदीप पूनिया आदि गणमान्य मौजूद रहे।
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अध्यात्मिक व योगी बने अधिकारी कर्मचारी: रिटायर्ड आईएएस
भिवानी। सेवानिवृत्त आईएएस डा. रामभगत लांग्यान ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों में नैतिकता का समावेश होना चाहिए। इससे सारी समस्याओं का समाधान निष्पक्ष भाव से होता है और गीता भी यही संदेश देती है। अधिकारी और कर्मचारी का आध्यात्मिक और योगी भी होना जरूरी है।
गीता महोत्सव के दूसरे दिन आयोजित सेमिनार में बतौर मुख्य वक्ता श्री लांग्यान ने कहा कि ऐसा कोई भी विभाग नही है, जो जनसेवा से जुड़ा हो। ऐसे में अधिकारियों व कर्मचारियों का दायित्व बनता है कि वे सेवाभाव से आमजन की समस्याओं को निवारण करें।
शिक्षाविद् डॉ. मुरलीधर शास्त्री ने कहा कि आज राष्ट्र का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उत्थान के लिए गीता का अध्ययन जरूरी है। गीता हमें निश्पक्ष और निस्काम भाव से कर्म करने की प्रेरणा देती है। श्री कृष्ण प्रणामी जनकल्याण ट्रस्ट से स्वामी मुकुंद शरण ने गीता को सभी धर्मो व ग्रंथों का सार बताया। जीओ गीता के संरक्षक ओपी नंदवानी ने कहा कि गीता में ज्ञान यज्ञ, कर्म योग, भक्ति योग की चर्चा है। डॉ. सिद्ध स्वरूप महाराज ने कहा कि हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सहित सभी धर्मों में समाहित है। आचार्य सुरेश कहा कि गीता निष्पक्ष भाव से कर्म करने की प्रेरणा देती है। पंडित शिव नारायण शास्त्री ने कहा कि गीता हमें समन्वयात्मक रूप से जीवन जीने की प्रेरणा देती है। सरदार सुदर्शन सिंह ने गीता महोत्सव में गुरुमुख वाणी को स्थान देने पर सरकार और प्रशासन को बधाई दी।


बच्चों ने पेश किए सांस्कृतिक कार्यक्रम
सेमिनार के दौरान भिवानी पब्लिक स्कूल, हलवासिया विद्या विहार, किरोड़ीमल पब्लिक स्कूल, डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्ण स्कूल और टीआईटी व. माध्यमिक विद्यालय के बच्चों ने जोरदार सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुती दी। इनके अलावा उत्तमी बाई कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से स्नेहा और काजल ने भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन के संवाद की प्रस्तुति दी। महोत्सव में राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हालुवास की छात्रा प्रीति ने गीता श्लोकोच्चारण किया।
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