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संत जगा रहा शिक्षा की अलख: बाबा का 41 दिन की खड़ी तपस्या का संकल्प, खड़े-खड़े ही दसवीं की परीक्षा दी
Fri, 01 Apr 2022 12:58 AM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Fri, 01 Apr 2022 12:58 AM IST
सार
रातभर की खड़ी तपस्या करने के बाद बाबा मान गिरी महाराज गुरुवार को दिन में दसवीं की ओपन बोर्ड परीक्षा देने पहुंचे। 43 वर्षीय खड़ेसुरी बाबा ने लेक्चर स्टैंड पर खड़े-खड़े दी दसवीं ओपन की परीक्षा दी।
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खड़ेसुरी बाबा ने लेक्चर स्टैंड पर खड़े-खड़े दी दसवीं ओपन की परीक्षा दी।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
मानव कल्याण के लिए 41 दिनों की खड़ी तपस्या का संकल्प लेकर तप कर रहे हरियाणा के भिवानी में खंड़ेसुरी बाबा मान गिरी महाराज ने गुरुवार को शहर के एक परीक्षा केंद्र के अंदर खड़े होकर दसवीं ओपन की परीक्षा दी। दरअसल 43 वर्षीय खंड़ेसुरी बाबा मान गिरी महाराज उर्फ संत सुरेंद्र अनाज मंडी के सामने पंचमुखी हनुमान मंदिर में 14 मार्च से 41 दिनों की खड़ी तपस्या कर रहे हैं।
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इसी बीच उनकी दसवीं ओपन बोर्ड की परीक्षा भी आ गई। महाराज ने महम गेट स्थित पंडित सीताराम शास्त्री संस्थान में बने परीक्षा केंद्र के अंदर दसवीं ओपन की परीक्षा दी। महाराज खड़ी तपस्या कर रहे हैं, इसलिए उन्होंने खड़े-खड़े लेक्चर स्टैंड की मदद से परीक्षा दी। महाराज ने बताया कि वे परीक्षा की तपस्या के दौरान खड़े-खड़े ही तैयारी कर रहे थे।
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परीक्षा केंद्र में परीक्षा देने पहुंचे बाबा ने बताया कि कई साल पहले उन्होंने एक साक्षात्कार में पढ़ाई के बारे में पूछे गए सवाल से मन व्यथित हो गया था। इसी के बाद उन्होंने ठाना था कि पढ़ाई करेंगे। इसलिए उन्होंने दसवीं ओपन की परीक्षा का आवेदन किया। अब वे परीक्षा दे रहे हैं। वे पास होने के लिए नहीं, बल्कि मेरिट में आने के लिए परीक्षा दे रहे हैं।
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उनका कहना था कि वे युवाओं को संदेश देना चाहते हैं कि कोरोना के दौरान काफी अर्से से स्कूल बंद रहे, बच्चे घर बैठे ऑनलाइन पढ़ाई भी करते रहे, मगर उनका ध्यान पढ़ाई से भटक गया। ऐसे युवाओं को सोचना चाहिए कि जब एक बाबा इस उम्र में आकर भी पढ़ाई कर रहा है तो उन्हें अपने बेहतर भविष्य के लिए अच्छी तरह पूरी लग्न से पढ़ाई करनी चाहिए।
बच्चों के अंदर पढ़ाई की जिज्ञासा बढ़े, यह संदेश देना इस परीक्षा का मकसद है। उन्होंने बताया कि संत महात्मा के लिए ज्यादातर समय आध्यात्मिक ज्ञान देने व लेने में बीतता है। किताबी ज्ञान में ज्यादा रुचि नहीं रहती। वे आत्मा और परमात्मा के बीच के भेद को मानव तक पहुंचाने में ही अपने को एकीकार किए रहते हैं।
वहीं परीक्षा केंद्र में स्कूल प्राचार्य डॉ. कांता गौड़ ने बताया कि परीक्षा देने आए एक बाबा ने लेक्चर स्टैंड का अनुरोध किया था, जिसे परीक्षा केंद्र अधीक्षक की अनुमति के बाद उपलब्ध कराया गया है।