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पिछले वर्ष कर्मचारियों की कम संख्या और कुछ विशेष की सिफारिशों पर कर्मचारी लगाने के कारण विवादों में रहा था ठेका
Updated Fri, 08 Jun 2018 01:04 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी।
सामान्य अस्पताल में पिछले वर्ष सफाई, सुरक्षा कर्मी व अन्य की नियुक्ति का ठेका लेने ठेकेदार को ही दोबारा से ठेका दिया गया है। पिछले वर्ष यह ठेका खूब विवादों में रहा और मंत्रियों, अधिकारियों तक को शिकायत दी गई। ठेकेदार पर कई आरोप भी लगे, जिसमें सबसे अहम 178 की जगह करीब 100 ही कर्मचारी लगाने जैसे आरोप भी थे। पिछले ठेका 31 मई को खत्म हुआ है। ठेका खत्म होने तक विवादों में घिरा रहा। अब स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों ने एक बार फिर उसी ठेकेदार को आगामी एक वर्ष के लिए ठेका दे दिया है। सिविल सर्जन का कहना है कि इस बार ठेकेदार के सभी कर्मचारियों की बायोमेट्रिक से हाजिरी लगवाएंगे और सभी के आधार कार्ड जमा करवा ड्रेस कोड लागू करेंगे। पिछली बार की तरह किसी तरह का फर्जीवाड़ा नहीं होने दिया जाएगा।
सामान्य अस्पताल में पिछले तीन वर्षों से सफाई, सिक्योरिटी, वार्ड सर्वेंट आदि का ठेका दिया जा रहा है। ठेके के नियमानुसार ठेकेदार को 178 कर्मचारी लगाने होंगे। ठेकेदार का पिछला कार्यकाल काफी विवादों में रहा। निर्धारित से कम कर्मचारी लगाने, समय पर कर्मचारियों को वेतन नहीं देने, किसी विशेष के कर्मचारी लगाने, विरोध करने पर कर्मचारी हटाने जैसे आरोप लगे। ठेकेदार का अंतिम समय का कार्यकाल स्टाफ सदस्यों की माने तो ठीक रहा। अप्रैल-मई माह में कर्मचारियों ने बेहतर कार्य किया और कर्मचारी भी पूरे नजर आए। विवादों में घिरे होने के बावजूद दोबारा उसी ठेकेदार को ठेका देने से सभी हैरान हैं। फिलहाल पिछले करीब सात दिन से सफाई नहीं होने से अस्पताल की सफाई व्यवस्था बदहाल है। जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं तो वार्डों में दुर्गंध से मरीजों का बैड पर रहना मुश्किल हो गया है।
पीएमओ ने जांच की तो गायब मिले थे 78 कर्मचारी
पिछले वर्ष तत्कालीन कार्यकारी प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. रघुवीर शांडिल्य ने अचानक ठेकेदार के कर्मचारियों की जांच शुरू कर दी। सभी को बुलाकर गणना की तो 100 से भी कम मिले। उस समय ठेकेदार ने कहा कि कुछ की रात्रि ड्यूूटी रहती है। सारी गणना के बाद पाया कि 108 ही कर्मचारी मिले। इसके बाद सभी की बायोमेट्रिक हाजिरी, सभी वार्डों के लिए इंचार्ज लगाकर जांच कराने का प्लान बना। उसी दौरान शिकायतों का दौर भी शुरू हुआ और मामला दबा दिया।
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कर्मचारियों ने भी लगाए थे तनख्वाह नहीं देने, रूपये ऐंठने के आरोप
ठेकेदार द्वारा लगाए कर्मचारियों ने समय पर वेतन नहीं मिलने पर हंगामा किया और सिविल सर्जन को ज्ञापन भी सौंपा था। कर्मचारियों का आरोप था कि उन्हें दो से तीन महीने तक तनख्वाह नहीं दी जाती। जिन कर्मचारियों ने विरोध किया उन्हें हटाने के भी आरोप लगाए गए थे।
अधिकारी बोले, कसेंगे नकेल, नहीं चलने दी जाएगी गड़बड़ी
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब व्यवस्था बदल चुकी है और ठेकेदार को किसी तरह की गड़बड़ी नहीं करने दी जाएगी। सभी कर्मचारियों के लिए प्लानिंग बनाई जाएगी। सभी कर्मचारियों की सभी जगह ड्यूटी फिक्स की जाएगी। सभी के आधार कार्ड जमा कराए जाएंगे। बायोमेट्रिक मशीन से हाजिरी लगेगी। इसके अलावा कर्मचारियों की हाजिरी और कार्य के लिए वार्ड अनुसार एक-एक अस्पताल कर्मचारी की ड्यूटी लगाई जाएगी।
पुराने ठेकेदार को ही इस बार ठेका दिया गया है। ठेकेदार को 178 कर्मचारी लगाने होंगे। डीजी हेल्थ के निर्देश मिलने के बाद वर्क ऑर्डर दे दिए गए हैं। इस बार कोई गड़बड़ी नहीं होने दी जाएगी और ठेकेदार द्वारा लगाए सभी कर्मचारियों के आधार कार्ड लिए जाएंगे। हाजिरी भी बायोमेट्रिक मशीन से लगवाई जाएगी। इसके अलावा स्टाफ की भी कार्य की जांच करने की ड्यूटी लगाई जाएगी। वह स्वयं भी निरीक्षण करेंगे।
-डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता, सिविल सर्जन
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भिवानी।
सामान्य अस्पताल में पिछले वर्ष सफाई, सुरक्षा कर्मी व अन्य की नियुक्ति का ठेका लेने ठेकेदार को ही दोबारा से ठेका दिया गया है। पिछले वर्ष यह ठेका खूब विवादों में रहा और मंत्रियों, अधिकारियों तक को शिकायत दी गई। ठेकेदार पर कई आरोप भी लगे, जिसमें सबसे अहम 178 की जगह करीब 100 ही कर्मचारी लगाने जैसे आरोप भी थे। पिछले ठेका 31 मई को खत्म हुआ है। ठेका खत्म होने तक विवादों में घिरा रहा। अब स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों ने एक बार फिर उसी ठेकेदार को आगामी एक वर्ष के लिए ठेका दे दिया है। सिविल सर्जन का कहना है कि इस बार ठेकेदार के सभी कर्मचारियों की बायोमेट्रिक से हाजिरी लगवाएंगे और सभी के आधार कार्ड जमा करवा ड्रेस कोड लागू करेंगे। पिछली बार की तरह किसी तरह का फर्जीवाड़ा नहीं होने दिया जाएगा।
सामान्य अस्पताल में पिछले तीन वर्षों से सफाई, सिक्योरिटी, वार्ड सर्वेंट आदि का ठेका दिया जा रहा है। ठेके के नियमानुसार ठेकेदार को 178 कर्मचारी लगाने होंगे। ठेकेदार का पिछला कार्यकाल काफी विवादों में रहा। निर्धारित से कम कर्मचारी लगाने, समय पर कर्मचारियों को वेतन नहीं देने, किसी विशेष के कर्मचारी लगाने, विरोध करने पर कर्मचारी हटाने जैसे आरोप लगे। ठेकेदार का अंतिम समय का कार्यकाल स्टाफ सदस्यों की माने तो ठीक रहा। अप्रैल-मई माह में कर्मचारियों ने बेहतर कार्य किया और कर्मचारी भी पूरे नजर आए। विवादों में घिरे होने के बावजूद दोबारा उसी ठेकेदार को ठेका देने से सभी हैरान हैं। फिलहाल पिछले करीब सात दिन से सफाई नहीं होने से अस्पताल की सफाई व्यवस्था बदहाल है। जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं तो वार्डों में दुर्गंध से मरीजों का बैड पर रहना मुश्किल हो गया है।
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पीएमओ ने जांच की तो गायब मिले थे 78 कर्मचारी
पिछले वर्ष तत्कालीन कार्यकारी प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. रघुवीर शांडिल्य ने अचानक ठेकेदार के कर्मचारियों की जांच शुरू कर दी। सभी को बुलाकर गणना की तो 100 से भी कम मिले। उस समय ठेकेदार ने कहा कि कुछ की रात्रि ड्यूूटी रहती है। सारी गणना के बाद पाया कि 108 ही कर्मचारी मिले। इसके बाद सभी की बायोमेट्रिक हाजिरी, सभी वार्डों के लिए इंचार्ज लगाकर जांच कराने का प्लान बना। उसी दौरान शिकायतों का दौर भी शुरू हुआ और मामला दबा दिया।
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कर्मचारियों ने भी लगाए थे तनख्वाह नहीं देने, रूपये ऐंठने के आरोप
ठेकेदार द्वारा लगाए कर्मचारियों ने समय पर वेतन नहीं मिलने पर हंगामा किया और सिविल सर्जन को ज्ञापन भी सौंपा था। कर्मचारियों का आरोप था कि उन्हें दो से तीन महीने तक तनख्वाह नहीं दी जाती। जिन कर्मचारियों ने विरोध किया उन्हें हटाने के भी आरोप लगाए गए थे।
अधिकारी बोले, कसेंगे नकेल, नहीं चलने दी जाएगी गड़बड़ी
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब व्यवस्था बदल चुकी है और ठेकेदार को किसी तरह की गड़बड़ी नहीं करने दी जाएगी। सभी कर्मचारियों के लिए प्लानिंग बनाई जाएगी। सभी कर्मचारियों की सभी जगह ड्यूटी फिक्स की जाएगी। सभी के आधार कार्ड जमा कराए जाएंगे। बायोमेट्रिक मशीन से हाजिरी लगेगी। इसके अलावा कर्मचारियों की हाजिरी और कार्य के लिए वार्ड अनुसार एक-एक अस्पताल कर्मचारी की ड्यूटी लगाई जाएगी।
पुराने ठेकेदार को ही इस बार ठेका दिया गया है। ठेकेदार को 178 कर्मचारी लगाने होंगे। डीजी हेल्थ के निर्देश मिलने के बाद वर्क ऑर्डर दे दिए गए हैं। इस बार कोई गड़बड़ी नहीं होने दी जाएगी और ठेकेदार द्वारा लगाए सभी कर्मचारियों के आधार कार्ड लिए जाएंगे। हाजिरी भी बायोमेट्रिक मशीन से लगवाई जाएगी। इसके अलावा स्टाफ की भी कार्य की जांच करने की ड्यूटी लगाई जाएगी। वह स्वयं भी निरीक्षण करेंगे।
-डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता, सिविल सर्जन